- Hindi News
- National
- सुप्रीम कोर्ट : मास्टर प्लान संशोधन में आपत्तियों के लिए लोगों को 15 दिन दें
सुप्रीम कोर्ट : मास्टर प्लान संशोधन में आपत्तियों के लिए लोगों को 15 दिन दें
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मास्टर प्लान-2021 में प्रस्तावित संशोधन के नोटिफिकेशन पर लगी रोक के 6 मार्च के आदेश में मंगलवार को आंशिक संशोधन किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्तियां मंगाने के लिए लोगों को 15 दिन का वक्त दिया जाए। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन के बारे में मिलने वाली आपत्तियों और सारे पहलुओं पर विचार के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।
जस्टिस मदन बी लोकुर और नवीन सिन्हा की पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से कहा है कि सभी बड़े अखबारों में दस दिन के भीतर लगातार तीन दिन तक आपत्तियों के लिए विज्ञापन दिए जाएं। दो घंटे चली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए की ओर से पेश अटाॅर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से यह भी जानना चाहा कि क्या उन सरकारी अधिकारियों को निलंबित भी किया जाएगा जो अपना काम ढंग से नहीं कर पाए और उनके अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में अवैध निर्माण होता है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने पीठ से कहा कि उन्हें इस बारे में निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय दिया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डीडीए को अवैध निर्माण की शिकायत के लिए प्रस्तावित मोबाइल एप को 15 दिनों के भीतर लांच करने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 मई को होगी।
संशोधन के नोटिफिकेशन पर लगी रोक के आदेश में आंशिक संशोधन किया
केंद्र को आदेश
लोगों के पास नहीं है पीने का पानी
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यहां करीब 68 मीटर ऊंचा कूड़े कचरे का पहाड़ खड़ा है और आप इसके बारे में कुछ नहीं कर पा रहे हैं। आप जहां कहीं भी कचरा डालना चाहते हैं, वहीं के लोग आपत्ति कर रहे हैं। स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं हो रहा है। लोगों के पास पीने का पानी नहीं है, इसलिए लोग पानी नहीं पी सकते। यहां प्रदूषण है इसलिए लोग सांस नहीं ले सकते और यहां कचरा है। आखिर शहर किस दिशा में जा रहा है?