भागवत कथा में बेटियों को पढ़ाने का दिया संदेश
जसुपुरा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन राष्ट्रीय बाल व्यास शिव शक्ति पुत्र ऋषभदेव ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण साथ में पढ़े थे जब भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बन गए लेकिन सुदामा गरीब ही रहे। बाल व्यास ने कहा कि एक दिन सुदामा की प|ी सुशीला में सुदामा को द्वारिका में जाने के लिए कहा लेकिन सुदामा ने कहा कि हे सुशीला मैं मांगने के लिए अपने मित्र के पास नहीं जा सकता हूं क्योंकि मांगने से प्रेम घटता है। लेकिन प|ी की जिद पर सुदामा चार मुट्ठी चावल लेकर द्वारिका पहुंचे तो जानकारी मिलती है तब भगवान कृष्ण सिंहासन को छोड़कर अपने मित्र सुदामा को गले लगा लेते हैं। अपने दांतों से ही सुदामा के पैर में से कांटा को खींचते हैं।
सुदामा और श्रीकृष्ण की यह मित्रता हमारे भारत के लिए एक मिशाल है कि मित्रता हो तो सुदामा और कृष्ण जैसी। इस दौरान बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान पर चर्चा कर लोगों से बेटियों को शिक्षित करने का संदेश दिया गया।राष्ट्रपति के धार्मिक सलाहकार गजवान मुकुट शर्मा ने बाल व्यास का स्वागत किया। भगवान कृष्ण एवं सुदामा की झांकियां भी सजाई गई। अंत में रामदीन शर्मा परिवार के साथ आरती उतारी तथा प्रसादी का वितरण किया।