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अस्पताल में दो माहसे कुत्ता काटने के इंजेक्शन नहीं, लोग परेशान

3 वर्ष पहले
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों में रोगियों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए फ्री दवाएं व जांच की सुविधा दी हुई है, लेकिन कस्बा के अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण रोगियों को दवाओं के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल का आलम यह है कि खांसी के सीरप सहित दर्द के क्रीम का टोटा बना हुआ है। वहीं जानवरों के काटने का इंजेक्शन दो माह से अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। मंगलवार को अस्पताल में खांसी व मांसपेशियों में दर्द की दवाओं के अभाव में रोगियों को चिकित्सकों से उलझते हुए देखा गया। चिकित्सक रोगियों को दवाओं का अभाव होने का हवाला दे रहे थे। वहीं संतुष्ट करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन रोगी बीमारी का हवाला देते हुए अस्पताल प्रशासन को कोस रहे थे। यही नहीं अस्पताल में जानवरों के काटने के इंजेक्शन को लेकर चिकित्सकों को पीड़ितों के रोष का सामना करना पड़ा। झाला निवासी अमन पुत्र रामलखन सोमवार को श्वान के काटने पर मंगलवार को उपचार कराने अस्पताल में आया हुआ था। अमन के पिता ने अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद चिकित्सकों को समस्या के बारे में बताया तो चिकित्सक बोले अस्पताल में जानवरों के काटने के इंजेक्शन का दो माह से अभाव है। आज कई पीड़ित लौट कर गए हैं। इसकी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है। चिकित्सकों की बात सुनकर पीड़ित मायूस हो गया तथा बोला कि अस्पताल में दो माह से सुविधाएं मौजूद नहीं हैं फिर भी अस्पताल प्रशासन कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है, ऐसे में पीड़ित कहा जाएं। पीड़ित रामलखन ने चिकित्सकों को खरीखोटी सुनाते हुए कहा कि अस्पताल में पीड़ित का रजिस्ट्रेशन कराया गया है अगर कोई अनहोनी होती है तो अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार होगा। पीड़ित की बात सुनकर आउटडोर में मौजूद चिकित्सक चुप हो गए। पीड़ित नौनिहाल को लेकर वापस चला गया। अस्पताल प्रभारी सरमथुरा डाॅ. रविंद्र ने बताया कि आवश्यक दवाओं की पूर्ति के लिए इंडेन काट दिया गया है। जानवरों के काटने का इंजेक्शन की दो माह से आपूर्ति नहीं हुई है। दवाएं 20 अप्रैल तक आने की उम्मीद है।

परेशानी

अस्पताल में खांसी की सीरप सहित दर्द की क्रीम का टोटा, रोगी बाजार से दवाएं खरीदने को मजबूर

नहीं मिला इंजेक्शन तो लौटे।

बाजार से खरीद रहे हैं रोगी दवाएं

अस्पताल में दवाओं का अभाव होने के कारण रोगी खांसी की सीरप व मांसपेशियों में दर्द की क्रीम तक बाजार से खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। रोगी के अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी बाजार से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होने पर परिजनों में आक्रोश है। रोगियों की नाराजगी पर अस्पताल प्रशासन रोगियों को इंडेन काटने व जानवरों के इंजेक्शन की एनओसी होने का हवाला देते हैं लेकिन रोगी इंडेन व एनओसी तक का कोई मतलब नहीं समझ रहे हैं।

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