पचेवर | किरावल गांव के सती माता मंदिर परिसर में रविवार से सात दिवसीय नव कुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ हुआ। रामाश्रय दास महाराज की प्रेरणा से ग्रामीणों के तत्वावधान में आयोजित इस श्रीराम महायज्ञ व भागवत कथा के आयोजन के लिए तेजाजी धाम से विशाल कलश यात्रा निकाली गई। इसमें 171 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए चलीं। कलश यात्रा में का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। लोगों ने अपने घरों की छतों से कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की। कलश यात्रा गांव की परिक्रमा करते हुए सतीमाता मंदिर मंदिर परिसर के पास नव-निर्मित यज्ञशाला पहुंची। जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ जल कलशों की स्थापना की गई। यज्ञाचार्य चंद्रशेखर दाधीच ने बताया कि सप्त दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के अवसर पर सोमवार को प्रायश्चित संकल्प, दसविध स्नान, वरूणार्चन-जल यात्रा, मण्डप प्रवेश, गणपति स्थापना का आयोजन किया जाएगा । इस अवसर पर आयोजन समिति के महेन्द्र शर्मा, रामस्वरूप शर्मा, हनुमानप्रसाद, गोविंदनारायण, बद्रीनारायण, ओमप्रकाश, नरसीलाल, नौरतमल, रामकिशोर, गिर्राज शर्मा सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे। भक्त व भगवान को जोड़ने वाले सेतु के समान है श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण। महिला मंडल के तत्वावधान में कस्बे के मुकुंद बिहारी के मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के अवसर पर कथा वाचक पंडि़त गिरजा शंकर तिवाड़ी ने कहा कि जिस पर नदि को पार करने के लिए पूल की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार जीव को भव बंधन रूपी नदी को पार लगाने के लिए भी किसी सेतु की आवश्यकता होती हैं और वह सेतु प्राणी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण है। यदि मानव सच्चे मन से ध्यान लगाकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता हैं तथा उसके बताए मार्ग का अनुसरण कराते हैं। इस दौरान रामकिशोर व्यास, कांति चंद्र शर्मा, बद्रीलाल, प्रहलाद, मंगलचंद साहू, रामेश्वरप्रसाद, मोहनलाल गुप्ता, रमाकांत तिवाड़ी, वासुदेव सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे।