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जोधपुर रूट पर बस संचालन के लिए परिवहन नियमों से ज्यादा यूनियन की मनमानी, परेशान मालिक ने आरटीओ ऑफिस में खड़ी कर दी बस

3 वर्ष पहले
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जिले के परिवहन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से पाली-जोधपुर तथा सादड़ी-जोधपुर के बीच चलने वाली निजी बसें एक परमिट पर ही दो-तीन चक्कर लगा रही हैं। यह बसें तय रूट से जाने की बजाय फोरलेन से ही आ-जा रही हैं। दूसरी तरफ जिस बस मालिक ने जोधपुर-सादड़ी के बीच दो परमिट ले रखे हैं। उसके लिए शर्त ऐसी है कि वे अपनी मनमर्जी का टाइम दे रहे हैं, ताकि वह बस को ही नहीं चला सके। ऐसे में परेशान होकर मालिक ने अपनी बस को ही 3 महीने से परिवहन विभाग के कार्यालय में लाकर खड़ा कर दिया है। तेज धूप में बस खड़ी रहने से खराब भी हो रही, मगर अधिकारियों को उससे कोई लेना-देना नहीं है। जानकारी के अनुसार नवलखा निवासी फिरोज खान पुत्र अब्दुल लतीफ बस लेकर आया था और 25 मई 2011 को परमिट के लिए आवेदन किया और बस चलाने लगा। इस दौरान उसे जोधपुर रूट का संचालन नहीं करने दिया। बाद में उसे बस संचालन करने दी तो वक्त ऐसा दिया गया, ताकि उसे निर्धारित सवारियां नहीं मिल सके। इस पर बस मालिक ने 22 अगस्त 2012 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की और इस पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को आदेश की पालना के लिए निर्देशित किया गया। 14 जनवरी 2016 को जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। फिरोज का कहना है कि वह आरटीओ अधिकारियों की मनमानी की शिकायत मुख्यमंत्री के जनसंवाद में करना चाहता था। लेकिन अधिकारियों ने उसे न्याय दिलाने का आश्वासन देकर रोका। अब फिर टालमटोल कर रहे हैं।

पाली-जोधपुर रूट पर 60 बसें 3 से 4 फेरे करती है, जबकि सादड़ी-जोधपुर रूट पर िसर्फ 35 बसें, और फेरे 3 से 4 ही

दो परमिट होने के बाद भी बस संचालन की अनुमति नहीं, 28 हजार टैक्स की भी भरपाई

पाली निवासी फिरोज खान ने अपनी बस के लिए जोधपुर-सादड़ी आने-जाने के लिए दो परमिट ले रखे हैं। आरोप है कि यूनियन वाले अपनी मनमानी के कारण बसों को रूट पर चलाने नहीं दे रहे। यूनियन ने अपने हिसाब से रूट का टाइम तय कर रखा है। लगातार हो रहे घाटे को देखते हुए अब बस मालिक भी परेशान हो चुका है। उसका कहना है कि 28 हजार रुपए का परमिट फीस चुकाना तथा डीजल का खर्च निकालना भी उसके लिए मुश्किल हो गया है। इसके चलते वह बस का संचालन नहीं कर रहा।

परिवहन विभाग कार्यालय में तीन माह से खड़ी बस।

यूनियन पदाधिकारियों की सफाई-झूठ बोल रहा, परमिट है तो चलाए बस

दूसरी तरफ गोडवाड़ बस यूनियन के अध्यक्ष बिल्लू भाई तथा जोधपुर बस यूनियन के अध्यक्ष जफर भाई का कहना है कि बस मालिक गलत बात कर रहा है। जफर भाई का कहना है कि पूर्व में भी उसकी बस लगाने में उल्टा मदद किया था। बिल्लू भाई ने बताया कि एसोसिएशन में पहले से चल रही बसों के समय के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाती। छोड़छाड़ होने पर एसोसिएशन द्वारा विरोध किया जाता है। उक्त बस मालिक का सहयोग भी किया। बस चालकों ने उसे एक-एक मिनट का समय दिया। फिर भी उसे 20 मिनट चाहिए थे। वह इसके लिए दबाव बना रहा है।

परमिट सरेंडर में कारण लिखा...बस नहीं चलने देने का तो, परमिट निलंबित भी नहीं कर रहे

हर महीने बस मालिक को हजारों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसको लेकर उनकी सुनवाई तक नहीं हो रही है। इस पर जब परमिट सरेंडर करने के लिए आवेदन किया और उसमें सरेंडर करने का करण बस नहीं चलने देने का हवाला दिया तो परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इसे भी अटका दिया। बस मालिक फिरोज खान ने बताया कि इसके लिए 31 मार्च 2018 को ही आवेदन कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी अधिकारी परमिट को निलंबित नहीं कर रहे हैं। इसके चलते उसने बस को ही ले जाकर आरटीओ में खड़ा कर दिया है।

कोई समस्या है तो विभाग हल करेगा

परिवहन विभाग द्वारा फिराेज को पहले पाली से जोधपुर का परमिट दिया गया। इसके बाद उसकी मांग पर सादड़ी तक का भी परमिट दिया गया। उसने काफी महीने तक बस इस रूट पर चलाई है। बाद में बस को लाकर कार्यालय में खड़ा कर दिया। वह गाड़ी चलाएगा तो पता चलेगा, क्या समस्या आ रही है। परिवहन विभाग द्वारा कोई समस्या आ रही है तो उसे विभाग हल करेगा या कोई अन्य विवाद करता है, तो उसे पुलिस प्रशासन हल करेगा। -सीपी गुप्ता, डीटीओ, परिवहन विभाग पाली

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