झुंझुनूं में भी हैं दो बद्रीनाथ धाम, उत्तरकाशी की तर्ज पर आखातीज को ही खुलते हैं मंदिर के पट
विपुल महमिया/राजकुमार शर्मा टीटनवाड़/नवलगढ़
उत्तरकाशी (उत्तराखंड) ही नहीं झुंझुनूं जिले में भी नवलगढ़ और उदयपुरवाटी उपखंड के टीटनवाड़ में बद्रीनाथ धाम मंदिर हैं। नवलगढ़ में बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर मंदिर के पट अक्षय तृतीया (आखातीज) को एक ही दिन खुलते हैं। बुधवार को सुबह पांच बजे मंंदिर के पट खुलेंगे। साल के बाकी 364 दिन मंदिर के पट बंद रहते हैं। वहीं टीटनवाड़ में अक्षय तृतीया को ही भगवान बद्रीनारायण का पंचामृत से अभिषेक-विशेष पूजन होता है।
ग्रामीणों के मुताबिक टीटनवाड़ पंचायत के नौखला जोहड़ का यह देवस्थान करीब सात सौ वर्ष पुराना है। ग्रामीणों की मान्यता है कि देव स्थान की पौराणिकता उसके नजदीक लगे इंदौख-इंद्रौक (एनोगाइसिस सिरीसिया) के वृक्षों से जुड़ी हुई है। श्रीबद्रीनारायण धाम मंदिर ट्रस्ट नौखला टीटनवाड़ द्वारा 16 मई 2010 में इसका जीर्णोद्धार करवाया गया। इंडियन एयरलाइंस के रिटायर्ड फोरमैन मदनसिंह शेखावत दिल्लीवाले ने बताया कि विक्रम संवत 1895 (179 वर्ष पहले) क्षेत्र के जागीरदार अग्रसिंह ने इस मंदिर के लिए जमीन दान की थी।
नवलगढ़ में रामदेवजी के मंदिर से महज कुछ ही दूरी पर बद्रीनारायण भगवान का मंदिर स्थित है। लोगों को इस मंदिर के दर्शन करने के लिए 12 माह का इंतजार करना पड़ता है। बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर ही यहां पर भी मंदिर के पट अक्षय तृतीया (आखातीज) को एक दिन के लिए खुलते हैं। 18 अप्रैल को सुबह 5 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। उत्तराखंड के केदारनाथ बद्रीनाथ धाम में अक्षय तृतीया के दिन पट खुलते हैं। यहां पूजा आराधना करने वाले महंत मातादीन शर्मा ने बताया कि मंदिर की स्थापना सैकड़ों वर्ष पहले हुई थी। इनके पूर्वज बद्रीनाथ धाम की पूजा पद्धति के अनुसार ही यहां पूजा करते थे। आज भी इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है । मान्यता है कि चारों धाम में से उत्तराखंड के बद्रीनाथ के दर्शन करने के बराबर ही यहां आने वाले भक्तों को पुण्य मिलता है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। अक्षय तृतीया के दिन तड़के से ही श्रद्धालु आने शुरू हो जाते हैं। बद्रीनाथ धाम में भगवान को तुलसी पंचमेवा मिश्री व चने की दाल भोग लगाया जाता है, उसी परंपरा के अनुसार यहां भी भगवान की पूजा अर्चना के बाद ऐसा ही भोग लगाया जाता है।
नवलगढ के प्राचीन बद्रीनारायण मंदिर में बुधवार को वार्षिक मेला भरेगा। इस दिन किया गया दान, स्नान, जप, हवन, तर्पण, श्राद्ध का फल भी अक्षय रहेगा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होंगे। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा रहती है।
नवलगढ़. भगवान ब्रदीनारायण।
टीटनवाड़ में 700 साल पहले बना था मंदिर, यहां के प्राचीन पेड़ को भी पूजते हैं
टीटनवाड़ सरपंच महावीरसिंह महला के मुताबिक- किंवदंती है कि सैकड़ों वर्ष पहले राजा सूर्यमल (सूर्यभान) तीर्थाटन करने उत्तरकाशी से लोहार्गल आए थे। मान्यता है कि वे भगवान बद्रीनारायण के परम भक्त थे और अक्षय तृतीया के दिन अपने आराध्य देव की प्रतिमा का दर्शन-पूजन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते थे। तीर्थाटन में समय अधिक लग जाने के कारण वे उत्तरकाशी नहीं जा पाए। लोहार्गल से लौटते वक्त अक्षय तृतीया के एक दिन पहले राजा का लवाजमा रात्रि विश्राम के लिए नौखला जोहड़ (टीटनवाड़) में रुका। वहां भगवान बद्रीनारायण ने इंद्रौख-इंद्रौक (एनोगाइसिस सिरीसिया) के वृक्ष से प्रकट होकर दर्शन दिए बताए। इसके बाद राजा ने जोहड़ में बद्रीनाथ धाम मंदिर का निर्माण करवाया था।
अभिषेक के लिए केरल से बुलाया आचार्य दल | 18 अप्रैल को मनाए जाने वाले अक्षय तृतीया महोत्सव हवन से शुरू होगा। मंदिर प्रबंधक बनवारीलाल सोहू ने बताया कि इसके लिए केरल से आचार्य दल को बुलाया है। सुबह चार बजे गणपति हवन, महामृत्युंजय यज्ञ, अभिषेक और दोपहर 12 बजे आरती होगी। इसके बाद मेला लगेगा। ज्योतिषाचार्य पं. उमाशंकर शर्मा वशिष्ठ के मुताबिक आखातीज को गंगोत्री-यमनोत्री के कपाट खुल जाने से चार धाम यात्रा शुरू होगी।
टीटनवाड़ के नौखला जोहड़ में इंदौख-इंद्रौक (एनोगाइसिस सिरीसिया) का पेड़। उनके पीछे बद्रीनाथधाम मंदिर।