ग्रामसेवक गिरधारीसिंह की मृत्यु के 10 साल बाद भी परिजनों को नहीं मिली पेंशन
ग्रामसेवक गिरधारीसिंह की मृत्यु के 10 साल बाद भी परिजनों को नहीं मिली पेंशन
तारानगर तहसील के राजपुरा गांव के गिरधारीसिंह की प|ी को उनकी मृत्यु के 10 साल बाद भी पेंशन नहीं मिली है। गिरधारीसिंह ग्रामसेवक के पद पर तैनात थे। उनकी 21 मई 2008 को संदिग्धावस्था में मौत हो गई। उस समय वे राजगढ़ कस्बे में तैनात थे। उनकी मौत पर तत्कालीन कलेक्टर व मौजूदा केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुनलाल मेघवाल ने शोक जताते हुए कहा था कि पूरा प्रशासन उनके साथ है। उन्होंने तत्काल 21 हजार रुपए की सहायता भी भेजी थी। परिजनों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि गिरधारीसिंह सरकारी कर्मचारी थे और उनकी ड्यूटी के दौरान मौत होने के बावजूद भी कोई सहायता नहीं मिली। न ही कोई पेंशन स्वीकृत हुई। परिजन कहते हैं कि उनकी मौत भी पहेली बनी हुई है। उनका कहना है कि गिरधारीसिंह ने आत्महत्या की अथवा उन्हें मारा गया, इसका खुलासा नहीं हुआ। पुलिस ने आत्महत्या मानकर मामला निबटा दिया। बच्चों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौत के 10 साल बाद भी कोई सहायता उन्हें नहीं मिल रही है।
तारानगर तहसील के राजपुरा गांव के गिरधारीसिंह की प|ी को उनकी मृत्यु के 10 साल बाद भी पेंशन नहीं मिली है। गिरधारीसिंह ग्रामसेवक के पद पर तैनात थे। उनकी 21 मई 2008 को संदिग्धावस्था में मौत हो गई। उस समय वे राजगढ़ कस्बे में तैनात थे। उनकी मौत पर तत्कालीन कलेक्टर व मौजूदा केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुनलाल मेघवाल ने शोक जताते हुए कहा था कि पूरा प्रशासन उनके साथ है। उन्होंने तत्काल 21 हजार रुपए की सहायता भी भेजी थी। परिजनों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि गिरधारीसिंह सरकारी कर्मचारी थे और उनकी ड्यूटी के दौरान मौत होने के बावजूद भी कोई सहायता नहीं मिली। न ही कोई पेंशन स्वीकृत हुई। परिजन कहते हैं कि उनकी मौत भी पहेली बनी हुई है। उनका कहना है कि गिरधारीसिंह ने आत्महत्या की अथवा उन्हें मारा गया, इसका खुलासा नहीं हुआ। पुलिस ने आत्महत्या मानकर मामला निबटा दिया। बच्चों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौत के 10 साल बाद भी कोई सहायता उन्हें नहीं मिल रही है।