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फसल पड़ी पीली, बारिश नहीं हुई तो सूख जाएगी

3 वर्ष पहले
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क्षेत्र में 15 दिन से बारिश नहीं हुई है। इसका असर हजारों एकड़ में बोवनी की गई फसल पर हुआ है। मानसून की बारिश में जो बोवनी की गई थी उनके पौधे पीले पड़कर मुरझाने लगे हैं। अगर एक-दो रोज में बारिश नहीं हुई तो फसल खत्म हो जाएगी। दोबारा बोवनी करना पड़ेगा। निंबोला क्षेत्र में मानसून की बारिश के बाद रिमझिम चली बारिश से खेत हरे हो गए थे लेकिन अब किसान काफी चिंतित हैं।

गांवों में अच्छी बारिश की मिन्नतें कर रहे हैं। फसल को सिंचित करने के लिए क्षेत्र के चार स्त्रोत झांझर तालाब, मगरुल तालाब, बनिया नाला, नीम नाला लेकिन इनमें भी भरपूर मात्रा में पानी नहीं है। मानसून की बारिश में थोड़ा बहुत पानी एकत्र हुआ जिससे क्षेत्र की हजारों एकड़ फसल की पूर्ति करना मुश्किल है। झांझर और मगरुल तालाब तीन साल से ओवरफ्लो नहीं हुए। इस साल अच्छी बारिश से तालाब भराने की उम्मीद थी। किसान किशोर कैथवास , राजेश भावसार, चंद्रशेखर पाटील ने बताया फसलें पीली पड़ रही है जिन पर मच्छर और इल्लियां लग रहीं हैं। फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहें है। खेताें में चारा और खरपतवार भी बड़ रहीं है। फसलों को यदि समय पर पानी नहीं मिला तो पैदावार में कमी हो जाएगी। जमीन की नमी खत्म होने से फसलों में बीमारी लगने को डर भी बना हुआ है।

कपास, तुअर, मूंग, मक्का चना, उड़द, ज्वार सोयाबीन के पौधे मुरझाए, कीटनाशक का भी खतरा

क्षेत्र में हजारों एकड़ की फसल पीली पड़ने लगी है।

दम तोड़ रहा कपास और सोयाबीन

किसानों ने इस बार भी कपास और सोयाबीन की अधिक मात्रा में बोवनी की है। ज्वार तीन हजार एकड़, सोयाबीन डेढ़ हजार एकड़, तुअर दो हजार एकड़, 500 एकड़ में मक्का की बोवनी है। इसके अलावा मूंग, चना, उड़द व अन्य प्रकार की छोटी दालें व सब्जियों बोई गई हैं। अभी की स्थिति में फसलों को किसी तरह पानी दे रहे हैं।

जिनके पास ट्यूबवेल वे किसान मजे में

क्षेत्र में जिन किसानों के पास खेत में ट्यूबवेल है वह मजे में हैं। अगर 10 दिन बारिश नहीं हुई तो ट्यूबवेल का जलस्तर भी नीचे चला जाएगा। निंबोला से पांच किमी की दूरी में एक हजार से ज्यादा कुएं हैं जिनका जलस्तर कम हो गया। झांझर तालाब 50 प्रतिशत भरने के बावजूद खरीफ फसल के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि इन किसानों के खेत में कुएं बावड़ी नहीं होने से तालाब के पानी का फायदा नहीं मिल रहा।

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