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30 चितेरों ने कैनवास पर उतारे भगवान शिव के कई रूप, प्रकृति प्रेम का संदेश भी दिया

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

सांवलियाजी विश्रांति गृह में तीन दिवसीय आर्ट फेस्टिवल में चितेरों द्वारा उकेरी जा रही कृतियों के रंग अब कलाप्रेमियों के मन पर गहरी छाप छोड़ने लगे हैं। चित्तौड़गढ़ आर्ट सोसायटी और माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित आर्ट कैंप में रविवार को दूसरे दिन देशभर के तीस कलाकारों द्वारा कैनवास पर भगवान शिव के नाना रूप उभरने लगे तो कला का यह संगम शिवमय हो गया।

आर्ट सोसायटी के सचिव मुकेश शर्मा ने बताया कि कलाकारों को एक ही थीम भगवान शिव दी गई थी। कलाकारों ने शिवपुराण व भीत्ति चित्रों के आधार पर चित्र बनाए। जिनमें थ्री-डी स्टाइल,एक्रिलिक कलर का प्रयोग कर नटराज, आक्रोश, नृत्य, विषपान आदि चित्र बनाए। चित्र माहेश्वरी समाज के जिले में स्थित महेश भवनों में सजाए जाएंगे। पहली बार कला के साथ एक समाज का जुड़ना अच्छी पहल है।

प्रकृति की हर चीज में भगवान है...आर्टिस्ट मुकेश शर्मा ने बताया कि प्रकृति की हर चीज में भगवान का वास है। उनकी पेंटिंग में भगवान शिव का प्रकृति के साथ चित्रण किया गया है। संदेश है कि हमें पर्यावरण को बचाना चाहिए।

नए कलाकारों को धैर्य रखने की जरूरत... उड़ीसा के प्रदीप्ता दास व अजमेर के सीनियर आर्टिस्ट सचिन साखलकर ने बताया कि युवा कलाकार कला सीखना चाहते हैं पर अक्सर उनमें धैर्य की कमी दिखती है। जबकि कला धैर्य ही मांगती है। प्रदीप्ता दास बताते हैं कि कई बार इस परीक्षा में नए लोग भटक जाते हैं। उन्हें कला को समझना चाहिए। सचिन ने बताया कि बचपन से कलाकार अभ्यास करे तो उनके दिमाग में स्थिरता व धैर्य आएगा।

शिव-पार्वती के चित्र से समझाया दांपत्य महत्त्व... गुजरात के बड़ोदरा से आईं पीनल पंचाल ने अपनी पेंटिंग में भगवान शिव व पार्वती के चित्र से संदेश दिया है कि स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं। एक-दूसरे की भावना को समझ कर जीवन जीना चाहिए। पेटिंग में शिव व पार्वती के नृत्य से यही भाव ढलकाए गए।

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