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अनुबंधित बसों से 4 लाख का घाटा निगम वाली से Rs.62 लाख फायदा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर चल रहा रोडवेज कर्मचारियों का पांच दिवसीय धरना शुक्रवार को समाप्त हो गया। वक्ताओं ने आगार में संचालित हो रही अनुबंधित बसों की पोल खोली। साथ ही आरोप भी लगाया कि निगम प्रशासन की मिलीभगत से नियम से भी अधिक अनुबंधित बसों का संचालन किया जा रहा है।

आखरी दिन संयुक्त मोर्चा के संयोजक श्यामप्रकाश सोनी के नेतृत्व में 21 रोडवेज कर्मचारी धरने पर बैठे। सोनी ने सभा को संबोधित करते हुए लाभ हानि के आंकड़े बताते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ में अनुबंध पर 28 बसें संचालित है एवं निगम की 88 बसें संचालित हो रही है। माह मार्च 2018 में अनुबंध की बसों के संचालन से आगार को चार लाख रुपए की हानि हुई, वही निगम की बसों के संचालन से आगार 62 लाख रुपए लाभ हुआ। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि स्थानीय निगम प्रशासन अनुबंधित बसों के अधिक किमी संचालित करा रहा है। यहां तक की प्रबंधक संचालन की मिलीभगत से दोषपूर्ण अनुबंधित बसें जिनकी सीटें और खिड़कियों के शीशे तक टूटे हुए है। जिससे यात्रियों को भारी असुविधा के साथ ही निगम प्रतिष्ठा पर भारी आघात पहुंच रहा है। अनुबंधित बसें कई बार केन्द्रीय बस स्टैंड से ही निरस्त हो जाती है और कई किमी ब्रेक डाउन हो जाने से रोडवेज को भारी आर्थिक हानि हो रही है।

अयोग्य और खटारा अनुबंधित बसों को तुरंत हटाने की मांग की। अध्यक्षता रिटायर्ड एसोसिएशन के सचिव भीखचंद शर्मा ने की। एटक के वरिष्ठ श्रमिक नेता आनंद स्वरूप छीपा, कार्यकारी अध्यक्ष मोहब्बतसिंह भाटी, शंकरसिंह राणावत सहित श्रमिक नेताओं ने 12 सूत्रीय मांग पत्र पर शीघ्र निराकरण की मांग को दोहराते हुए अनुबंधित बसों से रोडवेज को हो रहे घाटे पर प्रकाश डाला। सभा में नजमा बी, सीता पूर्बिया, मोहम्मद हनीफ, नाथूसिंह, मोहम्मद रशीद शेख, प्रकाश पुंडलिक, घासीराम लौहार, सत्यनारायण वैष्णव सहित 40-50 रोडवेज कर्मचारी उपस्थित रहे।

भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर चल रहा रोडवेज कर्मचारियों का पांच दिवसीय धरना शुक्रवार को समाप्त हो गया। वक्ताओं ने आगार में संचालित हो रही अनुबंधित बसों की पोल खोली। साथ ही आरोप भी लगाया कि निगम प्रशासन की मिलीभगत से नियम से भी अधिक अनुबंधित बसों का संचालन किया जा रहा है।

आखरी दिन संयुक्त मोर्चा के संयोजक श्यामप्रकाश सोनी के नेतृत्व में 21 रोडवेज कर्मचारी धरने पर बैठे। सोनी ने सभा को संबोधित करते हुए लाभ हानि के आंकड़े बताते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ में अनुबंध पर 28 बसें संचालित है एवं निगम की 88 बसें संचालित हो रही है। माह मार्च 2018 में अनुबंध की बसों के संचालन से आगार को चार लाख रुपए की हानि हुई, वही निगम की बसों के संचालन से आगार 62 लाख रुपए लाभ हुआ। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि स्थानीय निगम प्रशासन अनुबंधित बसों के अधिक किमी संचालित करा रहा है। यहां तक की प्रबंधक संचालन की मिलीभगत से दोषपूर्ण अनुबंधित बसें जिनकी सीटें और खिड़कियों के शीशे तक टूटे हुए है। जिससे यात्रियों को भारी असुविधा के साथ ही निगम प्रतिष्ठा पर भारी आघात पहुंच रहा है। अनुबंधित बसें कई बार केन्द्रीय बस स्टैंड से ही निरस्त हो जाती है और कई किमी ब्रेक डाउन हो जाने से रोडवेज को भारी आर्थिक हानि हो रही है।

अयोग्य और खटारा अनुबंधित बसों को तुरंत हटाने की मांग की। अध्यक्षता रिटायर्ड एसोसिएशन के सचिव भीखचंद शर्मा ने की। एटक के वरिष्ठ श्रमिक नेता आनंद स्वरूप छीपा, कार्यकारी अध्यक्ष मोहब्बतसिंह भाटी, शंकरसिंह राणावत सहित श्रमिक नेताओं ने 12 सूत्रीय मांग पत्र पर शीघ्र निराकरण की मांग को दोहराते हुए अनुबंधित बसों से रोडवेज को हो रहे घाटे पर प्रकाश डाला। सभा में नजमा बी, सीता पूर्बिया, मोहम्मद हनीफ, नाथूसिंह, मोहम्मद रशीद शेख, प्रकाश पुंडलिक, घासीराम लौहार, सत्यनारायण वैष्णव सहित 40-50 रोडवेज कर्मचारी उपस्थित रहे।

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