आठ साल के बच्चे को कूड़ा बीनते देखा तो ऐसे बच्चों के लिए स्कूल खोलने की
ठान ली, 23 साल की प्रियंका अाज 60 बच्चों के स्कूल में रोज 4 घंटे पढ़ाती हैंराजन शर्मा | नई दिल्ली rajan.sharma@dbcorp.in
एमए कर रही 23 साल की प्रियंका शर्मा ने कॉलेज जाते समय 8 साल के बच्चे को कूड़ा बीनते देखा। उस पल कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने कूड़ा बीनने वाले बच्चों के लिए स्कूल खाेलने की ठान ली। 8 बच्चों से शुरू हुए उसके स्कूल में आज 60 बच्चे पढ़ रहे हैं। प्रियंका अपने स्कूल के करीब 17 बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में करवा चुकी हैं और कई परिजनों को इस साल दाखिले के लिए तैयार कर चुकी हैंै। हालांकि, कई बच्चों के घरवालों ने स्कूल में दाखिले से मना कर दिया। ऐसे में अब वह रोज करीब 4 घंटे इन बच्चों को पार्क में बने अपने स्कूल में पढ़ाती हैंै।
ऐसे की शुरुआत... घरवालों से मिले 5 हजार रु. से पार्क में दरी और व्हाइट बोर्ड लगायाप्रियंका परिवार के साथ इन्दिरापुरम इलाके में रहती हैं और अभी नेट की तैयारी कर रही हैं। साल 2017 में वह इग्नू से एमए कर रही थीं। एक दिन वह अपनी क्लास के लिए कॉलेज जा रही थीं। घर के पास बनी झुग्गियों से थोड़ी दूरी पर एक 8 साल का बच्चा कूड़ा बीन रहा था। उस बच्चे को देख प्रियंका विचलित हो गईं और कॉलेज जाने के बजाए घर वापस आ गईं। अगले दिन वह तैयार हुई और उन झुग्गियों में जा पहुंचीं, जहां वह बच्चा रहता था। काफी तलाश के बाद प्रियंका उस बच्चे के घर तक पहुंच गई और उसके परिजनों ने उसे स्कूल भेजने की बात कही। मगर परिजनों ने पैसा न होने के चलते बच्चे को स्कूल भेजने से मना कर दिया और प्रियंका अपने घर आ गई। उसने अपने परिजनों ने बात की और घर के नजदीक पार्क में बच्चों के लिए स्कूल खोल दिया। परिजनों से मिले 5 हजार रुपए से प्रियंका पार्क में बिछाने के लिए दरी और बच्चों को पढ़ाने के लिए व्हाइट बोर्ड और बाकी का सामान ले आई और खुद का स्कूल शुरू कर दिया।
धुन ऐसी कि... जेब खर्च के लिए मिलने वाले पैसों से इन बच्चों के लिए पढ़ाई का सामान जुटाती हैंगाजियाबाद के इंदिरापुरम में पार्क में अपनी साइिकल को स्टैंड बनाकर उसके सहारे व्हाइट बोर्ड रख पढ़ाती हैं प्रियंका।
आसान नहीं थी राह...
परिजन ये भी बोले-कहीं आप बच्चा चुराकर भाग गईं तो...स्कूल शुरू होने के बाद उसमें बच्चों को लाना किसी संघर्ष से कम नहीं था। स्कूल के लिए सारा समान जुटाने के बाद प्रियंका वापस झुग्गियों में पहुंची और लोगों से अपने बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए कहा। मगर कोई भी तैयार नहीं हुआ। किसी ने कहा कि आप बच्चों को चोरी करके ले जाएंगी। प्रियंका ने कई दिन तक लगातार लोगों को समझाया। जो लोग तैयार हुए उन्हें अपने घर लेकर आई और आधार कार्ड और पहचान से संबंधित दस्तावेज दिए।
ऐसे जुटाए संसाधन...
बच्चे बढ़े तो पैसे कम पड़ गए, दोस्तों की मदद लीस्कूल खोलने के बाद बच्चों के लिए पढ़ाई का सामान जुटाना और स्कूल को बिना पैसों के चलाना मुश्किल था। प्रियंका ने अपनी जेब खर्च के 5 हजार रुपए स्कूल के लिए सामान जुटाने में खर्च करना शुरू कर दिया। मगर बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ ही खर्च बढ़ने लगा। ऐसे में प्रियंका ने अपने दोस्तों की मदद लेनी शुरू की। शुरू में तो दोस्तों को उनकी बातें समझ नहीं आई। लेकिन अब उनके कई दोस्त बच्चों को पढ़ाई का सामान दे जाते हैं।