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चपरासी के अभाव में विद्यार्थी बजा रहे घंटी, रिक्त पद बने मुसीबत

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे है लेकिन पचेवर कस्बे के सरकारी विद्यालय में रिक्त पड़े पद, शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए है।

खास बात यह है कि स्कूल में दो सहायक कर्मचारियों के पद स्वीकृत है और दोनों ही पद रिक्त है ऐसे में विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रार्थना व छुट्टी के साथ-साथ कालांश बदलने के लिए खुद ही घंटी बजानी पड़ रही है। आदर्श विद्यालय का तमगा प्राप्त होने के बावजूद इसमें व्याप्त समस्याओं के चलते विद्यालय अपनी छवि को धूमिल कर रहा है। इतना ही नहीं विषय विशेषज्ञों के पद रिक्त होने से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है वहीं सरकारी स्कूलों में व्याप्त खामियों पर विभाग का कोई ध्यान नहीं है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार जनप्रतिनिधियों एवं शिक्षा विभाग के निदेशक से लेकर जिला शिक्षाधिकारी को अवगत करवाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है।

स्कूल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार व शिक्षकों को नामांकन वृद्धि के लक्ष्य दिए जाने के बाद से सरकारी स्कूल में विद्यार्थी तो बढ़ रहे है परंतु इस अनुपात में सुविधाओं में कोई वृद्धि नहीं हो पा रही है। आजादी से पूर्व स्थापित इस विद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है, इसी विद्यालय ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए दो अधिकारी तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए दो अधिकारी दिए है। बावजूद इसके विभाग की लापरवाही इसके गौरवपूर्ण इतिहास के साथ खिलवाड़ कर रही है। वर्तमान में स्कूल में राजनीति विज्ञान व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक विज्ञान, अध्यापक लेवल 2 में अंग्रेजी, कनिष्ठ लिपिक के एक पद के साथ ही चतुर्थ श्रेणी के दो पद रिक्त चल रहे है।

सहायक कर्मचारियों सहित विषय विशेषज्ञों के अभाव से जूझ रहा है पचेवर का सरकारी स्कूल

पचेवर. सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अभाव में प्रार्थना व कालांश बदलने के लिए विद्यार्थी बजाते हैं घंटी।

प्रतिनियुक्ति पर लगाया जाएगा

जिले में सभी जगह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे है, शाला विकास समिति के सदस्य मिल कर प्रस्ताव लेकर निर्धारित मानदेय पर अपने स्तर पर व्यवस्था कर सकते है। यदि फिर भी आवश्यकता अधिक है तो क्षेत्रीय विधायक से संपर्क कर प्रतिनियुक्ति पर लगाया जा सकता है। -शीराम रावत, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक टोंक

समस्या का स्थायी समाधान संभव

क्षेत्र का कोई भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो अन्य स्थान पर पदस्थापन हो व यहां आना चाहता हो तो अपना आवेदन जिला शिक्षाधिकारी के पास प्रस्तुत कर सकता है जिससे समस्या का स्थायी समाधान संभव है। - गिरधर सिंह, नोडल प्रभारी एवं प्रधानाचार्य, राउमा विद्यालय मालपुरा

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