प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार गरीब परिवार को पक्के मकान बनाकर दे रही है। वहीं नगर पंचायत में 15 हितग्राहियों को योजना के तहत आवास स्वीकृत हुए। पक्का मकान बनाने के लालच में लोगों ने साहूकारों से कर्ज लेकर पुराने कच्चे घर को तोड़कर बनाना शुरू। पहली किस्त सभी हितग्राहियों प्रत्येक को 56 हजार 550 रुपए जारी हुए।
लेंटर लेबल तक घर का काम करा चुके लोग दूसरी किश्त के लिए नगर पंचायत पहुंचे, तब अधिकारी ने ग्राम पंचायत का पट्टा मान्य नहीं होने की बात कहकर अगली किस्त देने से इंकार कर दिया। इसके कारण गरीब हितग्राहियों के सामने समस्या आ गई है कि बारिश शुरू होने पर कहां रहेंगे। इस मामले में एसडीएम तीर्थराज अग्रवाल का कहना है कि नगर पंचायत के 15 आवास के हितग्राही पंचायत के पट्टे मामले की समस्या लेकर आए हैं, जिसके निराकरण में लगे हैं जल्द ही रास्ते निकलेगा। नगर पंचायत के वार्ड-13 और 15 के कुल 15 हितग्राहियों को ग्राम पंचायत ने 1996 में पट्टा दिया था, तब से लोग कच्चा मकान बना कर रह रहे थे। जब प्रधानमंत्री आवास योजना लागू हुई, तब चार सौ लोगों को पक्का मकान बनाकर सरकार की देने की योजना के तहत नगर पंचायत ने लोगों से आवेदन मांगे गए। इसमें 88 लोगों के आवेदन स्वीकृत हुए, जिसमें से 64 लोगों को घर बनाने का आदेश नगर पंचायत ने दिया। आदेश मिलने पर लोगों ने अपने-अपने कच्चे घर तोड़ कर नया पक्का घर बनाना शुरू किया। डीपीसी होने पर पहली किस्त की राशि 56 हजार 550 रुपए मिलने पर लोगों ने घर जल्दी बनाने के लिए साहूकारों से लाखों की उधारी में निर्माण सामग्री लेकर लेंटर लेबल तक का काम कर लिया। इसके बाद लंबे समय से दूसरी किस्त की राशि नहीं मिलने पर जब नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे तो सीएमओ रमेश दुबे ने बताया कि आप लोगों के पट्टे पर ऑडिटर ने आपत्ति कर दी है, इसलिए अब पैसा नहीं मिलेगा। लोगों ने साहब से दुखड़ा रोया कि वे बर्बाद हो जाएंगे, परिवार सड़क पर आ जाएगा, क्योंकि आवास के लिए अपना पुराना कच्चा मकान तोड़कर बाजार से लाखों का कर्ज ले चुके हैं। लेकिन अधिकारी ने हाथ खड़ा कर दिए।
वार्ड-15 में आवास बना रहा साध राम यादव पर दूसरी किस्त नहीं मिलने से परेशान है।
आस टूटने पर लगाई विस अध्यक्ष से गुहार
पीड़ित हितग्राहियों ने विधायक व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के नगर प्रवास पर पीड़ित परिवारों ने भेंटकर समस्या हल करने की गुहार लगाई। जिसपर एसडीएम राजस्व को समस्या का हल करने के निर्देश किए, लेकिन गुहार लगाते हुए भी महीना गुजर गए। लोगों की आस टूटने लगी है कि आखिर उनका क्या होगा। इससे अच्छा था कि वे कच्चे मकान में रहते थे।
सीएमओ बोले-समस्या हल करने करेंगे प्रयास
सीएमओ रमेश दुबे ने कहा कि लोगों से हम आवेदन मंगाकर शासन को भेजे, जहां से स्वीकृत होकर आए और सभी 66 लोगों को घर बनाने के आदेश भी जारी किए गए। पहली किस्त 15 लोगों को तो बाकी को दूसरी किस्त ऑडिटर की अनुशंसा पर जारी कर दी गई। लेकिन अब ऑडिटर ने आपत्ति कर दी है, जिससे समस्या हो गई है। उच्च अधिकारियों से चर्चा कर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
ग्राम पंचायत के पट्टे पर ऑडिटर ने आपत्ति जताई
इस संबंध में प्रधानमंत्री आवास योजना नगर पंचायत के नोडल अधिकारी लोकेश शर्मा ने बताया कि शासन की योजना के तहत मंगाए आवेदन व घरों का भौतिक सत्यापन किया गया। आवेदन स्वीकृत भी हुए और लोगों को पहली किस्त की राशि भी मिल गई, लेकिन अब ऑडिटर उनका पंचायत पट्टा अमान्य कर आपत्ति जताई है, जिसके कारण 15 लोगों की अगली किस्त जारी नहीं हो रही है। पट्टे को तहसीलदार से जारी होने पर मान्य करने की बात कही है।
घर बनाने में 1.5 लाख खर्च हो गए
हितग्राही साधराम यादव, जवाहिर देवांगन, प्रेमू तीजू वर्मा, घनश्याम धीवर, पुनीत वर्मा, हीरालाल यादव, रजन वर्मा, समारू केंवट, कुंवर सिंह देवांगन, रोमनाथ आदि ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना पास होने की खुशी बहुत थी। इसलिए अपने कच्चे मकान को तोड़कर वे पहली किस्त मिलने पर साहूकारों से उधार सामग्री लेकर लेंटर लेबल तक मकान बना चुके हैं, जिसमें 1.5 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो गए हैं और अब साहब लोग कह रहे हैं कि पट्टा मान्य नहीं हैं, इसलिए पैसा नहीं दे रहे हैं। दो माह हो गए हैं, हम लोगों के सामने कर्ज से छुटकारा और रहने की सबसे बड़ी समस्या आ गई है। सामने बारिश है, ऐसे में सिर छिपाने की सबसे बड़ी समस्या है। अगर शासन बीच मझधार में छोड़ता है तो हम बे-मौत मर जाएंगे।