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जीएसटी के दायरे से बाहर रह सकती हैं बैंकों की फ्री सेवाएं

3 वर्ष पहले
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चेक बुक जारी करने और एटीएम से पैसे निकालने जैसी फ्री बैंकिंग सेवाएं जीएसटी के दायरे से बाहर रह सकती हैं। जीएसटी महानिदेशालय की तरफ से एक्सिस बैंक, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक समेत कई बड़े बैंकों को मुफ्त सेवाओं पर टैक्स चुकाने का नोटिस दिया गया था। लेकिन वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राजस्व विभाग मुफ्त सेवाओं पर जीएसटी लगाने से इनकार कर सकता है।

बैंकों को 2012-17 की अवधि के लिए टैक्स देने को कहा गया था। इस पर वित्तीय सेवा विभाग ने राजस्व विभाग से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। बैंकिंग सेवाएं वित्तीय सेवा विभाग और जीएसटी राजस्व विभाग के अधीन आते हैं। दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत हैं। बैंक मिनिमम बैलेंस रखने पर ग्राहकों को कुछ सुविधाएं मुफ्त देते हैं। इसमें महीने में 3/5 बार एटीएम से पैसे निकालना, डेबिट कार्ड जारी करना, सीमित संख्या में चेक बुक देना भी शामिल हैं। बैंकों की समस्या थी कि वे ग्राहकों से बैक डेट से टैक्स नहीं वसूल सकते। हालांकि लागू होने पर आगे टैक्स का बोझ ग्राहकों पर ही आएगा।

बैंकों का तर्क | मुफ्त सेवाएं कॉमर्शियल गतिविधि नहीं

वित्तीय सेवा विभाग का तर्क था कि मुफ्त सेवाओं को कॉमर्शियल गतिविधि नहीं कह सकते। इसलिए इस पर जीएसटी भी नहीं लगाया जा सकता। बैंकों की तरफ से इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने भी टैक्स अधिकारियों के सामने यही दलील रखी थी।

टैक्स विभाग का तर्क | बैंक कोई भी सेवा फ्री नहीं दे रहे

टैक्स अधिकारियों का तर्क है कि बैंक कोई भी सेवा मुफ्त में नहीं दे रहे। इसके बदले वे ग्राहकों से मिनिमम अकाउंट बैलेंस रखने को कहते हैं। ऐसा नहीं करने पर कस्टमर से जुर्माना लिया जाता है। ‘डीम्ड सर्विस’ होने के कारण यह टैक्सेबल है।

ई-कॉमर्स डिस्काउंट पर टैक्स का आदेश भी हो चुका है खारिज : पिछले महीने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने ईकॉमर्स कंपनियों के डिस्काउंट पर टैक्स लगाने का आयकर विभाग का आदेश खारिज किया था। विभाग ने डिस्काउंट को कैपिटल एक्सपेंडिचर मानकर फ्लिपकार्ट को 2015-16 के लिए 110 करोड़ का टैक्स नोटिस भेजा था।

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