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स्टोरी 1 : इस शनिवार को दोपहर बाद करीब 4

3 वर्ष पहले
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स्टोरी 1 : इस शनिवार को दोपहर बाद करीब 4 बजे नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान के भीतर व आसपास पार्किंग की जगहें धीरे-धीरे भरती जा रही थीं। जहां तक युवाओं की बात है, यह कोई बहुत बड़ा मैच नहीं था, क्योंकि उन्हें तो मैच शुरू होने के पहले ही मैच का परिणाम मालूम था। आईपीएल 2018 से बाहर हो चुकी दिल्ली डेयरडेविल (डीडी) चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ खेल रही थी। चेन्नई सुपरकिंग्स को पता था कि उनकी प्रतिद्वंद्वी टीम किसी भी टीम से बहुत कमजोर है। लेकिन दर्शक तब चकित रह गए जब आईपीएल के सबसे बड़े हीरो महेन्द्र सिंह धोनी और उनकी टीम 162 के मामूली स्कोर का पीछा नहीं कर सकी। मैदान के बाहर समीप के लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल रोड पर दिल्ली पुिलस के थोड़े भारी शरीर के कॉन्स्टेबल खुली सड़क पर सिगरेट पीते-पीते आपस में बातें कर रहे थे। शायद वे अपने बॉस का इंतजार कर रहे थे कि वे आएं और उन्हें ट्रैफिक का काम बांट दें। कई चीजों का उन्हें कोई ध्यान ही नहीं था और वे अपनी ही बातों में डूबे हुए थे।

वे जो धुआं छोड़ रहे थे उस पर लोग मुंह चिढ़ा रहे थे पर उन्हें कोई परवाह नहीं थी। कुछ महिलाएं तो उनके ठीक सामने से गुस्सा जताते निकलीं पर पुलिसकर्मियों को पता ही नहीं चला। इसी तरह उन्होंने पीछे से बाइक पर आए युवा ऑफिसर को भी नहीं देखा। वह पास आया, अपना वाहन रोका और कहा, ‘ट्रैफिक तो आप बाद में भी संभाल सकते हैं पर पहले अपनी सिगरेट बुझाइए। यहां मैच देखने आने वाले हर व्यक्ति के पास मोबाइल फोन है, फिर कई फोटो जर्नलिस्ट यहां घूम रहे हैं। इस मुद्‌दे को तिल का ताड़ बनने में देर नहीं लगेगी। खासतौर पर सोशल मीडिया के हाइप के इन दिनों में।’

ऑफिसर जानता था कि डीडी के पूर्व कोच राहुल द्रविड़ एक विज्ञापन अभियान में दिखाई देते हैं। उसमें वे कहते हैं, ‘जब आप कुछ अच्छा कर रहे होते हैं तो सिर्फ अपने पार्टनर की गलती से आपकी ज़िंदगी क्रिकेट की तरह रनआउट नहीं हो सकती।’ उनके इस संवाद के दौरान सड़क पर कोई लगातार सिगरेट पी रहा है और धुएं से कई लोगों को परेशानी हो रही है। कोई उन्हें रोक नहीं रहा है। इस विज्ञापन ने आम लोगों में बहुत जागरूकता पैदा की है। दिल्ली पुलिस के तीनों सिपाहियों ने तत्काल बात मान ली।

स्टोरी 2 :एक दिन पहले मैं गुजरात के सीमावर्ती शहर दाहोद में था। इसे दोहद भी कहते हैं (यानी दो सीमाएं, क्योंकि राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमाएं पास ही हैं)। मैं सिर्फ ताजे बने दाल-चावल खाना चाहता था और स्थानीय लोगों ने बस स्टैंड के सामने होटल त्रिभुवन का सुझाव दिया। रेलवे स्टेशन से तो वहां चलकर पहुंचा जा सकता था। यदि आप बारीकियां पकड़ने में माहिर हैं तो किसी भी होटल के कर्मचािरयों की खूबियां और खामियां आपको तत्काल पता लग जाती हैं। डिनर टेबल की व्यवस्था पर निगाह डालने से ही साफ पता चलता था कि मैनेजमेंट होटल तो अच्छे इरादे से चला रहा है पर कर्मचारी उतने प्रशिक्षित नहीं हैं।

बैठने के पहले ही मैंने साल्ट-पेपर कंटेनर की बाहरी सतह तैलीय होने की अोर ध्यान दिलाया, क्योंकि उसे हमारे पहले कई ग्राहकों ने छुआ होगा। नेपाल के काठमांडू के रहने वाले मैनेजर को पता चल गया कि कुछ डिमांडिंग ग्राहक आ गए हैं। उसने तत्काल स्थिति अपने नियंत्रण में ली और लगातार स्टाफ पर निगाह रखी कि वे हमारे लिए टेबल कैसे तैयार करते हैं, ऑर्डर कैसे लेते हैं, कैसे हमें परोसते हैं। हालांकि, वह हमसे काफी दूर था लेकिन, उसकी आंख हमारी टेबल पर कैटरिंग में लगे सारे कर्मचारियों पर थी। वह इशारों से उनसे बात कर रहा था अौर यहां तक कि उसने एक डिश पूरी तरह बदली और नई तैयार करवाई जब उसने देखा कि वह हॉस्पिटैलिटी के नियमों के मुताबिक नहीं बनाई गई है- पकाए खाने को खुले हाथों से नहीं छूना चाहिए।

फंडा यह है कि अलग तरह से सोचना इस युग की जरूरत है, लेकिन उस पर तेजी से काम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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