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14 साल से प्रस्तावित जेडएलडी प्लांट अब अगले साल नवंबर तक लगाने का दावा

3 वर्ष पहले
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फर्स्ट फेज- 3 एमएलडी का जेडएलडी प्लांट जनवरी-19 तक

दो महीने तक इस प्रोजेक्ट का रिव्यू होगा, सैंपल समेत अन्य कंटेंट पर खरा उतरने का प्रोसेस

बैंक गारंटी के साथ सौंपा एक्शन प्लान

भास्कर संवाददाता | पाली

शहर की फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रोजेक्ट लगाने के लिए सीईटीपी ने मंगलवार को एक्शन प्लान तैयार कर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सौंप दिया है। जयपुर में प्रभारी मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक तथा एनजीटी की एक्सपर्ट कमेटी द्वारा जेडएलडी प्रोजेक्ट को ही प्रदूषण समस्या का एकमात्र विकल्प बताते हुए टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज को इस तकनीक पर जाने को कहा था। वर्ष 2004 से ही यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इच्छा शक्ति की कमी, राजनीतिज्ञों की दखलंदाजी तथा अन्य असंभव से प्रोजेक्ट का सपना दिखाने के कारण पाइपलाइन में चल रहा था।

जानकारी के अनुसार सीईटीपी ट्रस्ट मंडल की दो दिन से चल रही कवायद के बाद मंगलवार को जेडएलडी के एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया गया। एक्शन प्लान में ट्रीटमेंट प्लांट-6 को टर्सरी तकनीक के बाद जेडएलडी तकनीक से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। 12 एमएलडी के इस पूरे प्रोजेक्ट को नवंबर 2019 तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। सीईटीपी सचिव अशोक लोढ़ा का कहना है कि जेडएलडी लगाने के लिए सीईटीपी तैयार है। इसके लिए एक्शन प्लान तैयार कर प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सौंप दिया गया है। नवंबर 2019 तक हर हालत में पूरा कर दिया जाएगा।

सबसे पहले भास्कर में

3 चरणों में बनेगा 12 एमएलडी जेडएलडी प्रोजेक्ट, नवंबर- 19 तक पूरा करने का दावा

तमिलनाडु के त्रिपुर प्लांट की तर्ज पर बनेगा पाली का जेडएलडी सीईटीपी के एक्शन प्लान मेंं दर्शाया गया है कि एक साथ 12 एमएलडी का जेडएलडी प्लांट बनाने के बजाय उसे अलग-अलग पार्ट में बनाएंगे। तमिलनाडु के त्रिपुर में बने प्लांटों की तर्ज पर ही जापानी तथा अमेरिका की तकनीक का उपयोग होगा। एक बूंद भी पानी का मिसयूज नहीं हो। इसके लिए सभी पार्ट के मेमरन तथा आरओ अलग-अलग होंगे। एमई यानी पानी को ट्रीट करने के बाद बचने वाला रसायनयुक्त कीचड़, स्लज तथा हैवी मेटल को हवा में उड़ाया जाएगा। इससे स्लज निस्तारण की समस्या भी नहीं रहेगी।

सीईटीपी को बजट में परेशानी नहीं, 75 प्रतिशत सरकार का, खुद का 25 प्रतिशत ही लगाना होगा जेडएलडी के लिए केंद्र के साथ राज्य सरकार मंजूरी दे चुकी है। कुल 100 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए अपने हिस्से का 50 प्रतिशत तथा राज्य सरकार भी 25 प्रतिशत देने की सहमति दे चुका। केंद्र की तरफ से तो पहली किश्त 7.50 करोड़ रुपए भी सीईटीपी को 2 साल पहले ही मिल गए थे। शेष 25 प्रतिशत राशि उद्यमियों को वहन करनी होगी।

पाली में प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्या फैक्ट्रियों से निकला रंगीन पानी, समाधान भी 14 साल से जेडएलडी को ही मान रहे, अब सीईटीपी ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सौंपा एक्शन प्लान

सैकंड फेज- मई-19 तक 3 एमएलडी का दूसरा प्लांट शुरू होगा

3 महीने तक द्वितीय चरण में बने प्लांट का रिव्यू तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जाएगा

थर्ड फेज- 6 एमएलडी क्षमता का अंतिम जेडएलडी प्लांट नवंबर-19 तक पूरा होगा

इनसाइड स्टोरी

टैक्सटाइल उद्योगों से पाली के प्रदूषण के समाधान के लिए जेडएलडी को एकमात्र विकल्प बताते हुए इसे लगाने की पहल 2004 में ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2008 में हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई में एक बूंद भी ट्रीट या अनट्रीट पानी नदी में नहीं डालने के निर्देश जारी किए थे। तत्कालीन पर्यावरण मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने भी जेडएलडी लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद सीईटीपी में गुटबाजी व राजनीतिज्ञों की दखल से यह अब तक पूरा नहीं हो सका।

जेडएलडी के बजाय बताये दूसरे विकल्प जेडएलडी की योजना देखने, दूसरे राज्यों के प्लांट देखने पर ही लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बाद टर्सरी प्लांट का विकल्प आया। सीईटीपी ने कच्छ के रण में पाइपलाइन से रंगीन पानी छोड़ने का प्रोजेक्ट भी तैयार कर लिया। मगर 1000 करोड़ का बजट होेने के कारण सरकारी स्तर पर इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद नेहड़ा बांध में जाने वाले रंगीन पानी के लिए अलग से बाइपास बनाने की चर्चा के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार अटकता गया।

जेडएलडी यानी फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी को ट्रीटमेंट के बाद वापस काम लेने की तकनीक, ऐसे समझें सीईटीपी का एक्शन प्लान

30 अप्रैल : जेडएलडी का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार

सीईटीपी में राजनीतिज्ञों की दखलंदाजी से 14 साल से अटका प्रोजेक्ट, वरना 2004 में ही लग जाता

लेकिन... तीन साल पहले भी सीईटीपी ने जेडएलडी लगाने का वादा किया था, हो चुकी है 5 लाख की बैंक गारंटी जब्त

15 मई : तक प्री-बिड के लिए कंपनियों के साथ सीईटीपी की मीटिंग

20 जुलाई : तक कंपनियों के साथ टेंडर शर्तों पर निर्णय होगा

5 लाख की बैंक गारंटी गंवाई, अब इसी प्लांट को करेंगे जेडएलडी सीईटीपी को 3 साल पहले टर्सरी तकनीक के एकमात्र ट्रीटमेंट प्लांट -6 को जेडएलडी बनाने की शर्त पर ही प्रदूषण बोर्ड ने सहमति दी थी। इसके लिए 5 लाख की बैंक गारंटी का ड्राफ्ट सौंपा गया। जेडएलडी नहीं करने पर बोर्ड बैंक गारंटी को जब्त कर चुका है।

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