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ट्रेनों में गन्ने के वेस्ट से बनी ईको फ्रेंडली थालियों में मिलेगा खाना

3 वर्ष पहले
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ट्रेनों में अब ईको फ्रेंडली थालियों में यात्रियों को खाना परोसा जाएगा। पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल और केवल एक बार उपयोग की जा सकने वाली ये थालियां गन्ने के वेस्ट मटेरियल से बनाई जाएंगी। एक जून से इसकी शुरुआत हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी समेत अन्य रूटों पर चलने वाली राजधानी और दुरंतो जैसी ट्रेनों से होगी।

1 जून से यह सेवा 34 ट्रेनों में शुरू हो सकती है। नई दिल्ली-कोलकाता के बीच चलने वाली ट्रेन में इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। ईको फ्रेंडली थालियां कोटा से निजामुद्दीन के बीच चलने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस में भविष्य में उपयोग में लाई जा सकती हैं।

गन्ना किसानों को होगा फायदा

खाद में बदल जाएगी थाली : ट्रेनों में अभी ठोस प्लास्टिक, थर्मोकोल व पॉलीमर से बनी थालियां उपयोग में लाई जाती हैं। कई बार ये थालियां ठीक से साफ नहीं होती हैं। ऐसी स्थिति में यात्री खाना खाने में परहेज करते हैं। यह थालियां खराब होने पर आसानी से नष्ट भी नहीं होती। इनमें अलग से दाल, सब्जी, चावल आदि रखने के लिए जगह भी नहीं होती है। इस कारण एल्युमिनियम फाइल की पैकिंग में अलग से दाल, चावल व सब्जी देनी पड़ती है। यह सारी समस्या अब खत्म हो जाएगी। ईको फ्रेंडली थालियों में दाल, चावल व सब्जी परोसने के लिए खाने बने होंगे। एक बार इस्तेमाल के बाद दुबारा इसका इस्तेमाल नहीं होगा। बायोडिग्रेडेबल होने के कारण यह प्राकृतिक परिस्थितियों में स्वत: खाद में तब्दील हो जाएगी।

ट्रेनों में इन थालियों के उपयोग में आने के बाद गन्ने के वेस्ट मटेरियल की मांग बढ़ जाएगी। अभी किसान गन्ने की फसल काटने के बाद गन्ने के रस से गुड़ बना लेते हैं और बाकी के मटेरियल को जला देते हैं।

जून से राजधानी और दुरंतो जैसी 34 ट्रेनों से शुरुआत

नई दिल्ली-कोलकाता के बीच चलने वाली ट्रेनों में ट्रायल शुरू

रेलवे बोर्ड से आदेश का इंतजार है

रेलवे बोर्ड से पश्चिम मध्य रेलवे को इस बारे में कोई आदेश निर्देश नहीं मिले हैं। ईको फ्रेंडली थाली में खाना परोसने का फैसला बेहतर है। इससे यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। गुंजन गुप्ता, सीपीआरओ

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