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नेहड़ा बांध को लेकर किसान लगातार बोल रहे फैक्ट्रियों के पानी से बांध में जम गई स्लज

3 वर्ष पहले
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जयपुर में 12 मई को सीएमओ में प्रदूषण मुद्दे पर लिए गए निर्णयों के आधार पर गुरुवार को कई विभागों के अधिकारियों तथा सीईटीपी के प्रतिनिधियों ने नेहड़ा बांध का अवलोकन किया। किसानों का कहना था कि नेहड़ा बांध में लगातार आ रहे फैक्ट्रियों के पानी से बांध खराब होने के साथ ही इसमें स्लज जमा हो गई है। इसे सीईटीपी अपने खर्च पर साफ कराने के निर्देश दिए थे, मगर रीको, जल संसाधन विभाग, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी बांध के पेटाकाश्त में जमा मिट्टी व पानी के सैंपल लेकर आ गए। अब सैंपल रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि इसमें रसायनयुक्त स्लज जमा है या नहीं। सीईटीपी का मानना है कि लगातार 2 साल से बांध के आेवरफ्लो होने के कारण इसमें स्लज नहीं है, जबकि किसानों का आरोप है कि उद्यमियों के दबाव के कारण अधिकारियों को भी बांध की बर्बादी नजर नहीं आ रही है।

जानकारी के अनुसार शहर की फैक्ट्रियों का पानी लगातार बांडी नदी से लेकर नेहड़ा बांध में जाने को लेकर प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़े रहे किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने उद्यमियों के साथ सरकार व प्रशासन को भी परेशानी में डल रखा है। एनजीटी में भी इस मामले को लेकर सुनवाई हो रही है। गत 25 अप्रैल को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पाली आगमन पर किसानों ने प्रदर्शन कर प्रदूषण से नेहड़ा बांध की बर्बादी को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद सीएमओ में किसानों, सीईटीपी व प्रमुख जनप्रतनिधियों को गत 12 मई को बुलाकर विशेष बैठक ली थी। बैठक में नेहड़ा बांध को लेकर मुख्यमंत्री के सचिव तन्मय कुमार तथा राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के चेयरमैन डाॅ. अर्पणा अरोड़ा ने बांध में जमा स्लज को हटाने के लिए कहा था। यह कार्य सीईटीपी को अपने खर्च पर रीको या नगरपरिषद से कराने के लिए कहा था।

सीईटीपी का मानना है कि लगातार 2 साल से बांध के आेवरफ्लो होने के कारण इसमें स्लज नहीं हैं

सीएमओ

में बैठक में सीईटीपी को स्पष्ट कहा था नेहड़ा में जमी हुई स्लज अपने खर्च पर साफ कराए

सीईटीपी को नजर आया बांध साफ, अधिकारियों ने भी सैंपल रिपोर्ट पर छोड़ी स्लज सफाई

बताया जाता है कि नेहड़ा बांध का अवलोकन करने के लिए जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता रामनारायण चौधरी, रीको के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सक्सेना, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी यशपाल मीणा, सीईटीपी के उपाध्यक्ष अमरचंद बोहरा तथा तकनीकी सलाहकार दीपक परिहार के साथ गए थे। सीईटीपी प्रतिनिधियों को नेहड़ा बांध की स्थिति काफी बेहतर नजर आई। उनका कहना था कि बांध के आेवरफ्लो होने के कारण स्लज नहीं है। इसके बाद अधिकारियों ने बांध से मिट्टी तथा पानी के सैंपल लिए हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।

भास्कर संवाददाता | पाली

जयपुर में 12 मई को सीएमओ में प्रदूषण मुद्दे पर लिए गए निर्णयों के आधार पर गुरुवार को कई विभागों के अधिकारियों तथा सीईटीपी के प्रतिनिधियों ने नेहड़ा बांध का अवलोकन किया। किसानों का कहना था कि नेहड़ा बांध में लगातार आ रहे फैक्ट्रियों के पानी से बांध खराब होने के साथ ही इसमें स्लज जमा हो गई है। इसे सीईटीपी अपने खर्च पर साफ कराने के निर्देश दिए थे, मगर रीको, जल संसाधन विभाग, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी बांध के पेटाकाश्त में जमा मिट्टी व पानी के सैंपल लेकर आ गए। अब सैंपल रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि इसमें रसायनयुक्त स्लज जमा है या नहीं। सीईटीपी का मानना है कि लगातार 2 साल से बांध के आेवरफ्लो होने के कारण इसमें स्लज नहीं है, जबकि किसानों का आरोप है कि उद्यमियों के दबाव के कारण अधिकारियों को भी बांध की बर्बादी नजर नहीं आ रही है।

जानकारी के अनुसार शहर की फैक्ट्रियों का पानी लगातार बांडी नदी से लेकर नेहड़ा बांध में जाने को लेकर प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़े रहे किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने उद्यमियों के साथ सरकार व प्रशासन को भी परेशानी में डल रखा है। एनजीटी में भी इस मामले को लेकर सुनवाई हो रही है। गत 25 अप्रैल को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पाली आगमन पर किसानों ने प्रदर्शन कर प्रदूषण से नेहड़ा बांध की बर्बादी को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद सीएमओ में किसानों, सीईटीपी व प्रमुख जनप्रतनिधियों को गत 12 मई को बुलाकर विशेष बैठक ली थी। बैठक में नेहड़ा बांध को लेकर मुख्यमंत्री के सचिव तन्मय कुमार तथा राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के चेयरमैन डाॅ. अर्पणा अरोड़ा ने बांध में जमा स्लज को हटाने के लिए कहा था। यह कार्य सीईटीपी को अपने खर्च पर रीको या नगरपरिषद से कराने के लिए कहा था।

सीईटीपी

का तर्क-मिट्टी के नमूने तथा पानी की सैंपल रिपोर्ट के बाद ही सफाई का निर्णय होगा

नेहड़ा बांध में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। पूरा बांध साफ नजर आ रहा है। इसके बाद भी वहां से अधिकारियों ने मिट्टी व पानी की जांच के लिए सैंपल लिए हैं। एक-दो दिन में सैंपल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -अमरचंद बोहरा, उपाध्यक्ष, सीईटीपी

सीईटीपी की मंशा ही नहीं है कि प्रदूषण की समस्या का समाधान हो। नेहड़ा बांध में लगातार रंगीन पानी जाने से बांध की स्थिति खराब हो चुकी है। अब भी उनको बांध का साफ नजर आ रहा है। इससे स्पष्ट है कि उनको किसानों की समस्या से कोई मतलब ही नहीं है। - महावीरसिंह सुकरलाई, महामंत्री, किसान पर्यावरण संघर्ष समिति, पाली

किसानों का आरोप

उद्यमियों के दबाव में नेहड़ा की बर्बादी अधिकारियों को भी नहीं नजर आ रही

इधर, हाईकोर्ट की जयपुर बैंच में प्रदूषण मामले को लेकर आरओ हुए पेश, रिपोर्ट सौंपी

राजस्थान हाईकोर्ट में प्रदेश की नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेशस्तरीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ स्थानीय क्षेत्रीय अधिकारी राजीव पारीक भी पेश हुए। कोर्ट ने उनसे बांडी नदी में प्रदूषण की स्थिति के साथ ही सीईटीपी के बारे में भी कई सवाल-जवाब किए। न्यायाधीशों ने पारीक से प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक किए गए निर्णयों के बारे में भी जानकारी ली। जानकारी के अनुसार रामगढ़ बांध समेत प्रदेश के अन्य जलस्रोतों के सरंक्षण में पाली, बालोतरा, सांगानेर समेत अन्य स्थानों के जलस्रोतों में प्रदूषण का मामला उठा था। इस पर संबंधित स्थानों के प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारियों को हाईकोर्ट की डबल बैंच ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान तलब किया था। पाली से क्षेत्रीय अधिकारी से कोर्ट ने प्रदूषण फैलाने के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। इस पर पारीक ने कहा कि बोर्ड की तरफ से कानूनी कार्रवाई भी की गई है। दो बार मुकदमे भी दर्ज कराए जा चुके हैं। साथ ही सीईटीपी के बारे में विस्तृत रूप से हाईकोर्ट में रिपोर्ट भी पेश की।

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