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बाईपास बनते ही शहर में नहीं आएंगे भारी वाहन, एमपी तक जाने वालों को फायदा

3 वर्ष पहले
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नेशनल हाइवे से निकलने वाले बाईपास का तखमीना तय हो चुका है। अब जल्द ही यहां काम शुरू होने वाला है। इसके टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी इसकी शुरूआत की तारीख नहीं हुई है। पांच से दस दिनों में यह तारीख भी आने वाली है। उसके बाद काम शुरू हो जाएगा। बाईपास का काम होने के बाद शहर के बीच से निकलने वाले भारी और बड़े वाहनों से निजात मिल सकेगी। बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। 229.93 हैक्टेयर भूमि अवाप्त हुई है।

सुकेत से दो किमी पहले से यह बाईपास निकलेगा, जो कलमंडीकलां गांव में प्रवेश करेगा। इसके बाद हरीशपुरा, कलमंडीखुर्द, रलायती, रलायता, झालरापाटन, माधोपुर, बंजारी, भंवरासा से होकर रूपारेल में जाकर बाईपास मिलेगा। बाईपास के निर्माण में सबसे खास बात यह रहेगी कि इसके दायरे में आ रहे दो प्रमुख तालाबों का अस्तित्व बचा रहेगा। गोमती सागर और मुंडलियाखेड़ी तालाब पर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। तालाबों में से पिलर उठाकर उस पर सड़क का निर्माण होगा। इससे तालाब को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। झालरापाटन में गोमती सागर तालाब का धार्मिक महत्व है। इसलिए इस तालाब के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ही एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। इस एलिवेटेड रोड को सिक्सलेन बनाने के भी प्रयास हो रहे हैं। गोमती सागर तालाब से एलिवेटेड रोड निकलने से लोगों को यहां प्राकृतिक नजारा भी दिखाई देगा। इस मार्ग पर आकर्षक जालियां लगाई जाएंगी, ताकि लोग बाईपास से निकलते हुए यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख सकें।

झालावाड़. यहां से निकलेग बाईपास। फाइल फोटो

भास्कर न्यूज | झालावाड़

नेशनल हाइवे से निकलने वाले बाईपास का तखमीना तय हो चुका है। अब जल्द ही यहां काम शुरू होने वाला है। इसके टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी इसकी शुरूआत की तारीख नहीं हुई है। पांच से दस दिनों में यह तारीख भी आने वाली है। उसके बाद काम शुरू हो जाएगा। बाईपास का काम होने के बाद शहर के बीच से निकलने वाले भारी और बड़े वाहनों से निजात मिल सकेगी। बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। 229.93 हैक्टेयर भूमि अवाप्त हुई है।

सुकेत से दो किमी पहले से यह बाईपास निकलेगा, जो कलमंडीकलां गांव में प्रवेश करेगा। इसके बाद हरीशपुरा, कलमंडीखुर्द, रलायती, रलायता, झालरापाटन, माधोपुर, बंजारी, भंवरासा से होकर रूपारेल में जाकर बाईपास मिलेगा। बाईपास के निर्माण में सबसे खास बात यह रहेगी कि इसके दायरे में आ रहे दो प्रमुख तालाबों का अस्तित्व बचा रहेगा। गोमती सागर और मुंडलियाखेड़ी तालाब पर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। तालाबों में से पिलर उठाकर उस पर सड़क का निर्माण होगा। इससे तालाब को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। झालरापाटन में गोमती सागर तालाब का धार्मिक महत्व है। इसलिए इस तालाब के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ही एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। इस एलिवेटेड रोड को सिक्सलेन बनाने के भी प्रयास हो रहे हैं। गोमती सागर तालाब से एलिवेटेड रोड निकलने से लोगों को यहां प्राकृतिक नजारा भी दिखाई देगा। इस मार्ग पर आकर्षक जालियां लगाई जाएंगी, ताकि लोग बाईपास से निकलते हुए यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख सकें।

28 किमी का निकलेगा फोरलेन बाईपास रेलवे ओवरब्रिज और पुल सिक्सलेन बनेंगे

जिले में प्रवेश से अंतिम छोर तक बाईपास का निर्माण 28 किमी के दायरे में होगा। उससे पहले 22 किमी यह कोटा जिले में बनेगा। दोनों जिलों का मिलाकर बाईपास की दूरी 50 किमी की होगी। बाईपास फोरलेन बनेगा, लेकिन जैसे ही इसमें रेलवे ओवरब्रिज, पुल सहित अन्य ऊंचाई वाले स्ट्रक्चर आएंगे तो वहां पर इसका दायरा सिक्सलेन हो जाएगा। रेलवे ओवरब्रिज और पुल पर सिक्सलेन करने का मकसद यह है कि भविष्य में जब बाईपास फोरलेन से सिक्सलेन में तब्दील होगा तो ओवरब्रिज सहित अन्य पुल के साथ छेड़छाड़ नहीं हो। बाद में इनका दायरा बढ़ाने में खासी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

शहर में होगा वाहनों का लोड कम

बाईपास के निर्माण के बाद शहर में वाहनों का लोड काफी कम हो जाएगा। शहर के बीच से नेशनल हाइवे के गुजरने के चलते आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। करीब 1 हजार से अधिक ट्रक इस मार्ग से रोजाना निकलते हैं। शहर के बीच में अस्पताल, स्कूल, सरकारी कार्यालय, नेशनल हाइवे पर ही आते हैं। इसी को देखते हुए शहरवासी सालों से बाईपास के निर्माण की मांग करते आ रहे थे। अब जाकर इसका काम शुरू होने का समय आया है।

बाईपास के निर्माण की शुरूआत की तारीख नहीं आ पाई है। जैसे ही यह तारीख तय होगी वहां से निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। - हर्षित पारिक, मैनेजर, एनएचएआई

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