पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • हम पढ़ लिख गए, इसलिए सर्वेंट हैं, नहीं पढ़ते तो गवर्नमेंट होते

हम पढ़ लिख गए, इसलिए सर्वेंट हैं, नहीं पढ़ते तो गवर्नमेंट होते

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
दैनिक भास्कर, यूआईटी, राजस्थान ब्राह्मण महासभा, युवा परिषद व आसान होम्स के संयुक्त तत्वावधान में लाखोटिया उद्यान में आयोजित विराट राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में देश भर से आए कवियों ने श्रोताओं को श्रृंगार, हास्य, व्यंग्य, परंपरा व वीर रस से सराबोर कर दिया।

रंगमंच से इन कवियों ने काव्यपाठ के माध्यम से श्रोताओं को चिंतन के नए आयाम दिए। जयपुर से आए हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर संजय झाला ने हमारा अपराध यही है कि हम पढ़ लिख गए, इसलिए हम गवर्नमेंट सर्वेंट हैं, नहीं पढ़ते तो गवर्नमेंट होते..... सुना कर वर्तमान हालातों पर कटाक्ष किया। कहीं भगतसिंह सोचते होंगे कि यार सुखदेव राजगुरु हम भी किन सालों के लिए मर गए.... कविता के माध्यम से युवा पीढ़ी को झकझोर किया। चिराग जैन ने प्रतीकों और विशेषणों के माध्यम से श्रोताओं को चौंका दिया। उनकी कविता मेरे पिता ने मुझे कभी गुडिय़ा से नहीं खेलने दिया, ताकि मैं सीख सकूं कि लड़कियां खेलने की चीज नहीं है...अगर दुश्मन करे आगाज हम अंजाम लिख देंगे, लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे सुना कर सोच को नया विस्तार देकर दर्शकों को हुटिंग के लिए मजबूर कर दिया। मेरठ से आई श्रृंगार रस की कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने रूकमणि के प्रेम को नए अलंकार दिए। साथ हमारा जनम जनम का रिश्तों को संसार, फिर भी जग ने प्रीत को मेरी किया नहीं स्वीकार सुना कर रुक्मणी के रिश्तों को परिभाषित किया। अमीरी ये अता की है कलम देकर मुझे रब ने मुहब्बत शायरी में और हिंदुस्तान दिल में है, इक बात करे वो जो हर बात पे भारी हो कुछ बात हमारी हो.... के माध्यम से युवाओं को दाद देने पर मजबूर कर दिया। वीर रस के कवि अशोक चारण ने यह जहरीला घूंट कसम से हंस कर भी पी जाऊंगा...तथा क्यों रातों के घोर तिमिर को जबरन घोर बनाते हो... सुना कर श्रोताओं में जोश भर दिया। हास्य व्यंग्य कवि नवीन पार्थ ने वर्तमान परिस्थितियों पर कटाक्ष किए देखो संतों की शरण में यहां सुलतान गया, देर है पर नहीं अंधेर यह भी मान गया... तथा हमें सब है पता कि पैसा कहां है कुर्सी के नीचे दबा कर रखा है के माध्यम से व्यंग्य बाण छोड़े। हास्य व्यंग्य के कवि सुनील व्यास ने परंपराओं की यादों को नए तेवर दिए वो गुनगुनी सी धूप वो अलसाई सी सांझ, वो पुरवाई की खुशबू वो छतों पर जाना, लगाना निशाना यार बहुत याद आते है। वो महकते बहकते खतों को जमाना... तथा वो साइकिल का पहिया वो तार का स्टेयरिंग... सुना कर यादों के चित्र खड़े कर दिए।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक मदन राठौड़, यूआईटी चेयरमैन संजय ओझा, सांसद प्रतिनिधि राकेश भाटी, सुनिल भंडारी, पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़, आसान होम्स के बाबूलाल आर्य, अजयभाई, दिनेश टेलर, सरपंच सरदारराम बंजारा, दिलीप दवे, राकेश पंवार, नरेश बोहरा, मनीष चौधरी, मनीष पुरोहित, मनीष मीणा, मनीष तिलक, अरिहंत कोठारी, पियूष बसंत शर्मा, मुकेश आर्य, महेंद्र चौहान, रणजीतसिंह, प्रवेश जैन, दिलीपसिंह सिसोदिया, चेतन चौहान, सन्नी पुष्करणा आदि मौजूद थे।

परिवार में आपसी सामंजस्य से होता है कार्य : अंबर

अनामिका अंबर ने कहा कि मंचों पर वे कवयित्री है, लेकिन परिवार में आपसी सामंजस्य कूट-कूटकर भरा है। दरअसल, मंच से काव्य प्रस्तुति कर रहे युगल दंपत्ति सौरभ सुमन और अनामिका अंबर के नव वर्षीय पुत्र काव्य व सात वर्षीय पुत्र ग्रंथ कवि है। सौरभ वीर रस के कवि हैं। अंबर बताती है कि कविता की प्रस्तुति व शैली पर परिवार में बातचीत व चर्चा जरूर होती है, लेकिन विषयों को चयन और प्रस्तुति के अंदाज अपने अपने होते हैं। बच्चों में संस्कार के साथ ही उनकी रूचि को महत्व देने से व्यक्तित्व में निखार आता है। यह बात साहित्य में भी सटीक बैठती है।

ख्यातनाम कवियों ने श्रोताओं को श्रृंगार, हास्य, व्यंग्य, परंपरा व वीर रस से सराबोर किया, देर रात तक जमे श्रोता
पाली. दैनिक भास्कर, यूआईटी, राजस्थान ब्राह्मण महासभा, युवा परिषद व आसान होम्स के संयुक्त तत्वावधान में लाखोटिया उद्यान में आयोजित कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देती कवियित्री अनािमका जैन, मंचस्थ अन्य कवि व मौजूद श्रोता।

खबरें और भी हैं...