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बांगड़ अस्पताल में शिशु विभाग का एचओडी बनने और अोपीडी में नेम प्लेट लगाने की बात को लेकर डॉक्टर हुए आमने-सामने

3 वर्ष पहले
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पाली. बांगड़ अस्पताल में शिशु विभाग का एचओडी बनने और नेम प्लेट लगाने को लेकर दो डॉक्टर आमने-सामने हो गए है।

तीन-चार महीने से दोनों के बीच में चल रहा था विवाद, डाॅ. कुरैशी ने वीआरएस के लिए कर रखा था आवेदन

भास्कर संवाददाता |पाली

बांगड़ अस्पताल में शिशु विभाग का एचओडी बनने और नेम प्लेट लगाने को लेकर दो डॉक्टर आमने-सामने हो गए। दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि इसकी शिकायत पहले प्रिंसिपल तक फिर विधायक तक जा पहुंची। इधर, इस मामले को लेकर कॉलेज प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि अस्पताल का संचालन कॉलेज के नियमानुसार ही होगा। हालांकि मामला सोमवार सुबह का है। दरअसल, शिशु रोग विभाग में कुछ महीने पूर्व डॉ. आरके विश्नोई को एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया था। इसी विभाग में डॉ. रफीक कुरैशी पहले से शिशु रोग विशेषज्ञ नियुक्त थे, इसी दौरान फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए डॉ. कुरैशी को भी एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया था। तभी से दोनों में एचओडी को लेकर अनबन चलती आ रही थी। दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि डॉ. कुरैशी वीआरएस के लिए आवेदन कर अवकाश पर चले गए, इस पर डॉ. विश्नोई ने ओपीडी में उनके कमरे के बाहर अपनी नेम प्लेट लगा दी और जब डॉ. कुरैशी सोमवार को अस्पताल पहुंचे तो इस बात को लेकर नाराजगी जताते हुए दोनों आमने-सामने हो गए। इधर, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार डॉ. विश्नोई ही एचओडी होंगे।

अस्पताल का संचालन वरिष्ठता से नहीं, कॉलेज की व्यवस्थाओं के अनुसार होगा : कॉलेज प्रबंधन

यह है पूरा मामला: बात चैंबर से लेकर वरिष्ठता की, इसलिए बढ़ रहा है विवाद

दोनों डॉक्टर्स में विवाद चैंबर और वरिष्ठता का है। डाॅ. कुरैशी अस्पताल में 15 साल से कार्यरत है और डॉ. विश्नोई को करीब एक साल पूर्व ही यहां एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया है। दोनों में शुरू से ओपीडी चैंबर और वरिष्ठता को लेकर अनबन चल रही थी। डॉ. कुरैशी का कहना है कि वे सीनियर है और डॉ. विश्नोई उनका कहना नहीं मानते हैं। इधर, डॉ. विश्नोई का कहना था कि वे एचओडी है तो उनके निर्देश की पालना जरूरी है। इस दौरान डॉ. कुरैशी वीआरएस के लिए आवेदन कर अवकाश पर चले गए। इस बीच डॉ. विश्नोई ने उनके चैंबर के बाहर अपनी नेम प्लेट लगा दी और इसी बात को लेकर दोनों में विवाद बढ़ गया।

नियमानुसार एचओडी डॉ. विश्नोई, इतने दिन अवकाश पर थे एचओडी को भी नहीं पता : कॉलेज प्रबंधन

इस मामले को लेकर कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार एचओडी डॉ. विश्नोई ही होंगे और विभाग का संचालन उनके निर्देश में ही होगा। इतना ही नहीं, कॉलेज प्रबंधन की ओर से यह भी कहा गया है कि डॉ. कुरैशी इतने दिन अवकाश पर थे उसकी जानकारी भी न तो प्रिंसिपल को थी और न ही एचओडी को।

पूर्व में भी दोनों के बीच ओपीडी में बैठने को लेकर भी हुआ था विवाद, तब डॉ. कुरैशी को आवंटन की थी 8 यूनिट

इतना ही नहीं डॉ. विश्नोई और डॉ. कुरैशी के बीच पूर्व में ओपीडी में बैठने और इंडोर में मरीजों को देखने के लिए भी विवाद हो चुका है। इस दौरान प्रिंसिपल ने डॉ. कुरैशी को अलग से 8 यूनिट का आवंटन इंडोर में किया था, लेकिन इसके बाद भी दोनों में विवाद लगातार जारी रहा।

ऐसा कुछ मामला नहीं है। छोटा-मोटा विवाद है यह तो होता ही रहता है। हम जल्द ही इसे निपटा देंगे। -डॉ. रफीक कुरैशी, शिशु रोग विशेषज्ञ, बांगड़ अस्पताल

मुझे जब पता चला कि वे वीआरएस के लिए आवेदन कर अवकाश पर चले गए हैं और एक महीने से ओपीडी में बड़ा चैंबर खाली है तो उसमें मैंने अपनी नेम प्लेट लगा दी तो इसी बात पर वे नाराज हो गए। पूर्व में भी हमने उनके निर्देशन में ही काम किया है और आगे भी उनके सहयोग से काम करेंगे, लेकिन नियम और व्यवस्था जो हैं वो तो लागू होगी। -डॉ. आरके विश्नोई, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज, पाली

हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज के स्तर की चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराएं, इसके लिए थोड़ा समय लगेगा। अस्पताल का संचालन मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं के तहत और उसी के नियमानुसार ही होगा। डॉ. विश्नोई एचओडी है तो उन्हें एचओडी मानना ही पड़ेगा। वैसे डॉ. कुरैशी के अवकाश पर जाने की जानकारी मुझे भी नहीं थी। -डॉ. दिलीप चौहान, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली

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