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दो लाख मरीज बिना दवा लिए लौटे, हड़ताल जारी

3 वर्ष पहले
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विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली सरकार के 789 फार्मासिस्ट सोमवार को हड़ताल पर चले गए। करीब 300 फार्मासिस्टों ने सचिवालय के बाहर हड़ताल की। इस कारण राजधानी के सभी बड़े-छोटे अस्पतालों , डिस्पेंसरियों और पॉलीक्लिनिक से करीब 2 लाख मरीज बिना दवा लिए लौट गए। प्रदर्शन के दौरान फार्मासिस्ट इम्प्लाइज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजय बजाज ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कैडर रिव्यू करने पर सहमति जताई थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की आईएएस लॉबी जैन की बात नहीं मान रही है, इसलिए रिव्यू भी नहीं कर रही है। हालांकि, शाम 6 बजे फार्मासिस्टों ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव राजीव यदुवंशी से 20 मिनट तक मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराया। उधर, संजय ने आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी हड़ताल का अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। उनकी ओर से कोई आश्वासन भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हमारी बस एक ही मांग है कि कैडर रिव्यू किया जाए ताकि फार्मासिस्टों का प्रमोशन हो। अभी तक दिल्ली सरकार में फार्मासिस्टों के प्रमोशन का कोई प्रावधान ही नहीं है।

फार्मासिस्टों की प्रमुख मांगें

225 फार्मासिस्टों के पद खाली। मरीजों की संख्या के अनुसार हो नियुक्ति, अभी 4 गुना अधिक फार्मासिस्टों की जरूरत।

फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन एक्ट-2015 लागू किया जाए।

यूपी और उत्तराखंड की तर्ज पर फार्मेसी काउंसिल बनाई जाए।

मोहल्ला क्लीनिकों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति हो।

पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल हो।

डॉक्टरों और नर्सों की तरह फार्मासिस्टों को भी नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाए।

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