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आखातीज पर प्रशासन का अबूझ अंधेरा

3 वर्ष पहले
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बाल विवाह को लेकर प्रशासन कितना सतर्क है और सरकारी आदेशों की किस स्तर तक पालना होती है कि इसका खुलासा बुधवार को लाखोटिया उद्यान में हुए गोस्वामी समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान हुआ। यहां ऐन फेरों के वक्त किसी की शिकायत के जरिये पुलिस को पता चला कि तीन नाबालिगों की शादी हो रही है। अधिकारी मौके पर पहुंचे और तीनों संबंधित जोड़ों को फेरों से उठाकर पाबंद कराया। इससे पहले किसी ने भी जोड़ों की उम्र की जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई।

बुधवार को लाखोटिया उद्यान में सामूहिक विवाह सम्मेलन था। यहां 21 जोड़े परिणय सूत्र में बंधने वाले थे। सभी जोड़े व उनके माता-पिता फेरों के लिए बैठ चुके थे। उसी दौरान किसी की शिकायत पर औद्योगिक थाना प्रभारी बंशीलाल वैष्णव वहां पहुंचे। उन्होंने जोड़ों के दस्तावेज चैक किए तो पता चला कि दो लड़के व एक लड़की नाबालिग है। उनको तहसीलदार रमेशचंद केे समक्ष पेश किया। तहसीलदार ने तीनों के परिजनों को पाबंद कर रवाना किया। इसके बाद समिति द्वारा शेष जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। पुलिस के अनुसार सम्मेलन में विवाह के लिए पंजीकृत पातुस, जैतारण निवासी अनिता 17 साल एक माह व सुनील पुरी 20 साल 3 माह तथा चिरपटिया निवासी अरविंद की उम्र दस्तावेजों की जांच में 20 साल पांच माह ही निकली।

जिला मुख्यालय पर सामूहिक विवाह, फेरों के वक्त पता चला दो लड़के व एक लड़की नाबालिग, शिकायत पर रुकवाने पहुंची पुलिस

अब जिम्मेदार ढूंढ रहे गली - शिकायत के बाद मामला सामने आने के बाद सभी विभागों ने कहा हमसे नहीं ली मंजूरी, न ही सूचना दी

लाखोटिया उद्यान में आयोजित गोस्वामी समाज के सामूहिक विवाह में पुलिस ने ऐनवक्त पर रुकवाया तीन जोड़ों का विवाह

जबकि... कई दिन से मीडिया में खबरें, प्रचार के होर्डिंग, बाल विवाह रोकने के लिए कलेक्टर से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक व कार्ड

छापने से लेकर हलवाई तक जिम्मेदार, फिर भी किसी ने प्रयास नहीं किया सामूहिक विवाह में शामिल जोड़ों की जानकारी जुटाने का

पाली. शिकायत मिलने पर लाखोटिया उद्यान में सामूहिक विवाह के दौरान दो नाबालिग लड़के और एक लड़की की शादी फेरों में बैठने के बाद पुलिस ने रुकवाई।

बालविवाह निषेध अधिनियम 2006 व सरकारी आदेशों के तहत प्रशासन के अधिकारी से लेकर शादी में शामिल होने वाले सब जिम्मेदार, जानकारी नहीं मिलने की आड़ में जिम्मेदारी से नहीं बच सकते ये सब

पुलिस व प्रशासन की विफलता : शहर में इतने बड़े आयोजन की परमिशन पुलिस व प्रशासन से लेनी होती है। समिति ने नहीं भी ली तो संबंधित थाना पुलिस व बीट कांस्टेबल क्या कर रहे थे। एसडीएम, तहसीलदार व हल्का पटवारी भी जिम्मेदार।

नगर परिषद- लाखोटिया उद्यान में नगर परिषद ने सामूहिक विवाह की मंजूरी दी। क्यों नहीं चैक किया कि जिनकी शादी हो रही है वे सब बालिग हैं या नाबालिग।

लेकिन... सब चूके और नाबालिग फेरों तक पहुंच गए- इस पूरे मामले से यह उजागर हुआ कि बालविवाह रोकने के लिए जिनकी जिम्मेदारी तय की गई है वे कितने सजग हैं। इनमें से किसी भी स्तर पर जांच हुई होती तो यह नौबत नहीं आती। आयोजन समिति को भी अच्छे प्रयासों के बावजूद ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

समाज कल्याण और महिला अधिकारिता विभाग- सामूहिक विवाह की भले ही परमिशन नहीं ली। समिति को इसका अनुदान नहीं चाहिए था। फिर भी आखातीज पर तो बालविवाह रोकने का अलर्ट था। क्यों नहीं अधिकारियों ने खुद जानकारी जुटाई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक अपने इलाके मे बाल विवाह होने की स्थिति में जिम्मेदार है।

सुनील

अनिता

...और कार्ड छापने वाला, कैटरिंग, बैंड-घोड़ी तथा समारोह में शामिल होने वाले भी- अधिनियम और सरकारी आदेशों के तहत बाल विवाह होने की स्थिति में शादी व उसके आयोजन से जुड़ा हर आदमी जिम्मेदार है। कार्ड छापने से लेकर कैटरिंग, हलवाई, बैंड-घोड़ी, मैरिज लॉन तक को पाबंद किया है।

आयोजन समिति : सामूहिक विवाह करने वाली संस्था भले ही समाज सुधार का काम कर रही है लेकिन कानूनी तौर पर वह भी बाध्य है कि नाबालिग का विवाह न हो। समिति ने जोड़ों के दस्तावेज क्यों नहीं जांचे।

अरविंद

दस्तावेजों की जांच में सुनील 20, अनिता 17 व अरविंद 20 साल के ही पाए गए।

कार्रवाई करने पहुंचे तहसीलदार व पुलिसकर्मी।

समाज की पहल अच्छी, तथ्य छिपाने के लिए लोग जिम्मेदार

समाज में दहेज और बड़े खर्च जैसी कुरीतियों के खिलाफ मुहिम छेड़ने की दिशा में समाजबंधुओं ने बढ़चढ़कर सहयोग किया। तथ्य छिपाने के लिए लोग व्यक्तिश: जिम्मेदार हैं। दो लड़कों व एक लड़की के नाबालिग होने के कारण 3 जोड़ों की शादी प्रशासन ने रुकवाई। एक लड़की पूर्व में विवाहित थी। उस जोड़े की शादी भी रोकी गई। -सुरेश गोस्वामी, जिलाध्यक्ष, गोस्वामी महासभा

कंट्रोल रूम के माध्यम से सामूहिक विवाह में नाबालिग जोड़ों के विवाह की सूचना मिली थी। तीन नाबालिग जोड़ों की पुष्टि होने पर शादी रुकवाई। -रमेशचंद्र, तहसीलदार, पाली

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