नगर परिषद की कार्यप्रणाली कहीं पड़ न जाए जनता पर भारी
अंधड़ और तूफान आने पर अधिकांश स्थानों पर जर्जर मकान गिरने से बड़ी घटनाएं सामने आती हैं। जर्जर मकानों के नीचे दबने से जनहानि की भी आशंका बनी रहती है। शहर में करीब सैंकड़ों ऐसे मकान हैं, जो जर्जर अवस्था में है और अंधड़, तूफान में गिरने की संभावना भी रहती है। फिर भी नगरपरिषद की ओर से न ही ऐसे जर्जर मकानों का रिकॉर्ड तैयार करवाया जाता है और न ही उनका सर्वे करवाया जाता है।
शहर के पुराना शहर में करीब चार दर्जन से अधिक मकान जर्जर हालत में देखने को आसानी से मिल जाएंगे। इसके बाद भी नगरपरिषद की ओर से जर्जर मकानों को गिराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। बड़ी बात है नगरपरिषद ने कई ऐसे मकानों को जनहानि की आशंका को देखते हुए पूर्व में जर्जर भी घोषित कर चुकी है। लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी नोटिस देकर खानापूर्ति की जाती है। जबकि यह मकान काफी रिहायसी इलाकों में बने हुए हैं। जो कभी भी भरभराकर धराशाही हो सकते हैं। ऐसे में जनहानि की संभावना पूरी बनी हुई रहती है। धौलपुर बीडीओ लाखन सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अंधड़ और तूफान से गिरने वाले असुरक्षित मकान की संख्या एक ग्राम पंचायत में 5 प्रतिशत के करीब हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि धौलपुर में 33 ग्राम पंचायते हैं। ऐसे में इन 33 ग्राम पंचायतों में अनुमानित 750 मकान ऐसे हो सकते हैं, जो असुरक्षित हैं और अंधड़ या फिर तूफान में गिर सकते हैं।
शहर में पड़ताल
अप्रैल से जून माह तक आते हैं सबसे ज्यादा अंधड़ और तूफान, कलेक्टर ने पटवारियों को असुरक्षित इमारतों का सर्वे कराकर रिपोर्ट देने के दिए निर्देश
शहर में सैंकड़ों मकान जर्जर, नहीं हुआ सर्वे, गांवों में 750 मकान हैं असुरक्षित
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन बोले-
धौलपुर. पुराना बस स्टैंड स्थित नगरपरिषद द्वारा जर्जर घोषित मकान।
आप भी जानिए
छत और दीवारों से तय होती है जर्जर मकान की स्थिति
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन आरबी मंगल ने बताया कि किसी भी मकान की दीवार और छत उस मकान की जर्जर की स्थिति को तय करती है। एक्सईएन ने बताया कि किसी मकान की पट्टी, दीवार में दरार हो, देखने से गिरने का अंदेशा लगता हो। साथ ही यह तय किया जाता है कि मकान कितना पुराना है। एक्सईएन ने बताया कि टीम मकान को देखती है तब ही वास्तविक स्थिति का पता चल पता है। एक्सईएन ने बताया कि पीडब्ल्यूडी सरकारी भवनों को जर्जर घोषित करती है। प्राइवेट मकानों के लिए नगरपरिषद अधिकृत है।
एक्सपर्ट व्यू
शहर में अधिकांश किराएदार और मालिक के बीच है विवाद
ये लापरवाही : नगरपरिषद जिस मकान को 2014 में मान चुकी जर्जर, जनहानि की भी जताई आशंका, फिर भी नहीं हुई विभागीय कार्रवाई
21 मार्च-17 को मकान गिराने को दिया गया नोटिस।
किराएदार-मकान मालिक के झगड़े में मेरिट पर लेते हैं निर्णय: आयुक्त
नगरपरिषद आयुक्त शशिकांत शर्मा का कहना है कि शहर में जर्जर व असुरक्षित मकानों को लेकर नगरपरिषद के जेईएन और एईएन कभी-कभी रिपोर्ट करते रहते हैं तो संबंधित को नोटिस देते रहते हैं। या कभी संबंधित आवेदक सूचित करते हैं तब नोटिस दे दिया जाता है। वैसे इसको लेकर किसी प्रकार का कोई सर्वे नहीं किया गया है। शहर में कितने मकान जर्जर और असुरक्षित है, इसका सही आंकड़ा हमारे पास नहीं है। कभी-कभी मकान मालिक और किराएदार का झगड़ा भी चलता रहता है। ऐसी स्थिति में हम उस मामले को दिखवाते हैं और उसकी मेरिट पर निर्णय लेते हैं।
नगरपरिषद के अधिकारी पुराना बस स्टैंड स्थित एक मकान को 2014 में जर्जर मान चुके हैं। जिसे गिराने के लिए नगरपरिषद आयुक्त ने मकान मालिक को कई नोटिस दिए गए। फिर भी 4 साल बीतने के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं गई। मकान मालिक मीना देवी प|ी स्व.राकेश कुमार द्वारा नगरपरिषद को मकान गिराने के लिए खर्चा भी वहन करने को कहा गया। इसके बाद भी अधिकारी सिर्फ नोटिस देकर किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ितों ने इस संबंध में एसडीएम तक गुहार लगाई है। हालांकि इस संबंध में नगरपरिषद आयुक्त शशिकांत शर्मा का कहना है कि अगर ऐसा कोई मामला है तो इसे दिखवाते हैं।
डीएम के आदेश: प्राकृतिक आपदाओं के लिए असुरक्षित मकानों का करें सर्वे
जिले में दो दिन पूर्व आए अंधड़ के बाद हुए नुकसान को लेकर जिला प्रशासन ने माना है कि अप्रैल से जून तक अंधड़ और तूफान आते हैं। ऐसे में एक तरफ जहां जिले वासियों से सावधानी बरतकर भविष्य में नुकसान से बचने की अपील की गई है, वहीं पटवारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे व्यक्तियों-परिवारों का सर्वे कर सूचीबद्ध करें, जिनके मकान ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए असुरक्षित हैं तथा उन्हें हिदायत दे कि समय रहते वे समुचित सुरक्षा उपाय कर लें, ताकि भविष्य में ऐसी जान-माल की हानि से बचा जा सके।