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दिन से रात तक कर्नाटक का नाटक

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | नई दिल्ली/बेंगलुरू

भाजपा नेता येद्दियुरप्पा गुरुवार सुबह 9 बजे कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके शपथ ग्रहण से महज साढ़े चार घंटे पहले तड़के 4.20 बजे सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले कांग्रेस की याचिका पर इतिहास में पहली बार सरकार और शपथ पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात के बाद खुुला। कोर्ट नंबर-6 में 3 जजों ने करीब सवा दो घंटे सुनवाई की। कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दो अहम दलीलें रखीं- राज्यपाल ने रात 9 बजे भाजपा को न्योता क्यों दिया? बहुमत साबित करने को येद्दि ने 7 दिन मांगे थे तो राज्यपाल ने 15 क्यों दिए? हालांकि, वह येद्दि की ओर से राज्यपाल को सौंपी चिट्‌ठी पेश नहीं कर पाए। कोर्ट ने कहा कि चिट्‌ठी के बिना कैसे दखल दें? अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने से नहीं रोका जा सकता है। कोर्ट ने उनकी दलीलें मान शपथ

राज्यपाल का निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के फैसले

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

फाइल फोटो

सत्ता और शपथ की सुनवाई के लिए पहली बार अाधी रात खुला सुप्रीम कोर्ट

येद्दि की शपथ पर सुप्रीम कोर्ट भी राजी

4.20AM

कर्नाटक में आखिर हुअा क्या?

कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने बुधवार रात भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया। बहुमत के लिए 15 दिन की मोहलत दे दी। कांग्रेस और जेडीएस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।

तो कांग्रेस और जेडीएस को आपत्ति किस बात पर थी?

कांग्रेस का कहना है कि बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय क्यों? 24 से 48 घंटा ही मिलना चाहिए। भाजपा के पास 104 विधायक हैं। बाकी 117 कांग्रेस-जेडीएस के साथ हैं। तो क्या राज्यपाल भाजपा को खरीद-फरोख्त का मौका दे रहे? जेडीएस का दावा भाजपा ने उनके विधायकों को 100-100 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर किया है।

कांग्रेस को आधी रात को कोर्ट जाने की जरूरत क्यों पड़ी?

वजह शपथ की टाइमिंग है। राज्यपाल ने रात 9.00 बजे येद्दि को न्योता दिया। शपथ सुबह 9.00 बजे होनी है। कांग्रेस कोर्ट खुलने का इंतजार करती तो येद्दि सीएम बन चुके होते।

कोर्ट रात को कैसे खुल गया?

अभिषेक मनु सिंघवी ने रजिस्ट्रार के घर जाकर अर्जी दी। वे रात 11.52 बजे चीफ जस्टिस के घर पहुंचे। उन्होंने जस्टिस सीकरी, जस्टिस बोवड़े और जस्टिस भूषण की बेंच बनाकर सुनवाई का आदेश दे दिया।

कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला

कर्नाटक में कुल सीटें: 222, कुमारस्वामी 2 सीटों से जीते हैं। यानी उनका एक ही वोट गिना जाएगा। तो 221 वोट हो गए।

फ्लोर टेस्ट के लिए एक विधायक प्रोटेम स्पीकर बनेगा। अब कुल वोट बचे 220, यानी बहुमत 111 पर मिल जाएगा।

आधी रात को सुनवाई के लिए कोर्ट जाती कांग्रेस वकीलों की टीम।

येद्दियुरप्पा सरकार के लिए दो स्थितियां संभव

1 भाजपा 7 विधायकों का इंतजाम करे। कांग्रेस-जेडीएस को तोड़े बिना यह संभव नहीं। दल-बदल कानून के तहत इनकी विधायकी खत्म होगी।

2 फ्लोर टेस्ट के दौरान कांग्रेस-जेडीएस के 13 विधायक नदारद रहें, तो सदन में 207 विधायक ही होंगे। तब बहुमत 104 पर मिल जाएगा। इतने विधायक भाजपा के पास हैं। ये विधायक शपथ लिए बिना गैरहाजिर रहे तो व्हिप भी लागू नहीं होगा। बाद में भाजपा इन 13 विधायकों से इस्तीफा भी दिलवा सकती है।

न्याय का गलियारा

सुप्रीम काेर्ट इससे पहले सिर्फ एक बार रात को खुला। आतंकी याकूब मेमन की फांसी के मुद्दे पर। दिसंबर 2015 में निर्भया के दोषी की रिहाई रुकवाने के लिए रात में अर्जी लगी, पर सुनवाई अगले दिन हुई थी।

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