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जुम्मे की नमाज के साथ अकीदत से रखा पहला रोजा

3 वर्ष पहले
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मुस्लिम समाज ने रमज़ानुल मुबारक महीने के पहले जुम्मा की नमाज शुक्रवार को अकीदत और एहतराम से साथ अदा की। माह का पहला जुम्मा व रोजा होने के कारण मोमीन अल सुबह से ही नमाज अदा करने की तैयारियों में जुट गए। जो दोपहर 12 बजे से रंग बिरंगे नए कपड़े पहन, खुशबूदार इत्र की महक से सरोबार होकर व सिर पर विभिन्न प्रकार की टोपी लगाकर मस्जिद के लिए निकले। दोपहर को 2 बजते ही शहर की सभी मस्जिदें मोमिनों से लबरेज हो गई और पेश इमामों ने रमज़ानुल मुबारक महीने की फजीलत पर तकरीर पेश की। नाडी मोहल्ला छोटी मस्जिद के मौलाना अंसार अहमद ने रमजान उल मुबारक के इस विशेष महीने पर मोमिनों से ख़िताब करते हुए कहा की इस महीने में रोजा रखना, नमाज पढ़ना, गरीबों को उनका हक जकात के रूप में अदा करना और कुराने पाक की तिलावत करना चाहिए। यह महीना मोमिनों को खुशियां बांटने का महीना है। इस महीने में हर एक नेकी के बदले मोमिन को 70 नेकियों का शबाब मिलता है। वहीं मौलाना अंसार अहमद ने खुत्बा पढ़ा व मोमिनों ने जुम्मा की विशेष नमाज अदा कर देश प्रदेश में अमन चैन व खुशहाली की दुआएं मांगी गई। अंत में सलातो सलाम का नजराना पेश कर मोमिनों ने एक-दूसरे के गले मिल जुम्मा की मुबारकबाद दी।

रमजान

मुस्लिम समाज ने रमज़ानुल मुबारक महीने के पहले जुम्मा की नमाज शुक्रवार को अकीदत और एहतराम से साथ अदा की

पाली. मोमिनों ने शुक्रवार को इस्लाम मजहब के पवित्र माह रमजान के पहले जुम्मे की नमाज अदा की।

अल्लाह तआला ने मुसलमानों पर रमज़ान शरीफ के रोजे फर्ज किए हैं। रोजा इबादत ही नहीं बल्कि इंसान को कई बीमारियों से महफूज़ रखता है। रोजा मिर्गी, वज़न बढ़ना, नींद की कमी, पेट की बीमारियाें का बहुत अच्छा इलाज है। आज कल विभिन्न प्रकार की ख्वाहिशें दिल में बढ़ने से इंसान कई तरह की बीमारियों का शिकार होने लगता है। रोजा रखने से रोजेदार में सब्र और बर्दाश्त करने की हिम्मत पैदा होती है। शुगर भी कई बीमारियों की तरह एक खतरनाक बीमारी है। इसे बीमारियों की जड़ कहा जाता है। ये बीमारी ज्यादातर मोटापे की वजह से होती है। रोजा इस बीमारी का एक बेहतरीन इलाज है। जब इंसान 30 दिन तक कम खाना खाता है तो वजन घटने से उसका शुगर अपने आप गिर जाता है। शुगर का असर गुर्दे, दिमाग की नसें और दिल पर होता है। हाजी तारा बाबू, सदर, मुस्लिम समाज पाली

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