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धर्मसभा में श्रद्धा-भक्ति की शक्ति बताई

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

श्रमण संघीय तपस्वी रोशन मुनि म.सा. के शिष्य जैन धर्म दिवाकर धर्ममुनि मसा की शिष्या महासती अपूर्व प्रज्ञा ने शनिवार सुबह मीरानगर जैन सामयिक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धा और आस्था के साथ की गई भक्ति से ही आत्मा में परमात्मा के दर्शन हो सकते है।

उन्होंने कहा कि मंदिर का अर्थ यह होता है कि वहा जाने से मन अंदर चला जाएं यानि परमात्मा की और चला जाएं। लौकिक पर्व व लोकोत्तर पर्व की चर्चा करते हुए महासती ने कहा कि पर्व को ऐसे मनाना चाहिए जिससे कर्मबंधन कम से कम हो, पर्व के दिन त्याग, उपवास को महत्व देना चाहिए। धर्मसभा का संचालन संघ अध्यक्ष मनसुखलाल पटवारी ने किया। उन्होंने बताया कि महासती वृंद शनिवार को मीरानगर से विहार कर खातरमहल पहुंचे। रविवार सुबह 8.30 बजे से प्रतिदिन महासती वृंद के प्रवचन खातरमहल में होंगे। धर्मसभा में सवाई माधोपुर, नीम का थाना श्रीमहावीरजी, हरियाणा, डूंगला क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।

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