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कैबिनेट की तीसरी बैठक में क्लस्टर बसों के टेंडर को सैद्धांतिक मंजूरी, मेट्रो फीडर पर संशय

3 वर्ष पहले
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दिल्ली में 11 हजार बसों की जरूरत पिछले आठ साल से है। लेकिन डीटीसी और क्लस्टर को मिलाकर सिर्फ 5429 बसें ही हैं, जो जरूरत के मुकाबले सिर्फ 49 फीसदी हैं। शुक्रवार को सीएम अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की तीसरी बैठक में 1000 क्लस्टर बसें उतारने को सिर्फ सैद्धांतिक मंजूरी ही मिल पाई। उधर, स्टैंडर्ड फ्लोर की जगह लो फ्लोर बस लाने के लिए दिव्यांग संस्था की याचिका पर सुनवाई भी कोर्ट में चल रही है। इतना ही नहीं एक कंपनी सामने आने पर टेंडर रद्द करना ही होगा। हालांकि अभी कंपनी ने न तो शर्त वापस ली है और न ही टेंडर रद्द किया है। दस्तावेजों की जांच चल रही है। वहीं, डीएमआरसी को मेट्रो फीडर बसें उतारनी हैं, जिसको अभी तक राज्य परिवहन प्राधिकरण से मंजूरी नहीं मिली है। इस साल इन बसों का उतरना मुश्किल है। इसके अलावा पर्यावरण को ध्यान में रखकर 1000 इलेक्ट्रिक बसें उतारने की योजना पर सरकार काम कर रही है।

दिल्ली को 11000 बसों की जरूरत, हैं सिर्फ 5429

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