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- विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। हर सप्ताह पढें आमने सामने। सत्तापक्ष और विपक्ष के दिग्गज नेता होंगे आमने सामने
विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। हर सप्ताह पढें आमने-सामने। सत्तापक्ष और विपक्ष के दिग्गज नेता होंगे आमने-सामने
भाजपा में सत्ता और संगठन में दूरियां बढ़ रही हैं। कार्यकर्ताओं के आरोप हैं कि उनके भी वाजिब काम तक नहीं हो रहे। क्या यह संगठन की कमजोरी नहीं?
-कहीं भी दूरियां नहीं हैं। बड़ा संगठन है। छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान दिया जा रहा है। कुछ शिकायतें जरूर थी, मगर उनको दूर कराया गया है।
जिले के नेताओं में भी गुटबाजी बढ़ी है। सोजत में विधायक-पालिकाध्यक्ष आमने-सामने हैं। पाली में नगरपरिषद-यूआईटी चेयरमैन और जैतारण में प्रभारी सांसद की मौजूदगी में दो जगह बैठकें हुईं?
-गुटबाजी कहीं भी नहीं हैं। मुझे ऐसी कोई जानकारी भी नहीं कि कोई अलग-अलग बैठकें भी कर रहा है। पाली के मामले में तो अब तक किसी ने नहीं बताया कि यूआईटी व नगरपरिषद चेयरमैन एक-दूसरे के खिलाफ बोल रहे हैं।
आप खुद कई मंत्रियों की बैठक में नहीं पहुंचते। आपकी सक्रियता भी सुमेरपुर के आसपास ही ज्यादा है। भाजपा के ही कुछ लोगों के आरोप हैं कि आपके नेतृत्व में संगठन की प्रभावी भूमिका नहीं है?
-मंत्रियों की बैठक में जिलाध्यक्ष का काम नहीं होता। वे सरकारी कामकाज के लिहाज से आते हैं। उनकी अगवानी के लिए जरूर पहुंचता हूं। हाल ही प्रभारी मंत्री के प्रवास के दौरान अच्छी बैठकें हुई हैं।
पंचायत समितियों से लेकर जिला परिषद व सभी छह विधायक भाजपा के। सांसद व केंद्रीय मंत्री, राज्य में दो प्रभावशाली मंत्री, उपमुख्य सचेतक भी आपके करीबी, फिर भी पार्टी का जिला कार्यालय नहीं?
- यह जरूर कमजोरी है कि भाजपा का कार्यालय नहीं बन पाया। कार्यकर्ता ने जो जमीन दी थी, उसके कागजात नहीं दिए गए। अब सरकारी स्तर पर जमीन देने पर रजामंदी हो गई है। जमीन मिलते ही भवन भी बनाएंगे।
विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। संगठन की नजर में छहों विधायकों की कार्यप्रणाली कैसी है? क्या आलाकमान ने आपसे कोई फीडबैक मांगा है?
- पूरे जिले में वरिष्ठ नेताओं के प्रवास हो रहे। हर गांव में जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता सक्रिय हैं। बूथ स्तर पर कमेटियां, पन्ना प्रमुख, शक्ति केंद्र प्रभारी का चयन हाे चुका है। रही बात टिकट की, वह आलाकमान का क्षेत्राधिकार है।
करणसिंह नेतरा
(एबीवीपी से राजनीति की शुरुआत, आपातकाल में जेल गए। कृषि मंडी में 4 बार निदेशक, 3 बार सुमेरपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष, 2 बार जिला महामंत्री रहे, उपमुख्य सचेतक के करीबी माने जाते हैं, अब भाजपा जिलाध्यक्ष)
नेतरा- आरोपों के सिवा कांग्रेस के पास कुछ बचा नहीं, फिर बनेगी सरकार
जनता तो दूर, कार्यकर्ताओं के काम नहीं हुए सरकार में, अब तो वे ही तैयार बैठे हैं हराने को : चाड़वास
चुन्नीलाल चाड़वास
(जिला परिषद में एकमात्र कांग्रेस के निर्वाचित सदस्य। इसी आधार व निर्विवाद छवि के कारण देवल गुट ने सीधे जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिलवाई। इससे पहले एनएसयूआई व यूथ कांग्रेस में सक्रिय रहे। )
आप पर आरोप है कि एक गुट विशेष के जिलाध्यक्ष बनकर रह गए। इसके चलते आपके बुलाए कार्यक्रमों में भीड़ नहीं जुटती। कार्यकारिणी लंबी-चौड़ी बनाई, लेकिन अधिकांश सक्रिय नहीं?
- मैं किसी गुट विशेष का नहीं हूं। कांग्रेस ही मेरे लिए सबसे बड़ा गुट है। पार्टी नेतृत्व ने जो मुझ जैसे छोटे व ग्रामीण पृष्ठभूमि के कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी है। उसे निभाने का प्रयास कर रहा हूं।
रायपुर में हुए बूथ सम्मेलन में आपकी मौजूदगी में ही लोकसभा से लेकर विधानसभा तक के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई। क्या ऐसा करना उचित है?
- मैं वहीं था, मगर किसी घोषणा का मैं समर्थन नहीं करता। मैं पाली और रायपुर दोनों कार्यक्रमों में मौजूद था। सभी से संगठन काे मजबूत करने का समर्थन मांगा था। उम्मीदवारी तो शीर्ष नेतृत्व को तय करना है।
जब भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पाली आते हैं, आप उन्हें पार्टी का नेता नहीं मानते या फिर आप पर ऐसा करने का कोई दबाव है?
- ऐसा कुछ नहीं है। संयोगवश या पारिवारिक कारणों से मैं नहीं पहुंच पाया। गहलोत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने 40 साल तक संगठन को अपने खून-पसीने से सींचा है।
आपको 27 महीने हो गए जिलाध्यक्ष बने। एक बार भी भाजपा के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर बयान जारी करने तक सीमित रहे?
- अब जरूर बड़ा प्रदर्शन होगा, इसमें भाजपा सरकार की कमियों व जनविरोधी नीतियों को मुद्दा बनाया जाएगा।
आपकी पार्टी के प्रत्याशी किस आधार पर चुनाव में वोट मांगेंगे। चार साल से ज्यादातर लोग जनता के बीच ही नहीं रहे। जो सक्रिय थे वे गुटबाजी में उलझे हैं?
कार्यकर्ताओं में मनभेद हो सकते हैं। सभी कांग्रेसी हैं और पार्टी के लिए ही कार्य कर रहे हैं। बड़े संगठनों में ये छोटी-मोटी बातें हैं। जनता से जुड़े मुद्दों पर सभी एक जाजम पर बैठते हैं।