तरुण सिसोदिया | नई दिल्ली tarun.kumar6@dbcorp.in
यदि आप एम्स में इलाज कराने जा रहे हैं या किसी सगे संबंधी का हाल जानने के लिए जाने की सोच रहे हैं तो जरा संभलकर जाएं, ऐसा न हो कि डेंगू आपको अपनी गिरफ्त में ले ले। दरअसल साउथ एमसीडी को यहां अपनी नियमित जांच के दौरान डेंगू का लार्वा मिला। इसके बाद एम्स का चालान काट दिया गया। एम्स के अलावा कुतुबमीनार और अन्य खास जगहों के चालान भी काटे गए हैं। एम्स में रेजिडेंट डॉक्टर्स के हॉस्टल में मच्छरों का लार्वा पाया गया। इसकी वजह से हॉस्टल की वार्डन का चालान किया गया।
मेट्रो स्टेशन और आईआईटी कैंपस में भी मिल चुका है डेंगू का लार्वा
12
मामले डेंगू के आ चुके हैं अब तक दिल्ली में
8
केस मलेरिया के भी पॉजिटिव मिल चुके हैं
4
77
मामले चिकनगुनिया के सामने आ चुके हैं
जगह छोड़ी गईं गंबोजिया मछली
जनवरी से अब तक 80 सरकारी संस्थानों का कट चुका चालान
साउथ एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक इस वर्ष मच्छर जनित बीमारियों पर काबू पाने के लिए निगम ने एक्शन प्लान तैयार किया है। हमने एएसआई के साथ ही एम्स के हॉस्टल, आईआईटी कैंपस में ब्लॉक 99 सी, तिलक नगर मेट्रो स्टेशन समेत निगम के प्राइमरी स्कूलों और दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरियों के चालान काटे हैं। एक जनवरी से लेकर अब तक 80 सरकारी संस्थानों के चालान किए गए हैं। गौरतलब है कि इस वर्ष अब तक दिल्ली में डेंगू के 12, मलेरिया के आठ और चिकनगुनिया के चार मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल डेंगू और चिकनगुनिया के कई मामले सामने आए थे। समय पर इंतजाम न िकए जाने के कारण डेंगू का लार्वा पनप जाता है और लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है।
पिछले साल के मुकाबले 3 गुना ज्यादा घरों में हो चुका है स्प्रे
डेंगू की गंभीरता को देखते हुए इस बार तीनों एमसीडी बहुत ज्यादा एक्टिव हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल पिछले साल के मुकाबले अब तक तीन गुना ज्यादा घरों में एंटी लार्वा स्प्रे किया जा चुका है। पिछले साल 1 जनवरी, 2017 से 13 मई, 2017 तक 78,499 घरों में स्प्रे किया गया था। इस साल 13 मई 2018 तक 2,01305 घरों में स्प्रे किया जा चुका है। वैसे इस साल अभी तक 10,618 घरों में मच्छर पनपते हुए पाए गए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में कुछ ज्यादा है। पिछले साल 13 मई तक 10,374 घरों में लार्वा पाया गया था। हालांकि, इस बार ठहरे हुए पानी में पिछले साल के गंबोजिया मछली कम जगह छोड़ी गई हैं। पिछले साल 77 जगह छोड़ी गई थीं, इस साल यह 73 जगह ही छोड़ी गई हैं।