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धौलपुर का स्थापना दिवस आज, प्रभात फेरी, गोष्ठी व निबंध प्रतियोगिता होंगी
धौलपुर. जिला बनाते तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर।
धौलपुर जिला बनने के बाद उद्योग धंधे हुए खत्म
धौलपुर जिला बनने से पहले धौलपुर गिलास फैक्ट्री, माचिस फैक्ट्री, तेल मिल, लक्ष्मी तेल मिल थे, जो की जिला स्थापना के बाद बंद हो गए। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश कुमार भार्गव ने कहा कि धौलपुर भी अन्य विकसित जिलों की तरह होता, मगर यहां के जनप्रतिनिधियों ने कभी इसके विकास को लेकर कोई इच्छा शक्ति व्यक्त नहीं की। केवल योजनाएं बनाकर सपने दिखाने का कार्य किया। जिस कारण आज हमारा जिला अन्य जिलों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है।
इन्होंने निभाई जिला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका
धौलपुर को जिला बनाने के लिए जिला संघर्ष समिति का गठन किया गया था। जानकारी देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश कुमार भार्गव ने बताया कि जिला संघर्ष समिति में उनके अलावा मुन्ना लाल शर्मा, डॉक्टर बहादुर सिंह, लक्ष्मीनारायण भट्ट, स्व.मुरारी लाल शर्मा, राघवेंद्र सिंह जादौन, किरोड़ीमल सिंघल, अब्दुल सगीर खान मुख्य रूप से थे। जिन्होंने धौलपुर को जिला बनाने के लिए जिला संघर्ष समिति के बैनर तले पुराना डाकखाने के पास 27 दिन तक धरना दिया था।
ये बने हमारे जिले के पहले अफसर और जनप्रतिनिधि
जिला बनाने के आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता महेश भार्गव ने बताया कि जिला बनने के बाद यहां के प्रथम जिला कलक्टर पीके देव, पुलिस अधीक्षक कल्याण सिंह रहे। वहीं प्रथम विधायक श्रीगोपाल भार्गव, नगर पालिका के प्रथम चेयरमैन द्वारका प्रसाद रहे। प्रथम सांसद बच्चू सिंह बने थे।
विभिन्न कार्यक्रमों का होगा आयोजन
धौलपुर। जिले का स्थापना दिवस रविवार को मनाया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक महेंद्र यादव ने बताया कि कार्यक्रम के तहत सुबह 7.30 बजे से निजी व राजकीय स्कूलों के बच्चों द्वारा प्रभातफेरी निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि इस प्रभातफेरी में माध्यमिक स्तर के स्कूलों से 100 व उमावि स्तर के स्कूलों से 200 छात्र-छात्राएं भाग लेंगी। इतना ही नहीं प्रभातफेरी में स्कूल स्टाफ का भी भाग लेना आवश्यक है। प्रभातफेरी कचहरी परिसर से शुरू होकर पुराना खाना, लाल बाजार, सब्जी मंडी, पैलेस रोड, गुलाब बाग होते हुए कलेक्ट्रेट में संपन्न होगी।
तब धौलपुर, बाड़ी और राजाखेड़ा विधानसभा
स्थापना के बाद नपा से नप के रूप में विकसित हो गया है। राजाखेड़ा में तथा बाड़ी में नपास्थापित हो गई। मगर आज भी धौलपुर विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाया है। धौलपुर, बाड़ी और राजाखेड़ा विधानसभा ही थी। इसके बाद बसेड़ी को चौथी विस के रूप में जोड़ा गया तथा बयाना लोस के स्थान पर करौली-धौलपुर लोकसभा बनाई गई।