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सरकार का अनुमान- क्रूड महंगा होने से आयात खर्च 3.4 लाख करोड़ तक बढ़ेगा

3 वर्ष पहले
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इस साल कच्चे तेल के आयात पर 50 अरब डॉलर यानी करीब 3.4 लाख करोड़ रुपए ज्यादा खर्च आ सकता है। इसकी वजह है कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी। क्रूड की कीमत इस समय 80 डॉलर के आसपास है जो नवंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा है। इसका आयात पर खर्च बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ने की आशंका है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने यह बात कही। हालांकि उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने पर साफ कुछ नहीं कहा।

गर्ग ने कहा, ‘तेल के दाम बढ़ने से आर्थिक विकास प्रभावित नहीं होगा। स्थिति पर सरकार की नजर है और पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे।’ हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार क्या कदम उठाएगी। क्या सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाएगी, यह पूछने पर उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है।’ इस बीच, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सऊदी अरब से कीमतों में नरमी लाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा क्रूड की कीमतों में तेजी से लोगों के साथ इकोनॉमी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रधान ने सऊदी के ऊर्जा, उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री से बातचीत कर भारत की चिंताओं से अवगत कराया।

रिकॉर्ड 9 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है क्रूड इंपोर्ट बिल

2017-18 में 5.66 लाख करोड़ रुपए के क्रूड का आयात हुआ था

2017-18 में भारत ने 5.66 लाख करोड़ रुपए का क्रूड आयात किया था। इस साल यह 3.4 लाख करोड़ बढ़ा तो 9 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह अब तक का रिकॉर्ड होगा। पिछला रिकॉर्ड 2013-14 का 8.64 लाख करोड़ रु. का है।

रुपए में कमजोरी पर सचिव बोले- फिलहाल चिंता की बात नहीं

रुपए में कमजोरी पर गर्ग ने कहा कि विदेशी निवेशक बांड और इक्विटी बाजार से विदेशी मुद्रा निकाल रहे हैं। लेकिन फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। अभी 2013 जैसी गंभीर स्थिति नहीं बनी है। डेढ़ महीने में 30-35 हजार करोड़ निकलना कोई बड़ी बात नहीं है।

चालू खाते का घाटा बढ़ेगा, खुदरा महंगाई 5.3% रहेगी : गोल्डमैन

गोल्डमैन साक्स को चालू खाते का घाटा 2018-19 में जीडीपी के 2.4% तक पहुंचने का अंदेशा है। दिसंबर तिमाही में भी घाटा 2% तक पहुंच गया था। गोल्डमैन का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत 10% बढ़ने पर महंगाई 0.1% बढ़ जाती है। इसलिए 2018-19 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.3% रहेगी।

हकीकत| रिकॉर्ड निचले स्तर से सिर्फ 80 पैसे दूर है रुपया

एक डॉलर की कीमत 68 रुपए तक पहुंच गई है। अगस्त 2013 में रुपया सबसे निचले स्तर पर था। तब डॉलर के मुकाबले यह 68.80 तक गिर गया था। इस साल भारतीय करेंसी 5% से ज्यादा गिर चुकी है और अपने निचले स्तर से सिर्फ 80 पैसे दूर है।

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