राज्य में अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 1000 संवेदनशील और बड़े आपराधिक कांडों में जल्द से जल्द ट्रायल शुरू करने की कवायद शुरू की गई है। गृह विभाग ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे त्वरित निष्पादन के लिए अपने-अपने जिलों में कांडों को चिंहित करें। ऐसे आपराधिक कांडों को चिंहित किया जाए जिनके अनुसंधान का स्तर काफी ऊंचा हो और उन मामले में बिना किसी बाधा के वांछित समय सीमा के भीतर ट्रायल पूरा किया जा सके। निर्देश दिया गया है कि ट्रायल के लिए चिंहित किए जाने वाले कांडों में कोई भी ऐसा मामला न हो जिसमें अभियुक्त को फरार बताते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया है। क्योंकि ट्रायल के दौरान अभियुक्त को पेश नहीं किया जा सकेगा। कांडों के चयन के लिए एसएसपी या एसपी अपने जिले के डीएसपी मुख्यालय और लोक अभियोजक के साथ मिलकर करेंगे। गृह विभाग ने यह भी निर्देश दिया गया है कि इसकी कॉपी अपराध अनुसंधान विभाग को भी सौंपा जाए।
इस तरह के कांडों को ट्रायल के लिए किया जाना है चयन : शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज सभी कांड, अनुसूचित जाति -जनजाति अत्याचार निरोध अधिनियम, दुष्कर्म , पोस्को अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम , भ्रष्टाचार अधिनियम, सरकारी संपत्ति -धन के गबन से संबंधित, ब्लैकमेलिंग, लूट और सीसीए।
सभी जिलों को लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। सबसे ज्यादा रांची , जमशेदपुर और धनबाद को 100 कांडों को चिंहित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा पलामू , बोकारो, गिरिडीह, और देवघर को 50-50, चतरा और रामगढ़ को 40-40, खूंटी, गुमला, गढ़वा, दुमका, कोडरमा को 30-30, सिमडेगा, पाकुड़ , लोहरदगा, साहेबगंज, गोड्डा, जामताड़ा को 20-20 कांडों को विचारण के लिए चिंहित करने का टारगेट दिया गया है।