दफ्तरों में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हुए नाकारा
डार्क जाेन में आने वाले प्रतापगढ़ जिले में गर्मी की शुरुआत में ही पेयजल समस्या गहराने लगती है। प्रदेश के जिलों के भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार जल स्वावलंबन जैसे जतन कर पानी बचाने के प्रयास में लगी है। वहीं पानी बचाने के लिए जो जिम्मेदार हैं वहीं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति का जायजा लेने शनिवार को भास्कर टीम ने जिला अस्पताल, कलेक्ट्रेट परिसर, जिला परिषद सहित कई विभागों में पहुंच कर स्थिति देखी। यहां बरसाती पानी को जमीन तक ले जाने वाली पाइप कई हिस्सों में बंटी और कचरे के बीच टूटी-फूटी हालत में मिली। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति को देखकर खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी इसके प्रति कितने जागरूक हैं।
जिम्मेदारों को कह कर सुधारेंगे
जहां-जहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खराब है, उसे जिम्मेदारों को कह कर सुधार कराया जाएगा। अभी में मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारी में लगा हुआ हूं। वाटर हार्वेस्टिंग प्लान के बारे में अभी में कोई जानकारी नहीं दे पाऊंगा। हेमेंद्र नागर, कार्यवाहक कलेक्टर, प्रतापगढ़
प्रतापगढ़. जिला परिषद और ट्रेजरी भवन में बदहाल हालत में वाटर हार्वेस्टिंग प्लान की पाईप लाइन
जिला अस्पताल : यहां पुरानी बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगे हुए हैं। चिकित्सा अधिकारी राधेश्याम कच्छावा ने बताया कि अस्पताल परिसर में बने नए शिशु अस्पताल को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाने का निर्णय लिया गया था, इसलिए इस भवन में भी यह सिस्टम नहीं लगाया गया है।
कलेक्ट्रेट परिसर : कलेक्ट्रेट परिसर में अप्रैल का आधा महीना निकलने के बाद वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम शुरू किया गया है। विभाग के अधिकारी जिम्मेदारों से सिस्टम सुधारने की बात कर रहे हैं, जबकि जिला कलेक्ट्रेट परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम हाल ही में शुरू किया गया है।
जिला परिषद : यहां ट्रेजरी भवन और जिला परिषद के भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तो लगाया गया है, लेकिन पाइप टूटकर जमीन पर पड़े हुए हैं। भवन के कुछ हिस्सों में पाइप लाइन पूरी तरह से टूटकर जमींदोज हो चुकी है। पानी को बचाने के लिए लगाया हुआ यह सिस्टम इस भवन में पूरी तरह से नाकारा नजर आ रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय व आबकारी कार्यालय:
जिला शिक्षा अधिकारी और आबकारी कार्यालय में भी यही नजारा था। यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नजर ही नहीं आया।
नगर परिषद : हालात यह है कि घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की जिम्मेदारी नगर परिषद के अधिकारियों पर है, लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों को भी शहर के कितने मकानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे है इसके बारे में जानकारी नहीं है।
जिम्मेदार ही नहीं दे रहे ध्यान तो निजी घरों में कैसे बने सिस्टम
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की जिम्मेदारी जलदाय विभाग के पास है। इसके साथ ही घरों में वाटर हार्वेस्टिंग बनवाने की जिम्मेदारी नगर परिषद के पास है। भवन निर्माण की अनुमति देने के बाद एक निश्चित राशि इसके लिए जमा कराई जाती है। घर में सिस्टम बनवाने के बाद यह राशि भू स्वामी को वापस कर दी जाती है। शहर के पुराने घरों को छोड़ भी दें तो बीते पांच साल में बने नए मकानों में बरसाती पानी को बचाने के लिए यह सिस्टम बनाया गया है या नहीं यह भी जिम्मेदार लोग नहीं बता पा रहे है। जबकि हकीकत में शहर के अधिकांश घरों में यह सिस्टम लगा ही नहीं है।
सरकारी दफ्तरों में यह है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति
लापरवाही के चलते पानी का संकट
पानी बचाने को लेकर न तो सरकारी अधिकारी गंभीर है ना ही आम आदमी जागरूक है। यह लापरवाही ही शहर के लिए जल संकट बनकर उभरी है। जलदाय विभाग के अफसरों ने अनुसार इस बार अप्रैल में भी भू-जल स्तर 40 से 70 फीट नीचे जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात यह है कि लोग पानी की कमी की पूर्ति टैंकर के माध्यम से पूरी कर रहे हैं। टैंकर से जो पानी की सप्लाई होती है वह भी भू-जल से हजारों लीटर पानी रोज निकाल कर की जा रही है।