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पुलिस ने हाईकोर्ट में लगाई अर्जी, जज जेल ही सुनाए फैसला, सोशल मीडिया पर शांति बनाने की अपील
आसाराम की ओर से साधकों से अपील की जाए कि जोधपुर न आएं: डीसीपी
कोर्ट में देंगे जवाब, देश भर में अपील जारी करने का पैसा नहीं: शिवा
जोधपुर | गुरुकुल की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में फंसे आसाराम को बेगुनाह बताने वाले हजारों मैसेज सोशल मीडिया पर अभियान के रूप में चल रहे हैं। हर पेशी पर भी सैकड़ों लोग आसाराम को देखने आते हैं। अब तो 25 अप्रैल को केस का फैसला आने वाला है इसलिए पुलिस ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगा कर फैसला जेल में सुनाने की अपील कर दी है। पुलिस ने अपील में कहा कि आसाराम के समर्थक हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं करते हुए एकत्र होते हैं और इंटेलीजेंस इनपुट भी है कि फैसले के दिन हजारों लोग जोधपुर में जुट सकते हैं इसलिए कहीं ऐसा न हो कि राम-रहीम को सजा सुनाते वक्त पंचकुला में जो हालात पैदा हुए थे, वैसी परिस्थितियों से जोधपुर शहर को बचाने के लिए आसाराम की ओर से देश भर के समर्थकों को टीवी-समाचार पत्रों के माध्यम से अपील जारी कराई जाए कि वे जोधपुर नहीं आए। पुलिस की इस अर्जी पर आसाराम की ओर से चार दिन बाद मंगलवार को जवाब आएगा। उधर आसाराम का मुख्य साधक और जोधपुर की तमाम एक्टिविटी को देखने वाला शिवा भी कहता है कि उनके पास पैसा नहीं है कि वे देश भर मे अपील जारी करवा दे। हालांकि वह यह जरूर कहता है कि उन्होंने सभी साधकों को संदेश भिजवा दिया है कि वे फैसले के दिन अपने घरों व देश के 400 आश्रमों में प्रार्थना सभाएं करें, मगर पुलिस कोई खतरा नहीं उठाना चाहती। इसलिए जेल से कोर्ट तक करीब एक हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी तथा शहर में कहीं भी समर्थकों को एकजुट नहीं होने देने के प्रबंध कर रही है।
डीसीपी (ईस्ट) अमनदीप कपूर ने दो दिन पहले हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी 25 को फैसला आएगा तब शहर में कानून-व्यस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। समर्थक पिछले चार सालों से लगातार आ रहे हैं, हाईकोर्ट ने तीन सालों में तीन आदेश दिए थे कि आसाराम अपने समर्थकों को काबू करे और भीड़ न जुटाए। यह भी आदेश थे कि आसाराम की ओर से राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय समाचार पत्रों व टीवी पर समर्थकों को जोधपुर नहीं आने की अपील जारी कराई जाए, मगर उसकी ओर से कोई पालना नहीं हो रही।
वकीलों ने कहा, जहां सुनवाई, वहीं सुनाया जाए फैसला : आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने पुलिस के इस प्रार्थना पत्र का विरोध किया। उन्होंने कहा, कि जब पूरे मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में हुई तो फैसला भी यहीं सुनाया जाए। पहले नियमों की पालना किए बगैर जेल में सुनवाई शिफ्ट करने के नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद विड्रॉ करना पड़ा था। इस पर जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ ने पक्ष लिखित में पेश करने के निर्देश दिए तो वरिष्ठ अधिवक्ता ने मोहलत मांगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 अप्रैल को मुकर्रर की है।