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अब पाली समेत तीन मेडिकल कॉलेज में निरीक्षण को लेकर संशय

3 वर्ष पहले
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एमसीआई की बताई कमियों को 95 प्रतिशत से अधिक पूरा करने के बाद भी पाली समेत प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेज में दोबारा एमसीआई के निरीक्षण और इस सत्र से कॉलेज शुरू होने पर संशय बना हुआ है। इसको लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार व एमसीआई की दोबार निरीक्षण काे लेकर बैठक होगी। अब दो से तीन दिन में पता चलेगा कि टीम पाली, भरतपुर और डूंगरपुर कॉलेज का निरीक्षण करने आएगी या नहीं। जानकारी के अनुसार नवंबर में एमसीआई का निरीक्षण होने के बाद टीम की ओर से सौंपी रिपोर्ट में कई खामियां बताई थीं। इसके बाद पाली मेडिकल कॉलेज की ओर से उन खामियों को पूरा कर फरवरी महीने में केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि 95 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। इसके बाद राजस्थान मेडिकल एज्युकेशन साेसायटी के अधिकारियों को इसका फोलोअप लेकर रिपोर्ट और निरीक्षण की करीब 4 लाख फीस जमा करानी थी, लेकिन इसमें राजमेस के अधिकारियों ने लापरवाही बरती। नतीजतन, चूरू और भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज का ही निरीक्षण हुआ। अब केंद्र व राज्य सरकार की ओर से फिर से एमसीआई के निरीक्षण के लिए दखल किया जा रहा है। केंद्र सरकार व एमसीआई अधिकारियों के साथ बैठक के बाद फैसला आएगा कि एमसीआई की टीम निरीक्षण के लिए आएगी या नहीं।

राजमेस के अधिकारियों को फॉलोअप लेकर करानी थी फीस जमा, अधिकारी रिपोर्ट में ही उलझे रहे : एमसीअाई ने दिसंबर में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि पाली समेत तीन मेडिकल कॉलेज का आवेदन निरस्त कर दिया गया है तो इसके बाद फरवरी में जमा हुई रिपोर्ट का फोलोअप लेकर रिपोर्ट के लिए 1 लाख व दोबारा निरीक्षण के आवेदन के लिए 3 लाख रुपए की फीस जमा करानी थी। इधर, अधिकारी केवल रिपोर्ट में ही उलझे रहे।

केंद्रीय विधि राज्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान मिली फाइल नहीं पहुंचने की जानकारी

यह सारा मामला तब सामने आया जब 10 अप्रैल को केंद्रीय विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी निरीक्षण के दौरान पाली मेडिकल काॅलेज पहुंचे। एमसीआई निरीक्षण के लिए जब एमसीआई के अधिकारियों से बातचीत की तो सामने आया अभी तक एलओपी के लिए दूसरी बार अावेदन ही नहीं किया है।

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इधर, एमसीआई ने भी बिना निरीक्षण किए निरस्त किया आवेदन

- दोनों सरकार मिलकर प्रदेश के नए मेडिकल कॉलेज शुरू कराने में जुटी है। कमियों की रिपोर्ट सौंपने के बाद भी एमसीआई ने बिना निरीक्षण कर इसे निरस्त कर दिया था। इस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई और अब दोबारा निरीक्षण के लिए एमसीआई को लिखा है।

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एमसीआई की बताई कमियां पूरा कर दो माह पहले केंद्र सरकार को भेज दी थी रिपोर्ट, राजमेस ने फीस तक जमा नहीं कराई

चूरू और भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण इसलिए

चूरू और भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण हो चुका है। वह भी इसलिए क्योंकि नवंबर में हुए निरीक्षण के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इन दोनों मेडिकल कॉलेज में कुछ खामियां हैं जिसे समय पर पूरा किया जा सकता है और इसके लिए टीम फिर से निरीक्षण करेगी।

...और पाली, भरतपुर व डूंगरपुर का इसलिए था अटका

पाली समेत भरतपुर व डूंगरपुर का मामला इसलिए अटका, क्योंकि एमसीआई की रिपोर्ट में साफ कह दिया था कि यहां कई खामियां हैं इसलिए 2018-19 सत्र के लिए इनके लैटर ऑफ परमिशन के आवेदन को निरस्त कर दिया गया है।

हमने कमियों को पूरा कर फरवरी में ही रिपोर्ट वहां जाकर सौंप दी थी। एमसीआई ने भी बिना निरीक्षण किए इसे निरस्त कर दिया था, लेकिन अब मंगलवार को फिर बैठक होनी है। हमारी तैयारी पूरी है और सारी कमियां भी पूरी कर दी है। - डॉ. दिलीप चौहान, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली

एमसीआई को 31 मई तक कॉलेज के लिए स्वीकृति देनी होती है। उनके शेड्यूल में आते ही टीम आ जाएगी। बैठक में समय तय किया जाएगा। तीनों कॉलेज के लिए एमसीआई की टीम आएगी और नए मेडिकल कॉलेज शुरू होंगे। - बच्छनेश अग्रवाल, अतिरिक्त निदेशक, राजमेस व चिकित्सा शिक्षा

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