सरपंच ने हटाए पंचायत सहायक, आदेश में लिखा बीडीओ ने भुगतान रोका
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़
जिले के रावतभाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बडोदिया में नियुक्त पंचायत सहायकों को हटाने का मामला आया है। इन पंचायत सहायकों का कहना है कि उन्हें दस माह से मानदेय ही नहीं मिला है। दूसरी ओर सरपंच का कहना है कि संबंधित बीडीओ ने भुगतान रोक दिया। इसलिए पंचायत सहायकों को हटाया है।
भैसरोडगढ़ की ग्राम पंचायत बड़ौदिया में पंचायत सहायकों को हटाने से सरपंच के प्रति रोष है। मानदेय की मांग की तो सरपंच बाबू मोहम्मद मंसूरी ने छह अप्रैल को पंचायत सहायक मनोज वैष्णव, बालचंद शर्मा, हेमराज माली, गिरिराज गुप्ता को हटाने के आदेश जारी कर दिए। पंचायत सहायक संघ ने बड़ौदिया स्कूल प्रिंसिपल, बीडीओ, एसडीएम, सीईओ, कलेक्टर से गुहार की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत सहायकों ने अब धरने की चेतावनी दी है। सरपंच मंसूरी ने अपने आदेश में लिखा कि पंचायत सहायकों को अस्थाई रूप से एक वर्ष के लिए पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी बड़ौदिया के संस्था प्रधान और अध्यक्ष एसएमडी ने नियुक्त किया था। हाल ही में भैसरोडगढ पंस के बीडीओ डॉ. भानुमौली मौर्य ने चार अप्रैल के आदेश में लिखा है कि सरपंच और सचिव के नाम पंचायत खाते में किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया। इससे ग्राम पंचायत के सभी विकास कार्यों में रुकावट आ गई है। ऐसे में भुगतान असंभव होगा, इसलिए सेवाएं हटाई जाती हैं।
मनमानी
बड़ौदिया पंचायत में नियुक्त पंचायत सहायकों को 10 माह से वेतन भी नहीं मिला, जबकि वित्त मंत्रालय से राशि स्वीकृत
नियुक्ति अवैधानिक | काम कराने के बाद अब बताया गलत नियुक्ति, पंचायत सहयाक की जरूरत नहीं
पंचायत सहायक दस महीने से कार्य कर रहे थे। अब सरपंच ने इनका चयन अवैधानिक बताया। आदेश में कहा कि पंचायत विभिन्न कार्यों में करीब दस लाख रुपए खर्च करती है। इसमें कार्यालय व्यय एक लाख, राष्ट्रीय पर्व पर एक लाख, बिजली बिल 50 हजार, सरपंच मानदेय 50 हजार, वार्डपंच मानदेय 50 हजार, सुरक्षाकर्मी मानदेय 50 हजार, रास्ता दुरुस्ती पर दो लाख, पेयजल व्यवस्था एक लाख, अन्य शिविरा पर दो लाख रुपए खर्च होते हैं। स्कूलों में स्टाफ पूरा हो गया है। पंचायत सहायकों की जरूरत नहीं है।
विकास अधिकारी बोले - सरपंच के पास नहीं होता है हटाने का अधिकार
पंचायत सहायकों को राज्य वित्त आयोग पंचम में अनुमत किया गया है, जिसकी राशि ग्राम पंचायत को प्राप्त हो चुकी है। पंचायत सहायकों को वेतन पंचायत को देना होगा। इसमें पंचायत पर कोई भार नहीं पड़ रहा। किसी भी पंचायत सहायक को पंचायत की जनरल बैठक और पंचायत हटा सकती है, व्यक्तिगत सरपंच नहीं। इस मामले में पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। वेतन की राशि पंचायत सहायकों को दी जानी चाहिए। - डॉ. भानुमौली मौर्य, बीडीओ भैसरोड़गढ़
आदेश में मनमाने तरीके से बदलाव की भी शिकायत... पंचायत सहायकों का कहना है कि सरपंच ने पंचायतीराज विभाग के आदेश को तोड़मरोड़ के उपयोग किया। पंचायत सहायक को पंचायत हटा सकती है, न कि सरपंच। सरकार ने जब नियुक्ति दी है तो उसे कार्यकाल से पहले कैसे हटाया जा सकता है।
पंचायतीराज का आदेश है
पंचायतीराज का आदेश है कि काम नहीं है तो पंचायत सहायकों को हटाया जा सकता है। पंचायत के पास फंड नहीं है। इसलिए हटाया गया है। नियम ही तो माना है। बाबू मोहम्मद मंसूरी, सरपंच, बड़ौदिया