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पिपलाद बांध का जलस्तर 15.6 फीट पर पहुंचा, मई में हो सकता है पानी का संकट

3 वर्ष पहले
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भवानीमंडी, सुनेल और 12 अन्य गांवों के पेयजल स्त्रोत पिपलाद बांध का जल स्तर अब तक के सबसे न्यूनतम 15.6 फीट पर पहुंचकर गेट के नीचे पहुंच गया है। बांध बनने के बाद यह पहला अवसर है, जबकि बांध का जल स्तर इतना कम हुआ है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पानी मई माह के अंत तक ही साथ निभा सकेगा, जबकि जलदाय विभाग का दावा है कि उपलब्ध पानी आगामी 20 जून तक का रोजाना जलापूर्ति कर सकेगा। इस साल बारिश कम हुई थी। करीब 32 फीट भराव क्षमता के इस बांध में पिछले साल का 21 फीट पानी भरा था। बारिश से 3 फीट ही पानी आया। 24 फीट के जलस्तर था, जिसमें सिंचाई के बाद बचा पानी जलदाय विभाग को सौंपा गया। बांध का जलस्तर रविवार को एकदम गिरकर अब 15.6 फीट पर पहुंच गया है। अब बांध के गेट के नीचे डेड स्टोरेज का लेबल रह गया है। इसमें ही इंटेकवेल के एक ओर चार फीट दूरी पर ही खाली जमीन दिखने लगी है। बांध में डेड स्टोरेज का पानी अब दिनो-दिन तेजी से घटेगा। इसी पानी से भवानीमंडी, सुनेल और 12 अन्य गांवों की जलापूर्ति के लिए बांध से रोजाना करीब 80 लाख लीटर पानी लिया जा रहा है। इस अनुमान से बांध में उपलब्ध पानी से आगामी मई माह के अंत तक ही नियमित जलापूर्ति बनी रह सकेगी। इसके मद्देनजर अगर जलदाय विभाग ने जल्दी ही उपलब्ध पानी से आगामी बरसात तक का जल प्रबंधन सुनिश्चित नहीं किया तो आगे जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पिपलाद पेजयल योजना के पहले भवानीमंडी को चंबल पेयजल योजना से जोड़ा हुआ था। लेकिन अब इस योजना से भवानीमंडी को जल सप्लाई एकदम बंद सी हो गई है। ऐसे में। इस योजना के सभी गांवों को राजगढ़ से जोड़ा जा रहा है। जन प्रतिनिधियों को इस गर्मी की आपूर्ति के लिए अभी से ही भवानीमंडी को चंबल पेयजल योजना से आपूर्ति शुरू करवाने के लिए प्रयास शुरू कर देना चाहिए।

भवानीमंडी. पिपलाद बांध का जलस्तर गिरा।

चारों योजना की रिंग बनाई जा सकती है

भवानीमंडी के आसपास से ही रेवा, गागरीन और राजगढ़ तथा पिपलाद पेयजल योजनाओं की पाइपलाइनें निकल रही हैं। अगर इनकी लाइनों के बीच की गेप में नई लाइनें बिछाकर इनको आपस में जोड़कर एक रिंग बना दी जाए जो अधिक पानी वाले स्थान से कम पानी वाले स्थान पर आसानी से पानी पहुंचाया जाकर भविष्य में जल संकट से निपटा जा सकता है।

पिपलाद बांध में जो जल स्तर बताया जा रहा है, वह आगामी गर्मी तक की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त हैं। -राजेंद्र खंडेलवाल, एईएन, जलदाय विभाग, भवानीमंडी

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