सरकार खाना-नौकरी नहीं दे सकती तो भीख क्राइम कैसे?
भीख मांगना उस देश में क्राइम कैसे हो सकता है, जहां की सरकार लोगों को पर्याप्त भोजन और नौकरियां मुहैया कराने में असमर्थ है। बुधवार को यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटाने की जनहित याचिका पर की है। एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरिशंकर की बेंच ने कहा कि कोई भी व्यक्ति केवल अपनी जरूरत के चलते भीख मांगता है, पसंद से नहीं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि हमें, आपको या किसी को भी एक करोड़ रुपए दे दिए जाएं तो वह भीख नहीं मांगेगा। उधर, सरकार के वकील ने कहा कि बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट के तहत भीख मांगना अपराध है। इस एक्ट में पर्याप्त चेक एंड बैलेंस हैं। इससे पूर्व सरकार ने कोर्ट में कहा था कि गरीबी के कारण भीख मांगना कोई अपराध नहीं है। लेकिन अगर कोई मर्जी से या दबाव में भीख मांग रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हमारे देश में लोगों के सिर्फ अिधकार होते हैं, कोई कर्तव्य नहीं होता : हाईकोर्ट
नई दिल्ली | समय आ गया है कि नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। हमारे देश में लोगों के केवल अधिकार होते हैं, कर्तव्य नहीं। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट सॉलिड वेस्ट के नियमों में स्रोत पर ही कचरे को अलग-अलग न करने पर सिविक एजेंसियों के बजाए व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहराने के प्रावधान को चुनौती देने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने इस बारे में पर्यावरण एवं शहरी विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। कोर्ट ने इस मामले में मदद के लिए पर्यावरणविद सुनीता नारायण को न्याय मित्र नियुक्त किया है। बेंच ने याचिकाकर्ता एनजीओ से पूछा कि जनता द्वारा पैदा कूड़े के अलग-अलग करने में क्या गलत है जब पूरे विश्व में ऐसा किया जा रहा है।