किशोर न्याय एक्ट-2015 की धारा 4 के अंतर्गत आदर्श नियम-2016 के अनुसार राज्य के प्रत्येक जिले में विधि से संघर्षरत बच्चों के मामलों की जांच, सुनवाई और निस्तारण के लिए एक या अधिक किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया जाना अनिवार्य है। यह बोर्ड एक महानगर मजिस्ट्रेट/ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट और 2 सदस्य (जिसमें एक महिला हो) से बनी एक न्यायपीठ होती है। प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में प्रदत्त महानगर मजिस्ट्रेट/प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त होती है। बोर्ड में जो दो सदस्य होते हैं, वे सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं और उनका चयन एक तय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
लंबित मामले
6 माह से 1304
1 साल 1335
2 साल 1645
3 साल 1503
4 साल 1132
5 साल 1351
5 साल से अधिक 1068
कुल 9,338
कई बार गवाहों की तामील नहीं हो पाती है। इसलिए मामले पेंडिंग पड़े रहते हैं। वैसे हम प्रयास करते हैं कि बच्चों को जल्दी राहत मिले। छोटे मामलों में तो समझाइश से काम लेते हैं। उनको सुधार गृह भी भेज देते हैं। - ममता शर्मा, सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड जयपुर द्वितीय
किशोर न्याय बोर्ड में बड़ी संख्या में मामले पेंडिंग है। मैंने विधानसभा में भी यह मामला उठाया था, ताकि सरकार की नजर में आ सके। मैं अपने स्तर पर संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर मामलों के जल्दी निस्तारण के प्रयास कर रहा हूं। -अभिषेक मटोरिया, भाजपा विधायक, नोहर
कई लोग बच्चों से भिक्षावृत्ति व लेबर का काम कराते हैं। हम ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर बच्चों को मुक्त कराते हैं। - नरेंद्र सिखवाल, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति
सबसे ज्यादा लंबित प्रकरण
जिला लंबित प्रकरण
जयपुर 1094
श्रीगंगानगर 847
सवाईमाधोपुर 620
भरतपुर 555
अलवर 514
बाड़मेर 341
जोधपुर 331
बारां 284
बीकानेर 249
भीलवाड़ा 253
सबसे कम हैं लंबित मामले
जैसलमेर 81
टोंक 99
जालौर 83
राजसमंद 52
सिरोही 48
(आंकड़े दिसंबर 2017 तक के)