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सीएम के सामने रो पड़ी पहलवान, राजे ने उसे गले लगा सांसद से कहा-बेटियां आगे बढ़ रहीं, अकादमी खोलने का प्लान करें

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जिले में आखिरी जनसंवाद बुधवार को जिला मुख्यालय पर हुआ। कार्यक्रम में सीएम करीब चार घंटे देरी से पहुंची। फिर तीन घंटे में तीन सत्र पूरे किए। क्षेत्र के लिए कोई बड़ी घोषणा भी नहीं हुई। ज्यादातर सुझाव नोट कराने को कहा। सीएम ने औद्योगिक दृष्टि से चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा के बीच सूखा बंदरगाह बनवाने की मांग को गंभीरता से लिया। बहुप्रतिक्षित गंभीर रिवर डवलपमेंट फ्रंट प्रोजेक्ट शुरू करने की बात कही, लेकिन मेडिकल काॅलेज और सैटेलाइट अस्पताल की मांग पर ना कर दिया। सीएम शाम 6.23 बजे हेलीकॉप्टर से जयपुर रवाना हो गई।

कुश्ती में राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर कई मेडल जीत चुकी सावित्री अपनी बेरोजगारी व माली हालत के कारण सीएम से राेजगार और यहां कुश्ती के लिए सुविधाएं मांगने के लिए आई थीं। उसके साथ और भी कुश्ती खिलाड़ी आए। मंत्री ने जब सावित्री से बात की तोे उसने कहा कि हम आपको कई बार समस्या बता चुके। अब सीएम से मिलना चाहती हूं। संवाद पूरा होने के बाद कृपलानी ने इन्हें सीएम से मिलाया। भीड़ में पास में जाते हुए सावित्री नीचे गिर गई। फिर पीड़ा बताते हुए रो पड़ी। सीएम ने उसे गले लगाते हुए कहा कि हम मदद करेंगे। उन्होंने सांसद जोशी से कहा कि मुझे आज पता चला कि यहां कुश्ती का इतना क्रेज है। लड़कियां भी आगे बढ़ रही। यहां कुश्ती अकादमी खोलने का प्लान करें।

4 घंटे देरी से शुरू हुए संवाद में सीएम ने तीन घंटे दिए, बड़ी घोषणा नहीं अच्छे सुझाव नोट कराने को कहा चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा के बीच सूखा बंदरगाह बनवाने की मांग को गंभीरता से लिया

स्वागत के बाद सीएम को ज्ञापन देने के लिए लगी कतार

चित्तौड़गढ़. आॅडिटोरियम में पहुंचने से पूर्व बाहर पांडाल में ज्ञापन लेकर कतारबद्व खड़े लोगों से मिलते हुए सीएम।

डॉक्टर-सीए से सबसे पहले संवाद किया... राजे दोपहर करीब सवा दो बजे आॅडिटोरियम के बाहर पहुंची। पहले ज्ञापन, परिवेदनाएं, स्वागत और स्कूटी, लैपटाप वितरण आदि के बाद 2.49 बजे हॉल में पहुंची। जहां प्रोफेशनल, प्रबुद्घ व लाभार्थी लोग 11 बजे से संवाद के लिए प्रतीक्षारत थे। पहले डाॅक्टर, सीए से संवाद के बाद सीएम लंच पर गई। बाद का आधा घंटा औपचारिकता ही रहा। फिर भाजपा के छह मंडलों के तीन सत्र होने थे, लेकिन आधा-आधा घंटा के दो सत्र ही हुए। जिनमें सीएम मौजूद रही।

मेडिकल कॉलेज और सैटेलाइट हॉस्पिटल अभी संभव नहीं : सीएम ... संवाद की शुरुआत सीएम ने डाक्टरों से की। डाॅ. जेएल पुंगलिया ने कहा कि जिला अस्पताल में 300 बेड की क्षमता के मुकाबले 500 बेड हैं। डाक्टरों की कमी से परेशानी आती है। जहां भी 500 बेडे का अस्पताल है, वहां मेडिकल काॅलेज खोलना चाहिए। सीएम ने कहा, पहले के 8 मेडिकल कॉलेज धरातल पर आ जाएं तो आगे की बात करें। निजी चिकित्सक डा. अरविंद सांखला ने कहा कि सामान्य अस्पताल के खाली पुराने भवन में चिकित्सा मंत्री ने सैटेलाइट हास्पिटल की घोषणा की थी। सीएम ने कलेक्टर की ओर देखते हुए कहा कि यह विभागीय घोषणा रही होगी। कलेक्टर इंद्रजीतसिंह ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा विधायक विधानसभा मेंं भी उठा चुके हैं। सैटेलाइट अस्पताल के लिए जिला अस्पताल से न्यूनतम 10 किमी की दूरी का मापदंड है। रिटायर पीएमओ डाॅ. महेश सनाढ्य ने कहा कि सैटेलाइट नहीं खुल सकता तो वहां डिस्पेंसरी के नाम से अस्पताल खोल दीजिए।

तेज गर्मी में घंटों इंतजार बना परेशानी ... जनसंवाद में आमंत्रित लोगों के अलावा स्कूटी, लैपटाप, उपकरण आदि प्राप्त करने के लिए बुलाए गए बच्चे सभी तेज गर्मी में घंटों तक इंतजार से काफी परेशान हुए। हालांकि उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी, पर कई लोग पहले हाल में बैठ जाने तो कुछ इसकी जानकारी नहीं होने से वे भूख से भी परेशान हुए। हाल में बैठे लोगों के मोबाइल सहित तंबाकू, धूम्रपान की सामग्री भी बाहर रखवा दी थी।

ऐसी होनहार बेटियां हैं...

मां ने सिलाई कर बेटी को पहलवान बनाया, वो नेशनल में मेडल जीतकर बढ़ा रही जिले का नाम... शहर की महिला पहलवान 24 वर्षीय सावित्री छीपा ने कई बार जिले का नाम रोशन किया। गत दिनों उदयपुर में 28वीं राजस्थान-मध्यप्रदेश केसरी दंगल में सावित्री नेे दांवपेंच से सभी को हैरान कर दिया। उसने विपरीत हालात में पहलवानी कर यह मुकाम पाया। ट्रैक्टर चलाकर परिवार पालने वाले सावित्री छीपा के पिता गजानंद का 2002 में ही निधन हो गया था। मां शारदाबाई ने मजदूरी कर और घर में छोटी-मोटी सिलाई कर सावित्री व उसके भाई का पालन किया। अब छोटा भाई दिनेश पढाई के साथ कभी कभी कार्य भी करता है। सावित्री को पहलवानी का जुनून बचपन से सवार था। परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी। बेटी का जुनून देखकर मां ने सिलाई केंद्र चलाकर उसे प्रशिक्षण दिलाया। सावित्री इसके साथ पढ़ाई भी करती रही। बीए, बीपीएड कर चुकी है। मानपुरा स्कूल में पढ़ाई के दौरान सबसे पहले कुश्ती प्रशिक्षक रतन गुर्जर से प्रेरणा मिली। रतन गुर्जर के साथ उस्ताद भंवरसिंह और महेंद्रसिंह ने लगातार मार्गदर्शन देकर आगे बढ़ाया। सावित्री ने बताया कि उसका सपना है कि अपने देश के लिए खेले और मेडल जीते। काॅमनवैल्थ के बाद उसका हौंसला परवान पर है।

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