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दिल्ली सरकार के 6 अस्पतालों में लगेंगी डायलिसिस की 90 मशीनें, रोजाना 450 मरीजों को मिलेगा लाभ

3 वर्ष पहले
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दिल्ली सरकार अपने 6 अस्पतालों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर 90 डायलिसिस मशीनें लगवा रही है। इन अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा निशुल्क मिलेगी। अभी दो अस्पतालों में 25 मशीनें लग चुकी हैं।

जून तक इन्हें इंस्टॉल कर दिया जाएगा। नई मशीनें लगने के बाद दिल्ली सरकार के अस्पतालों में इनकी संख्या 150 हो जाएंगी। प्रतिदिन किडनी के 450 मरीजों का डायलिसिस हो सकेगा। वेटिंग भी कम हो जाएगी।

फिलहाल मरीजों को डायलिसिस के लिए तीन सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ता है। अभी एलएनजेपी, डॉ. हेडगेवार और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 60 मशीनें लगी हैं। यहां एक मशीन से प्रतिदिन तीन मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। निजी सेंटर पर डायलिसिस का खर्च करीब 5000 रुपए आता है।

निजी सेंटर पर 5000 रु. है डायलिसिस कराने का चार्ज

इन मरीजों को फ्री सुविधा

निशुल्क डायलिसिस की सुविधा उन्हीं मरीजों को मिलेगी, जो तीन साल से दिल्ली में रह रहे हैं और उनकी सालाना इनकम तीन लाख रुपए है। मरीजों को सर्टिफिकेट भी उपलब्ध कराना होगा।

निजी सेंटरों को जोड़ेगी सरकार

दिल्ली सरकार पीपीपी मोड पर मशीनें लगाने वाली एजेंसी को प्रति डायलिसिस 1274 रुपए का भुगतान करेगी। साथ ही इसी रेट पर डायलिसिस करने वाले निजी सेंटरों को भी सरकार जोड़ेगी। इसके लिए निजी सेंटरों में कम-से-कम 10 मशीन होना अनिवार्य होगा।

अभी दिल्ली सरकार के सिर्फ दो अस्पतालों में हैं डायलिसिस मशीनें, उधर कोर्ट ने वेतन को लेकर फटकारा

अभी इन अस्पतालों में हैं डायलिसिस मशीनें

अस्पताल मशीनों की संख्या

एलएनजेपी 10

डॉ. हेडगेवार 20

राजीव गांधी सु. स्पे. 30

दीनदयाल उपाध्याय 5

महर्षि वाल्मिकी 10

यहां जून तक लगेंगी मशीनें

मदन मोहन मालवीय 10

दीपचंद बंधु 10

भगवान महावीर 25

जनकपुरी सु. स्पे. 30

टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिले: कोर्ट

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

प्राइवेट स्कूलों में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन न मिलने की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया। दिल्ली सरकार के वकील रमेश सिंह ने तर्क दिया कि अभी तक किसी टीचिंग या नॉन टीचिंग स्टाफ ने शिकायत नहीं की है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह क्यों आपको शिकायत करेंगे यह आपकी ड्यूटी है कि यह सुनिश्चित करें कि उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिया जाए। आप यह बताएं की आप इस बारे में क्या कर रहें हैं? एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच ने इस मामले में दिल्ली सरकार, तीनों एमसीडी व प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सभी को 6 हफ्ते में पक्ष कोर्ट में रखना है। सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

सोशल ज्यूरिस्ट की तरफ से वकील अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में दिल्ली सरकार और एमसीडी सरकारी स्कूलों की तर्ज पर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के निर्देश दे। याची के अनुसार 2000 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले 2 लाख से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को 7वें वेतन आयोग के मुताबिक वेतन नहीं दिया जा रहा है। कोई कर्मचारी आवाज उठाते हैं तो उन्हें निकाले जाने की धमकी दी जाती है। सरकार की सहमति के बाद 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को यहां लागू कर दिया गया है। अभी तक इन सिफारिशों को प्राइवेट स्कूलों में लागू नहीं किया गया है।

तीनों एमसीडी व प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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