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कागजों में बना दिए एमएनटीसी वार्ड तो कहीं व्यवस्था ही नहीं, कुपोषित बच्चे रैफर होते हैं

3 वर्ष पहले
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झालावाड़. कुपोषण को दूर करने और अतिकुपोषित बच्चों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज मुहैया कराने के लिए जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एमएनटीसी यानी कुपोषण उपचार केंद्र शुरू किए गए थे, लेकिन इन केंद्रों में से केवल एक ही केंद्र पर कुछ व्यवस्था ठीक है। बाकी केंद्रों पर अतिकुपोषित बच्चों को जिला मुख्यालय पर रैफर करना पड़ता है। जिले में डग, भवानीमंडी, अकलेरा, मनोहरथाना, सुनेल और रायपुर में एमएनटीसी वार्ड खोले गए। इनमें एसी सहित बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौने भी रखे गए, लेकिन अब हालात फिर से पुराने हो चुके हैं। अधिकतर अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं हैं। भास्कर टीम ने जिले के छह एमएनटीसी वार्ड का की ग्राउंड रिपोर्ट देखी तो हालात काफी चौंकाने वाले मिले।

अकलेरा में भी नहीं है सुविधा बच्चों का डॉक्टर ही नहीं

अकलेरा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों का डॉक्टर नहीं होने से अतिकुपोषित बच्चों के इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां वार्ड बना हुआ है। जून 2017 से बजट नहीं आने से केंद्र बंद पड़ा है। यहां पर आने वाले अतिकुपोषित बच्चों झालावाड़ रैफर किया जाता है।

यह होता है मापदंड

अतिकुपोषित बच्चों के लिए एमयूएसी टेप से इनकी भुजाओं की मोटाई नापी जाती है। भुजा यदि 11.5 सेंटीमीटर से कम आती है और पांव में सूजन या संक्रमण आता है तो उस बच्चे को अतिकुपोषित मानकर एमएनटीसी वार्ड में भर्ती किया जाता है।

एमएनटीसी वार्ड का अस्पताल प्रभारी को ही पता नहीं, रैफर करने पड़ते हैं बच्चे

मनोहरथाना. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनोहरथाना में एमएनटीसी वार्ड के बारे में अस्पताल प्रभारी को ही पता नहीं है। ऐसे में यहां आने वाले कुपोषित बच्चों का इलाज नहीं हो पाता है। इनको सीधे ही रैफर करना पड़ता है। यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं है। सीएचसी प्रभारी धनराज मीणा ने बताया कि एमएनटीसी वार्ड की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चों को जिला मुख्यालय या फिर अकलेरा रैफर कर देते हैं। यहां बच्चों की सामान्य दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञ नहीं होने के कारण कुपोषित बच्चों की दवाइयां नहीं मिल पाती हैं।

एक माह में 10 कुपोषित बच्चों का हुआ उपचार: डग. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे एमएनटीसी वार्ड में पिछले 3 माह में 31 कुपोषित बच्चों को बच्चों का उपचार व जांच की गई, जिनका सफलतम उपचार कर उन्हें स्वस्थ कर घर भेजा गया, जीएनएम राजू पंवार ने बताया कि 3 माह में 31 बच्चे को कुपोषित पर चयन किया गया। जिनका एमटीसी वार्ड में भर्ती कराकर डॉक्टरों की निगरानी में उपचार किया गया। कुपोषित बच्चोंं की सबसे पहले जांच कर कुपोषण के लिए दिए गए मापदंड के अंतर्गत आए हुए बच्चों को एमएनटीसी वार्ड में भर्ती कराया जाता है कुपोषित बच्चो का चयन वेट लंबाई एवं उम्र के आधार पर किया जाता है। चयन करने के बाद एफ 75, एफ 100 न्यूट्रीशन हर 2 घंटे में पिलाया जाता है। साथ में आयरन टॉनिक कैल्शियम टॉनिक जिंक टेबलेट एवं मल्टीविटामिन भेज दिए जाते हैं।

रायपुर में खिलौने भी खरीदे, लेकिन अब बंद कर दिया

रायपुर. रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एमएनटीसी वार्ड शुरू भी किया। यहां बच्चों के लिए खिलौने भी खरीदे गए, लेकिन बाद में इस वार्ड की स्वीकृति ही नहीं आ पाई। इसके चलते इस वार्ड को बंद कर दिया गया। अब कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को रैफर ही किया जाता है। पिछले महीनों में यहां एक भी बच्चा भर्ती नहीं किया गया।

डाॅक्टर की कमी के कारण समस्या

जिले में छह एमएनटीसी वार्ड बने हुए हैं। वहां इलाज हो जाता है। कहीं पर बच्चों के डॉक्टर की कमी के कारण इलाज में समस्या आती है तो ही जिला मुख्यालय तक आते हैं। -डाॅ. जीएम सय्यद उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, झालावाड़

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