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डेढ़ माह पहले हुआ टंकी का टेंडर, निर्माण अब तक नहीं, खुद के कुएं खुदवा रहे लोग

3 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर ग्राम निंबोला। यहां पर पानी के लिए एक टंकी और ट्यूबवेल सहित पाइप लाइन को स्वीकृति दी गई। डेढ़ माह पहले ऑनलाइन टेंडर होकर खंडवा की कंपनी को ठेका दे दिया गया लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ है। बढ़ रहे जलसंकट से निपटने के लिए गांव वालों ने पहल की। निजी कुएं खुदवाकर पानी के लिए कवायदें कर रहे हैं। पीएचई विभाग टंकी का निर्माण शुरू करवाने में लापरवाही बरत रहा है।

निंबोला में 50 लोग अपने घर के परिसर में कुएं खुदवा रहे हैं। तीन से चार कुओं का निर्माण पूरा हो गया है। करीब 80 फीट पर पानी लग रहा है। ग्रामीणों ने कहा टंकी निर्माण के भरोसे रहेंगे तो पानी नहीं मिलेगा। गर्मी में पानी की कमी हो रही है। जिम्मेदारों को टंकी का निर्माण जल्द करवा देना था। निर्माण नहीं होते देख लोगों ने खुद ही कुएं खुदवाना शुरू कर दिए हैं। मजदूर लगाकर मिट्टी निकलवा रहे हैं। गांव में जगह-जगह कुओं का निर्माण जारी है। जिन कुओं में पानी कम हो गया है उनका गहरीकरण करवा रहे हैं। गांव में कुल 16 हैंडपंप है। इसमें से एक हैंडपंप बंद पड़ा है। हैंडपंप पर पानी भरने के लिए भीड़ लग रही है। अत: इस प्रकार से बर्तन रखकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। बार-बार हैंडपंप पर जाकर पानी भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी भरने की बात पर विवाद हो रहे हैं। ग्रामीणों ने जल्द समस्या के निराकरण की मांग की है।

इस तरह से खुद के कुएं खुदवा रहे हैं लोग।

10-10 वार्ड में एक दिन बाद सप्लाय कर रहे पानी
गांव में कुल 20 वार्ड हैं। आबादी करीब 9000 है। इन सभी वार्डों के लिए एक पुराना ट्यूबवेल है। इस ट्यूबवेल से गांव को दो हिस्सों में बांटकर एक दिन के अंतराल में 10-10 वार्डों में पानी सप्लाय कर रहे हैं। अत: एक दिन में आधे गांव को ही पानी सप्लाय हो पा रहा है। इसमें भी ट्यूबवेल का पानी 10 से 20 मिनट में खत्म हो जाता है। इससे पानी की पूर्ति नहीं हो पा रही है। ऊंचाई पर स्थित नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है।

पंचायत से की शिकायतें
सरपंच पप्पू पाटील ने कहा डेढ़ माह पहले टेंडर होने के बाद कुछ दिनो तक निर्माण शुरू नहीं हुआ तो हम पीएचई कार्यालय गए। यहां से संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इसके बाद शिकायत कर टंकी निर्माण शुरू करवाने की मांग की गई। बावजदू इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। टंकी का निर्माण जल्द करवाना चाहते हैँ। अफसर लापरवाही बरत रहे हैं।

इन गांवों में भी है जलसंकट
निंबोला सहित क्षेत्र के मंगरूल, झिरी, झांझर, चुलखान, नसीराबाद, बोरी, बसाड़, मचलपुरा, गारबलड़ी, ठाठर, खामला सहित अन्य गांवों में जलसंकट है। पिछले साल अप्रैल तक कुएं, बावड़ियो में पानी था। प्रशासन ने प्रयास नहीं किए हैं।

47 लाख 5000 हजार में होना है टंकी निर्माण
जलसंवर्धन योजना के तहत 47 लाख 5000 रुपए में टंकी का निर्माण होना है। इस टंकी की क्षमता 1 लाख 25 हजार लीटर रखी गई है। इसके अलावा एक ट्यूबवेल का निर्माण किया जाना है। इसमें 7000 मीटर पाइप लाइन डाली जाएगी। अत: टंकी िनर्माण होना है। ट्यूबवेल में 15 हार्स पावर का मोटर पंप लगाया जाएगा। निर्माण का ठेका खंडवा के कोठारी ब्रदर्स की कंपनी को दिया है।

इसलिए कम हुआ गांव का जलस्तर
ग्रामीणों ने कहा गांव में जलसंकट नहीं होता था। दूधमली नदी होने के कारण गांव का जलस्तर बना रहता था। कुएं, ट्यूबवेल रिचार्ज होते थे। इस नदी पर तीन साल पहले तालाब बना। इससे पानी तालाब में रूकने लगा। बारिश कम होने के कारण यह तालाब भी सूख गया। इस कारण गांव का जलस्तर कम होने लगा। पिछले तीन साल से गांव का जलस्तर कम होने लगा है।

ठेकेदार से अनुबंध कर जल्द शुरू करेंगे निर्माण
पानी की टंकी, ट्यूबवेल और पाइप लाइन का टेंडर हो गया है लेकिन अभी ठेकेदार से अनुबंध नहीं हो पाया है। जल्द अनुबंध करके निर्माण शुरू करेंगे- संजय दवे, सहायक यंत्री पीएचई विभाग

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