हरियाणा की ओर से पानी रोकने के मुद्दे पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलजी अनिल बैजल को पत्र लिखा। सीएम ने पत्र में लिखा कि हरियाणा ने अगर 21 मई के बाद पानी रोका तो दिल्ली में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। इस संबंध में आपको पत्र, एक नोट और मैसेज भेजा था, लेकिन आपका जवाब नहीं आया। आप व्यस्त होंगे। हरियाणा की ओर से भी अगर जवाब नहीं मिल रहा है तो पीएम से मामले में दखल देने के लिए बातचीत करें। जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो दिल्ली में जल संकट आ सकता है। मैं भी पीएम को पत्र लिख रहा है। इसके जवाब में एलजी ने भी सीएम को पत्र लिखा। पत्र में कहा कि जल बोर्ड अकेला ऐसा पोर्टफोलियो है, जो सीएम के पास है। वह जल बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। इसलिए सीएम अपर यमुना रिवर बोर्ड और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर इस मामले का स्थायी हल निकालें। गर्मी में जनता को पानी के लिए परेशानी न हो, इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को दिल्ली में पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा है। सीएम इससे पहले भी एलजी और खट्टर को पत्र लिख चुके हैं।
धरना देने के बदले मुझसे चर्चा करनी चाहिए थी
एलजी ने पत्र में लिखा कि सीएम ने 16 मई की बैठक में अन्य मुद्दों के साथ इस मुद्दे को भी उठाया था। लेकिन इसकी कोई पृष्ठभूमि की नोट और सामग्री नहीं थी। बैठक से पहले सीएम इस मुद्दे पर दो महीने से बुधवार को होने वाली बैठक को निरस्त कर चुके हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम को धरना देने के बदले पहले ही इस गंभीर मुद्दे पर मुझसे चर्चा करनी चाहिए थी।
पीएम से दखल देने का अनुरोध
उधर, पीएम को लिखे पत्र में सीएम ने कहा कि दिल्ली को हरियाणा से पिछले 22 साल से 1133 क्यूसेक पानी मिल रहा है, जिसमें हरियाणा ने अचानक कटौती कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा को 21 मई तक पानी की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अब हरियाणा तय तारीख के बाद पानी रोकता है तो दिल्ली के वीवीआईपी इलाकों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सीएम ने पीएम को मामले में दखल देने का अनुरोध किया है।
एलजी ने पत्र लिख सीएम केजरीवाल को दी सलाह
पत्र सोशल मीडिया में डालकर मामले को सनसनीखेज बनाया जा रहा है
एलजी ने सीएम को सलाह देते हुए कहा- ‘इस गंभीर मुद्दे पर आपको जल बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन मामला जब जटिल हो गया तो आप तीखा पत्र और संदेश भेज रहे हैं। मेरे ऑफिस आने से पहले ही पत्र सोशल मीडिया में डालकर मामले को हल करने के बजाय सनसनीखेज बनाया जा रहा है।’ एलजी ने लिखा कि लाभार्थी राज्यों के बीच जल साझा करना एक संवेदनशील और नाजुक मुद्दा है। इस मुद्दे पर टकराव के बजाए आपस में बातचीत कर इसका हल निकालने का प्रयास करना चाहिए।