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शिलान्यास और लोकार्पण अब जनप्रतिनिधि से नहीं करवाए तो संबंधित अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

3 वर्ष पहले
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पाली सहित पूरे प्रदेश में अब सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण किसी विभाग ने जनप्रतिनिधि से नहीं करवाया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई होगी। ऐसे मामले में संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है। राज्य सरकार ने यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न विकास कार्यों का क्रेडिट सत्तारूढ़ दल को दिलाने के लिए उठाया है। इससे जनप्रतिनिधियों को यह साबित करने का मौका मिलेगा कि सरकार ने विकास के काम किए हैं। सूत्रों के अनुसार चीफ सेक्रेट्री एनसी गोयल ने प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के माध्यम से सभी विभागों को लिखित में आदेश जारी किया है। इस आदेश में साफ कहा गया है कि सार्वजनिक राशि के उपयोग से बनने वाले सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण समारोह में जनप्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक, जिला प्रमुख,प्रधान, मेयर, सभापति, सरपंच या अन्य जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। किसी राजकीय उपक्रम बोर्ड निगम या स्वायत्तशासी संस्थान के ऐसे कार्यक्रम हो उसमें भी जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। विभागों को ये निर्देश भी दिए हैं कि राजकीय भवनों के शिलान्यास उद‌्घाटन आदि कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों से ही संपन्न कराया जाए।

संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का भी माना जा सकता है दोषी

...तो माना जाएगा विशेषाधिकार हनन का दोषी

आदेश में राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम (1971) के प्रावधानों का जिक्र करते हुए यह भी चेताया गया है कि निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने का प्रावधान है। साथ ही 6 मार्च 2018 को दी गई अध्यक्षीय व्यवस्था के अनुसार निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है।

सरकार के कार्यकाल के आखिरी महीनों में मचती है शिलान्यासों और उद्घाटनों की अफरातफरी किसी भी सरकार के कार्यकाल के आखिरी महीनों में अफरातफरी मचती है और शिलान्यास तथा उद्घाटन ही होते हैं। पिछली गहलोत सरकार में भी ऐसा ही हुआ था और अब भी ऐसा ही होने जा रहा है।

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