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6 साल की उम्र में शादी करा दी, पति की रजा पर दूसरे के साथ गई तो पिता तैयार नहीं, अब शेल्टर होम में रह रही है

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

इस बच्ची की कहानी बाल विवाह और नाता प्रथा जैसी प्रचलित सामाजिक बुराइयों का अंजाम दर्शाने वाली है। पिता ने छह साल की उम्र में उसकी शादी करा दी। कुछ बड़ी होने के बाद पहले पति की प्रताड़ना और बाद में उसकी ही रजामंदी से वो दूसरे युवक के साथ चली गई। इससे खफा पिता ने अपहरण का झूठा मामला पुलिस में दर्ज करा दिया। वो लौट आई पर पिता इसलिए साथ नहीं रख रहे हैं कि युवक नाता विवाह के तीन लाख रुपए नहीं दे रहा है। लड़की अभी 16 साल की होने से शादी भी नहीं कर सकती। इसलिए वो शेल्टर होम में रह रही है।

कपासन क्षेत्र के एक गांव की इस बालिका के सात और बहनें व एक भाई है। मजदूरी कर परिवार पालने वाले पिता ने अन्य बेटियों के साथ उसकी शादी रचा दी। तब छह साल की ही थी। शादी बड़ी बहन के देवर के साथ भीलवाड़ा जिले के एक गांव में की गई। उसे सिर्फ इतना याद है कि उसके साथ उसकी छह बहनें और मामा की बेटी का विवाह भी हुआ था। थोड़ी बड़ी होने पर होली पर ससुराल गई तो पति ने मारपीट की। जैसे-तैसे पांच, छह महीने रही। आए दिन मारपीट पर पिता से कहा तो वे मानने को तैयार नहीं हुए। उसके परिवार में बड़ी बहन का रिश्ता भी जुड़ा हुआ था। इसलिए भी लाचारी थी। लड़की थक-हारकर एक स्वजाति युवक के साथ चली गई। जब पता चला कि पिता ने उसके अपहरण की झूठी शिकायत दी है तो वह खुद पुलिस में पहुंच गई। स्पष्ट किया कि उसका अपहरण नहीं हुआ।

पिता तैयार न ससुराल वाले, छूट चिट्ठी लिख रहे इसलिए अनाथ की तरह रह रही

नाबालिग होने से पुलिस ने बालिका को बाल कल्याण समिति में पेश किया। समिति ने उसे आसरा विकास संस्थान के शेल्टर होम में रखवा दिया। जिसकी प्रबंधक शाकीरा का कहना है कि पिता इसलिए नहीं ले जा रहे हैं कि वे उसे ले जाने वाले युवक से तीन लाख रुपए चाहते हैं। युवक इस स्थिति में नहीं है। जिस परिवार में उसका बाल विवाह हुआ था, वो भी अनुमति यानी सामाजिक भाषा में छूट चिट्ठी नहीं लिख रहा है। मांग पूरी होने पर पिता बच्ची को उस युवक के साथ भेजने को तैयार है। नाबालिग होने से नियमानुसार बालिका को माता-पिता के अलावा अन्य को नहीं दिया जा सकता।

पढ़ाई के लिए बचपन में हुई शादी ठुकराई, अब पुलिस इंस्पेक्टर बनकर दूसरी बेटियों को इस दंश से बचाना चाहती है

लालजी का खेड़ा की बेटी लक्ष्मी। पढ़ाई की ललक आगे बढ़ने पर ससुराल वाले आपत्ति जताने लगे, तब ही उसे पता चला कि बचपन में उसके हाथ पीले हो गए थे। दबाव में पढ़ाई छूट गई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। बाल विवाह को ठुकरा दिया। अब एक ही सपना है कि पढ़ लिखकर पुलिस इंस्पेक्टर बने और इस कुरीति का दंश झेल रहीं दूसरी बेटियों को भी बचाए और लोगों को जागृत करे। 14 साल की लक्ष्मी रंगास्वामी किसी दूरदराज की नहीं, बल्कि शहर से ही सटे गांव की है। लक्ष्मी पांच बहनों व चार भाइयों में से एक है। भिक्षावृति कर परिवार पालने वाले पिता की मौत हो चुकी है। उसे खुद ठीक से याद नहीं कि बचपन में कब शादी हुई। शायद दो, ढाई साल की रही थी, तब चार बहनों की एक साथ शादी की गई। तीन की तो एक ही गांव में शादी करवा दी गई। लक्ष्मी को कुछ बड़ी होने पर पता चला कि उसका ससुराल गांव में है। मां प्रेमबाई ने एक बार दशामाता की पूजा के लिए उसे ससुराल भेजा था। आसरा विकास संस्थान संचालिका शाकीरा कहती हैं कि लक्ष्मी को वर्ष 2014 में एक साल शेल्टर होम में रखा। कक्षा छठी में नाहरगढ़ कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में चयन हो गया। छठी और सातवीं पास कर ली। आठवीं का फार्म भरने लगी तो पति व ससुराल वालों ने घर आकर आपत्ति जतानी शुरू कर दी। परेशान मां ने लक्ष्मी का स्कूल छुड़ाकर घर बुला लिया, लेकिन लक्ष्मी घर के कामकाज में हाथ बंटाते हुए भी पढ़ाई कर रही है। इधर, पति के दूसरी शादी करने की बात सामने आ गई। मां की पीड़ा है कि अब वह नाता विवाह के लिए झगड़े की राशि कहां से लाए। एक संस्था उसका बाल विवाह कानूनन शून्य घोषित कराने के प्रयास कर रही है।

कुप्रथाओं से हो रहा भविष्य अंधकारमय, बाल विवाह को शून्य घोषित कराने का प्रयास... ऐसी ही बच्चियों को संरक्षण दे रहे आसरा विकास संस्थान की पदाधिकारी कहती हैं कि बाल विवाह और नाता प्रथा के कारण कई बच्चियों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अब इस बच्ची के बाल विवाह को कानूनन शून्य घोषित कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पिता इस बालिका को नाता देना चाहते हैं तो हैं लेकिन वह जिस युवक के साथ रहना चाहती है उसकी हैसियत नहीं कि वह तीन लाख रुपए दे सके। फिलहाल बालिका सिलाई सीखते हुए पांचवीं की पढ़ाई कर रही है। अब ओपन परीक्षा के लिए फार्म भरेगी। शेल्टर होम की दूसरी बच्चियां भी उसे पढ़ने में मदद कर रही हैं।

मैं पति की सहमति से ही गई थी... शेल्टर होम में रह रही इस बच्ची ने भास्कर को बताया कि उसका अन्य युवक से संपर्क हो गया तो उसके पति को भी कोई आपत्ति नहीं थी। तब पति जयपुर में आईसक्रीम लॉरी लगाते हुए 12वीं पढ़ रहा था और वह बड़ी बहन के साथ जयपुर रह रही थी। पति ने खुद फोन लगाकर उस युवक के साथ भेजा था, लेकिन पिता के पुलिस केस करने के कारण उसे वापस आना पड़ा।

मां ने छोटी बहन की शादी की तो पुलिस को बुला लूंगी... भास्कर टीम लक्ष्मी के घर पहुंची, उसकी छोटी बहन लाली भी पढ़ रही है। लक्ष्मी ने कहा कि दोनों पढ़ाई जारी रखेंगी। परिवार में अब किसी का बाल विवाह नहीं होने देंगी। यदि मां ने छोटी बहन का विवाह करने की कोशिश की तो पुलिस में बोल दूंगी। इधर, साथ बैठी मां ने आंसू पोंछते हुए कहा कि हम जानबूझकर ऐसा नहीं करते। परिवार व समाज की परिस्थितियां मजबूर करती हैं। लक्ष्मी ने कहा कि वह इसीलिए पुलिस इंस्पेक्टर बन कर समाज व गांव को सुधारना चाहती है।

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