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लोकगीतों में मांड और बॉलीवुड के तड़के से खिला संगीत का नया स्वरूप

3 वर्ष पहले
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शनिवार की शाम पाली की सांस्कृतिक परपंराओं में एक और यादगार अध्याय जोड़ गई। मौका था दैनिक भास्कर व नगर परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित म्यूजिकल नाइट का। बॉलीवुड सिंगर स्वरूप खान के साथ डांस इंडिया डांस फेम श्वेता शारदा व जतिन कुमार और आरजे शैलेंद्र की जुगलबंदी ने शहरवासियों के लिए संगीत की यादगार शाम सजाई। बांगड़ स्कूल मैदान पर आयोजित म्यूजिकल नाइट में स्वरूप खान ने अपने चिरपरिचित सूफीयाना अंदाज में लोकगीतों को मांड और बॉलीवुड तड़के साथ पेश किया। उनके साथ काव्या ने जुगलबंदी करते हुए कई नई-पुरानी फिल्मों के गीत सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। डांस मिमिक्री को नए अंदाज में पेश करते हुए जतिन कुमार व श्वेता शारदा ने सधी हुई प्रस्तुतियों से युवा दर्शक-श्रोताओं को रोमांचित किया। लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में स्वरूप खान ने लोक संस्कृति, धर्म-अध्यात्म से लेकर बॉलीवुड गीतों को अपने अंदाज में सुनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत विधायक ज्ञानचंद पारख,सभापति महेन्द्र बोहरा, उपसभापति मूलसिंह भाटी सहित गणमान्य जनों ने दीप प्रज्वलित कर की। आरजे शैलेंद्र व्यास ने खुले मंच पर एंट्री लेते ही अपने शहर व अपनी परपंराओं के सम्मान में पाली के लिए तालियां बजाने व हाथ लहराने का श्रोताओं से आग्रह किया। खम्मा घणी व पगे लागूं सा कहते हुए उन्होंने कार्यक्रम का आगाज किया। गणेश वंदना के बाद गायिका काव्या ने राम चाहे मीरा चाहे, आई मैं तो आई, छूना ना मुझे दूर ही रहना, जीया रे जीया सहित कई गीतों की प्रस्तुति दी। श्रोताओं को अपनी गायिकी के साथ तालियों से संगत देने का आग्रह किया।

मंच को चूमते हुए काला चश्मा व हरा चुनरीदार साफा बांधे स्वरूप खान ने आयो रे आयो रंगीलो मेहमान गाते हुए स्टेज पर एंट्री ली। हवा में लहराती हरी-पीली व लाल झालर के बीच उन्होंने मांड गायकी के अंदाज में आओ नी पधारो म्हारे देश गीत को दिलकश अंदाज में गाया। बाद में कच्ची डोरिया, दिल दिया गल्ला, मुस्कुराने की वजह तुम हो, म्हारी घूमर है नखराली, मेरे रश्के कमर सुनाकर श्रोताओं में रोमांच भर दिया। काव्या के साथ उन्होंने जुगलबंदी करते हुए छाप तिलक सब छीनी, होलिया में उड़े रे गुलाल, पूरा लंदन ठुमकता, ताऊ हट जा थोड़ा नचने दे, मां तुझे सलाम, होली खेले रघुबीरा, मोरीया आछ्यो बोल्यो रे, जग घूमिया थारे जैसा व छोटी सी उमर परणाई गीतों की मनोहारी गायकी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। राजस्थानी गीतों को उन्होंने पूरे अल्हड़पन व मौज मस्ती के साथ प्रस्तुत किया। मैं कौनी डरूं सा भले ही काढो अंखिया, हरियाला बन्ना, म्हारे लहरिये रा नौ सौ रुपया सुनाकर राजस्थान की संस्कृति से रूबरू कराया। लोक देवता बाबा रामदेव से जुड़े भजन रूणेचा रा धणिया की गायकी के वक्त श्रोताओं ने उन्हें जमकर दाद दी।

फोटो : गौरव शर्मा

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