गर्मी बढ़ते ही ग्रामीण इलाकों में गहराया जल संकट, 185 टैंकर रोज चलाए जा रहे
गर्मी में तेजी के साथ ग्रामीण अंचल में पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। पेयजल स्रोत जवाब देने लगे हैं। इसके चलते 84 गांवों की आपूर्ति टैंकरों पर निर्भर हो गई है। इनमें प्रतिदिन 185 टैंकर चलाए जा रहे हैं।
एक्सईएन अनिल कुमार ने बताया कि वर्तमान में पिड़ावा क्षेत्र के 51 गांव में प्रतिदिन 118 टैंकर, डग क्षेत्र के 14 गांव में 20 और भवानीमंडी के 9 गांव में प्रतिदिन 16 टैंकर चलाए जा रहे हैं। एक्सईएन पुरुषोत्तम सिंघल ने बताया कि अकलेरा नगर में 5 टैंकर, पोली में 2 और झालरापाटन क्षेत्र के देवरी गांव में 3 टैंकर और बकानी के 8 गांव में 10 से 12 टैंकर चलाकर व्यवस्था बनाई जा रही है। जबकि झालावाड़ शहर में टेल क्षेत्र में पानी की दिक्कत होने के कारण प्रतिदिन 10-12 टैंकर चलाए जा रहे हैं।
आहू नदी के किनारे बसा आकोदिया फिर भी संकट
सुनेल. इस बार कम बारिश से क्षेत्र में जल संकट के हालात बन गए हैं। हालांकि पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन टैंकर शुरू कर दिए है। अकोदिया गांव में टैंकर नहीं चलाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में रोष है। आहू नदी के किनारे होने पर भी अकोदिया गांव के बाशिंदे जल संकट से जूझ रहे है। गांव के हैंडपंप हवा फेंक रहे हैं। कुएं- कुइयां में पानी रीत गया है। ग्रामीणों ने बताया की अन्य गांव में टैंकर चलाए गए। अकोदिया गांव को इसमें शामिल नहीं किया गया। पीएचईडी के जेईएन जेपी डागल ने बताया कि यदि अकोदिया गांव में पेयजल समस्या है तो वहां टैंकर शुरू कर देंगे।
सुनेल. चछलाव में टैंकर से पीने का पानी भरते ग्रामीण।
पिपलाज में निजी ट्यूबवेलों से खरीद कर पीते हैं पानी
खानपुर. पिपलाज में जनता जल योजना रख रखाव के अभाव में 8 वर्ष ठप है। गांव में कहने को तो 3 सिंगल फेस की ट्यूबवेल चालू हैं, लेकिन उनका पानी पीने के योग्य नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को निजी ट्यूबवेल मालिकों से पीने का पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि तत्कालीन सरपंच ने 2005 में जनता जल योजना में एक टंकी का निर्माण कर पूर गांव में पाइप लाइन बिछाकर कनेक्शन देकर जलापूर्ति कराई थी। अब रख रखाव के अभाव में ठप है। पंचायत सचिव जगदीश रैगर ने बताया कि 3 सिंगल फेस ट्यूबवेल चालू है, जिनका पानी पीने योग्य नहीं है। इस मामले को लेकर उच्चाधिकारियों अवगत कराया जा चुका है।
डग में 72 घंटे में एक बार आता है नल, ट्यूबवेल-हैंडपंपों ने दम तोड़ा तो संकट खड़ा हुआ
डग. माधवी जलप्रदाय योजना से जलापूर्ति की जाती है, लेकिन पीने के पानी के डग में सबसे बदतर हालात है। 72 घंटे में एक बार नल आते हैं। लंबे समय से यह व्यवस्था बनी हुई है। यहां लगे ज्यादातर हैंडपंप व ट्यूबवेलों का जलस्तर कम चुका है। इस कारण में पीने के पानी के लिए लोगों को नल आने के दिन और समय का इंतजार रहता है। कस्बे में जल संकट को दूर करने के लिए प्रमुख मोहल्लों में ट्यूबवेल लगवाई गई, लेकिन वे भी जवाब दे रही है। वह मात्र 10 से 15 मिनट ही पानी दे पाती है। जिन ट्यूबवेल में अच्छा पानी आ रहा, उन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर दिन रात चलाने से उनकी मोटरें जल चुकी या कुछ में पानी खत्म हो चुका। गंगधार गेट व नाई मोहल्ला स्थित ट्यूबवेल चालू होने से लोग जरूरत का पानी लेकर आते हैं। एईएन रामनिवास मीणा ने बताया कि डग कस्बे में पानी सप्लाई करने की डिजाइन चार दशक पुरानी है, इस कारण एक दिन या दो दिन छोड़कर सप्लाई होती है। माधवी में पर्याप्त पानी है। वही विभाग के कैम्पस में दो ट्यूबवेल भी लगी है वो भी चालू है। डग सरपंच राजेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि कस्बेवासियों की सुविधा के लिए कस्बे में ट्यूबवेल लगाई थी, यदि कोई समस्या होगी तो समाधान किया जाएगा।