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3 संतान के तथ्य को छिपाने के लिए रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले में हाईकोर्ट ने खारिज की एफआईआर रद्द करने की याचिका

3 वर्ष पहले
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सोजत उपखंड के बगड़ी नगर पंचायत में वर्तमान वार्डपंच मोहनलाल हामड व उपसरपंच बालूराम हामड व अन्य के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में आरोप प्रमाणित होने के बाद आरोपियों द्वारा उच्च न्यायालय जोधपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट निरस्त करवाने के लिए आवेदन किया था। जिसकी पूर्व सुनवाई में दिनांक 15 फरवरी को परिवादी के वकील दिवाकर शर्मा द्वारा मामले में रिकॉर्ड की फेरबदल व तथ्यों से न्यायालय को अवगत करवाया था, जिसको गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश संदीप मेहता की पीठ ने अनुसंधान अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब किया था। रोस्टर परिवर्तन के बाद 11 मई को मामले में न्यायधीश विजय विश्नोई की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा अनुसंधान के दौरान जो साक्ष्य संकलित किये गए हैं, उससे मामले में किसी प्रकार की बनावट व असत्यता प्रकट नहीं होती है। पुलिस द्वारा स्कूल व ग्राम पंचायत का जो रिकॉर्ड सीज़ किया गया, उससे प्रकट होता है कि प्रकरण में रिकॉर्ड में हेरफेर हुई है व आरोपी मोहनलाल द्वारा बनावटी दस्तावेज का निर्माण किया गया है। आईओ द्वारा प्रस्तुत तथ्यात्मक रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने के आदेश देते हुए आरोपियों की ओर से पेश याचिका को खारिज कर लिया।

अब किसी भी समय हो सकती है वार्डपंच सहित तत्कालीन प्रधानाध्यापक व उपसरपंच की गिरफ्तारी

मूल याचिका खारिज होने के साथ ही गिरफ्तारी पर लगी रोक भी हुई समाप्त, अब पुलिस कर सकती है गिरफ्तार

प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी थी, लेकिन मूल याचिका खारिज होने के साथ ही गिरफ्तारी पर लगी रोक भी स्वत: समाप्त हो जाने से अब प्रकरण में आरोपियों की किसी भी समय गिरफ्तारी की जा सकती है।

भास्कर में समाचार प्रकाशित होने के बाद हुआ था प्रकरण में मुकदमा दर्ज

मामले में भास्कर द्वारा “पंचायत चुनाव में 3 संतान का तथ्य छिपाने के लिए रिकॉर्ड में की गड़बड़ी, वार्डपंच ने बता दिया जुड़वा “ के शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद पुलिस ने हरकत में आते हुए मामला दर्ज किया था।

यह था मामला

परिवादी की रिपोर्ट के अनुसार बगड़ी नगर ग्राम पंचायत के तत्कालीन उपसरपंच बालूराम ने कार्यवाहक सरपंच रहते अपने पुत्र के 3 संतान होने के तथ्य को छिपाने के लिए पंचायत में उपसरपंच रहते जन्म-मृत्यु रजिस्टर में फेरबदल कर के स्वयं के हस्ताक्षर से तस्दीक कर प्रमाण पत्र जारी करवाया था व इसके आधार पर विद्यालय रिकॉर्ड में भी विद्यालय स्टाफ से मिलीभगत कर हेरफेर करवा ली गई और इसका उपयोग करते हुए उनके पुत्र मोहनलाल ने वार्डपंच का चुनाव जीता था। जिस पर पुलिस ने पिता बालूराम व पुत्र मोहनलाल के साथ तत्कालीन प्रधानाध्यापक मानाराम के विरुद्ध मामला दर्ज किया था।

पंचायती राज विभाग सुस्त, आज तक आरंभ नहीं की विभागीय जांच व निलंबन की प्रकिया

पंचायतीराज विभाग के नियमों के मुताबिक कोई भी जनप्रतिनिधि के विरुद्ध गलत सूचना या गलत तथ्य के आधार पर चुनाव लड़ने की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच व जनप्रतिनिधि के निलंबन की कार्रवाई की जाती है, लेकिन विभाग इससे बेखबर बन बैठा है।

आईओ राजेंद्र त्यागी रहे व्यक्तिगत उपस्थित

मामले में अनुसंधान अधिकारी त्यागी स्वयं प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। राज्य की ओर से लोक अभियोजक वी एस राजपुरोहित ने पैरवी करते हुए आरोपियों की याचिका खारिज करने के समर्थन में कथन किए।

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